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Updated: 22 May 2026
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भारत ने यूएसए को पीछे छोड़कर बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनने का गौरव हासिल किया है, जो दक्षिण एशियाई व्यापार की बदलती गतिशीलता को दर्शाता है।
चीन अभी भी शीर्ष पर बना हुआ है, जबकि भारत द्वारा आवश्यक वस्तुओं और औद्योगिक इनपुट का निर्यात द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है।
बांग्लादेश सांख्यिकी ब्यूरो (BBS) के नवीनतम व्यापार आँकड़ों के अनुसार फरवरी, 2026 तक बांग्लादेश की समग्र व्यापार रैंकिंग में भारत ने अमेरिका को बहुत मामूली अंतर से पीछे छोड़ दिया है।
भारत का योगदान बांग्लादेश के कुल बाहरी व्यापार का 8.47% रहा, जो लगभग 123.28 अरब टका के बराबर है।
अमेरिका 8.46% के साथ भारत के बहुत करीब रहा, जो लगभग 123.17 अरब टका के बराबर है। यह अंतर बेहद मामूली है, लेकिन इस आँकड़े का प्रतीकात्मक महत्त्व बहुत अधिक है।
फरवरी माह में, चीन का योगदान बांग्लादेश के कुल व्यापार का लगभग 21.21% रहा, जिसका मूल्य लगभग 308.79 अरब टका है।
चीन का यह प्रभुत्व मुख्य रूप से बांग्लादेश की चीनी औद्योगिक आयात पर निर्भरता के कारण बना हुआ है।
भारत और बांग्लादेश अपनी साझा सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक घटनाओं के कारण एक जैविक बंधन साझा करते हैं।
इसमें वर्ष 1947 में भारत के विभाजन के दौरान हुए नुकसान और बड़े पैमाने पर परिवारों का अलग होना भी शामिल है।
भारत ने वर्ष 1971 में मुक्ति संग्राम के दौरान स्वतंत्र बांग्लादेश के उदय में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और मुक्ति संग्राम के दौरान अनुमानित 10 मिलियन शरणार्थियों को शरण भी दी थी।
इसके अलावा, भारत बांग्लादेश को एक अलग राज्य के रूप में मान्यता देने वाला पहला देश था।
गौरतलब है कि, 16 दिसंबर का बांग्लादेश में ‘मुक्ति दिवस’ और भारत में ‘विजय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
भारत बांग्लादेश के साथ 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है, जो दुनिया में पाँचवीं सबसे लंबी सीमा है। भारत के असम, पश्चिम बंगाल, मिजोरम, मेघालय और त्रिपुरा राज्यों की सीमा बांग्लादेश से संबद्ध है।
यह भारत की सुरक्षा और विदेश नीति के लिए महत्त्वपूर्ण है। भारत को चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ नीति का मुकाबला करने के लिए बांग्लादेश से सहयोग की आवश्यकता है।
उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान में भारत-बांग्लादेश कॉर्पेट ‘बोंगोसागर’ अभ्यास का संस्करण, तट रक्षकों के क्षेत्रीय कमांडरों की बैठक और वार्षिक रक्षा संवाद शामिल हैं।
रेल कनेक्टिविटी: वर्तमान में दोनों देशों के बीच तीन रेलगाड़ियों का संचालन किया जा रहा है: मैत्री एक्सप्रेस (2008 से, कोलकाता और ढाका को जोड़ती है); बंधन एक्सप्रेस (2017 से, कोलकाता और खुलना को जोड़ती है); और मिताली एक्सप्रेस (जून, 2022 से, न्यू जलपाईगुड़ी और ढाका के बीच)।
नवंबर, 2023 को भारत के अगरतला स्टेशन और बांग्लादेश के अखौरा के बीच छठे सीमा-पार रेल संपर्क का उद्घाटन किया। यह रेल संपर्क भारत के उत्तर-पूर्व को वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगा।
भारत और बांग्लादेश के बीच चालू किए गए अन्य पाँच रेल संपर्क हैं:
हल्दीबाड़ी (भारत) - चिलाहाटी (बांग्लादेश) रेल संपर्क
पेट्रापोल (भारत) - बेनापोल (बांग्लादेश)
गेडे (भारत) - दर्शना (बांग्लादेश)
सिंहाबाद (भारत) - रोहनपुर (बांग्लादेश)
राधिकापुर (भारत) – बिरोल (बांग्लादेश)।
वर्तमान में भारत और बांग्लादेश के बीच कोलकाता, अगरतला और गुवाहाटी शहरों को ढाका और आगे खुलना तक जोड़ने वाली पाँच बस सेवा मार्ग संचालित हैं।
वर्ष 1972 से ही भारत और बांग्लादेश के बीच अंतर्देशीय जलमार्ग व्यापार और पारगमन प्रोटोकॉल (PIWTT) संचालित है। यह अंतर-देशीय व्यापार के लिए माल की आवाजाही के साथ-साथ भारत और बांग्लादेश की नदी प्रणालियों के माध्यम से बजरों/जहाजों पर पारगमन की अनुमति देता है।
बंदरगाह कनेक्टिविटी: दोनों देशों ने वर्ष 2023 में चटगाँव और मोंगला बंदरगाहों के उपयोग के लिए समझौते को लागू किया है।
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