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Updated: 19 May 2026
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बिहार सरकार ने देश का तीसरा 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट' (NIFTEM) स्थापित करने के लिए, वैशाली जिले के हाजीपुर में 100 एकड़ ज़मीन के हस्तांतरण को सैद्धांतिक मंज़ूरी दी है।
इस संस्थान से बिहार के युवाओं के लिए खाद्य प्रसंस्करण, उद्यमिता, अनुसंधान, कौशल विकास और रोज़गार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
इस परियोजना से किसानों को कृषि उत्पादों में 'वैल्यू एडिशन' (मूल्य संवर्धन), आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण तकनीकों और बेहतर बाज़ार पहुँच को बढ़ावा देकर सहायता मिलने की उम्मीद है।
NIFTEM की स्थापना से बिहार के खाद्य प्रसंस्करण इकोसिस्टम को मज़बूती मिलने और राज्य में कृषि-आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ूड टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (NIFTEM) भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) के तहत दो प्रमुख शैक्षणिक और अनुसंधान इन दोनों संस्थानों का इतिहास अलग-अलग है:
NIFTEM-K की परिकल्पना खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए एक अंतरराष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में की गई थी। धान संस्थानों का संचालन करता है।
वर्ष 2006 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा केंद्रीय बजट में इसकी आधिकारिक घोषणा की गई।
वर्ष 2012: मई में कुंडली, सोनीपत में ₹500 करोड़ के शुरुआती निवेश के साथ इसका उद्घाटन किया गया।
वर्ष 2021: संसद के एक अधिनियम द्वारा 'डी नोवो' (de novo) श्रेणी के तहत इसे "डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी" घोषित किया गया।
NIFTEM-तंजावुर (तमिलनाडु) (जिसे पहले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ क्रॉप प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी, या IICT के नाम से जाना जाता था) की शुरुआत एक छोटी अनुसंधान प्रयोगशाला के रूप में हुई थी, जिसके बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।
वर्ष 1967 में डॉ. वी. सुब्रमण्यम द्वारा तिरुवरूर में एक विशेष R&D प्रयोगशाला के रूप में इसकी शुरुआत की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य अधिक नमी वाले धान के संरक्षण पर काम करना था।
वर्ष 1972 में इसे एक राष्ट्रीय प्रयोगशाला के रूप में उन्नत किया गया और इसका नाम बदलकर 'पैडी प्रोसेसिंग रिसर्च सेंटर' (PPRC) कर दिया गया।
वर्ष 1984: इसे तंजावुर में स्थित इसके वर्तमान, विस्तृत परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया।
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