इज़राइल में संघर्ष के दौरान नौकरियों के लिए जाने वाले भारतीय निर्माण श्रमिकों का प्रथम बैच 2 अप्रैल 2024 को रवाना हुआ। इसे इज़राइली राजदूत नाओर गिलोन और सरकारी अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इज़रायली सरकार के अनुरोध पर श्रमिक हुए रवाना:
- इज़रायली सरकार ने नवंबर 2023 में निर्माण श्रमिकों के लिए तत्काल अनुरोध किया था।
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इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने पर चर्चा की थी।
भारतीय श्रमिकों की आवश्यकता क्यों?
- इज़रायल-हमास संघर्ष के पूर्व इज़रायल में इस तरह के श्रमिकों की आपूर्ति फिलिस्तीन से होती थी। परन्तु 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए आतंकवादी हमलों के बाद फिलिस्तीनी श्रमिकों को सन्देह से देखा जाने लगा।
- हजारों फिलिस्तीनियों के इज़रायल में काम करने पर प्रतिबंध लगाने के बाद देश को बड़े पैमाने पर श्रमिकों की कमी का सामना करना पड़ा था। इज़रायल में निर्माण उद्योग को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी सन्दर्भ में इज़रायली सरकार के अनुरोध पर भारत से निर्माण श्रमिकों को भेजने का निर्णय लिया गया है।
भारत से कुल दस हजार श्रमिकों भेजने की योजना:
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पिछले कुछ महीनों में हरियाणा और उत्तर प्रदेश में एक बड़े अभियान के दौरान 64 श्रमिकों के पहले समूह की भर्ती की गई थी। वे अपेक्षित 10,000-मजबूत कार्यबल का हिस्सा हैं, जिन्हें अगले कुछ हफ्तों में इज़राइल भेजा जाएगा। जिनमें से लगभग हर दिन एयर इंडिया और यहां तक कि चार्टर्ड उड़ानों से उड़ान भरी जाएगी।
- यह जानकारी इजरायली दूतावास द्वारा आयोजित विदाई समारोह में राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद ने एक प्रस्तुति में दी।
भारतीय श्रमिकों को इजरायल में मिलने वाली सुविधाएँ:
- इज़राइल के साथ हस्ताक्षरित फ्रेमवर्क समझौते और कार्यान्वयन प्रोटोकॉल के अनुसार, भारतीय श्रमिकों का इज़राइली नागरिकों के रूप में श्रम अधिकारों के संबंध में समान व्यवहार किया जाएगा।
- भारतीय श्रमिकों को उचित आवास, चिकित्सा बीमा और प्रासंगिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज के साथ-साथ निर्धारित वेतन और लाभ प्रदान किए जाएंगे।
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करार के मुताबिक, इन श्रमिकों को न्यूनतम एक वर्ष के लिए और अधिकतम पांच साल तक के लिए इजराइल में रहना होगा। इन श्रमिकों को प्रति माह एक लाख 35 हजार रुपये का वेतन मिलेगा।
हरियाणा से 219 श्रमिक हुए चयनित:
- हरियाणा सरकार ने गत वर्ष इस्राइल में नौकरी करने के इच्छुक लोगों से दस हजार पदों के लिए आवेदन मांगे थे। इसके लिए 8199 श्रमिकों ने आवेदन किया। इनमें से 1909 श्रमिकों का चयन हुआ। बाद में कौशल परिक्षण के दौरान सिर्फ 219 श्रमिक चयनित किए गए।
भारतीय श्रमिकों को इजरायल भेजने का हुआ विरोध:
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सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स ने नैतिक मुद्दों पर सवाल उठाते हुए सरकार से श्रमिकों को न भेजने का आग्रह किया था। क्योंकि भारतीय श्रमिकों को संघर्ष के दौरान फिलिस्तीनी श्रमिकों की जगह लेना है।
किन क्षेत्रों में श्रमिक करेंगे कार्य:
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भारतीय कौशल विकास एजेंसी को पिछले साल 15 नवंबर को इजरायली रोजगार एजेंसी पीआईबीए से 10,000 निर्माण श्रमिकों की मांग मिली थी। इन श्रमिकों को निम्न विभिन्न कार्यक्षेत्रों में लगाया जाएगा:
- फॉर्मवर्क के लिए 3,000
- आयरन बेंडिंग के लिए 3,000
- वेल्डिंग के लिए 3,000, 2,000
- पलस्तर के लिए, और सिरेमिक टाइलिंग के लिए 2,000 लोग शामिल थे।
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दो राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश में किए गए दक्षता परीक्षणों के बाद, 9,727 श्रमिकों को योग्य पाया गया। उन्हें इज़राइल की यात्रा के लिए अनुबंध की पेशकश की जा रही है।
- इन्हीं में से 64 लोगों का पहला बैच रवाना हुआ। इसके साथ ही अनुमानित 1,500 भारतीय अप्रैल में इज़राइल में काम के लिए रवाना होंगे।
इज़राइल के बारे में:
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राजधानी: जेरूसलेम
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मुद्रा: इज़राइली शेकेल
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प्रधानमंत्री: बेंजामिन नेतन्याहू
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भाषा: हिब्रू (दाएँ से बाएँ लिखी जाती है)।