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Updated: 21 May 2026
3 Min Read

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूरोप यात्रा के दौरान, स्वीडन भारत के 'वीनस ऑर्बिटर मिशन' (शुक्र ग्रह मिशन) में शामिल हो गया।
इसके अलावा नॉर्वे ने द्विपक्षीय अंतरिक्ष सहयोग को मज़बूत करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
भारत का शुक्र मिशन, जिसे लोकप्रिय रूप से ‘शुक्रयान’ या 'वीनस ऑर्बिटर मिशन' (VOM) के रूप में जाना जाता है, शुक्र ग्रह और उसके वायुमंडल का अध्ययन करने के लिए ISRO का एक नियोजित मिशन है।
ISRO के 'वीनस ऑर्बिटर मिशन' के 2028 में लॉन्च होने की उम्मीद है और यह शुक्र ग्रह के लिए भारत का पहला समर्पित मिशन होगा। भारत का शुक्र अंतरिक्ष यान 112 दिनों की यात्रा पर निकलेगा।
स्वीडन का 'स्वीडिश इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस फिजिक्स' एक वैज्ञानिक उपकरण विकसित करेगा, जिसका नाम 'वीनसियन न्यूट्रल्स एनालाइज़र' (VNA) है। यह उपकरण भारत के शुक्र ऑर्बिटर पर स्थापित किया जाएगा।
VNA इस बात का अध्ययन करेगा कि सूर्य से आने वाले आवेशित कण शुक्र के वायुमंडल और बाह्यमंडल के साथ किस प्रकार परस्पर क्रिया करते हैं।
शुक्र ऑर्बिटर मिशन को 2024 में मोदी कैबिनेट ने मंज़ूरी दी थी, जिसके लिए 1,236 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था। इस मिशन के तहत, एक LVM-3 रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष यान को पहले एक अंडाकार कक्षा में भेजा जाएगा।
इसके बाद, यह यान धीरे-धीरे शुक्र ग्रह की कक्षा में स्थापित हो जाएगा, जहाँ इसकी सबसे नज़दीकी दूरी (periapsis) 500 km और सबसे दूर की दूरी (apoapsis) 60,000 km होगी।
इस मिशन में कुल 19 पेलोड (वैज्ञानिक उपकरण) शामिल होंगे, जिनमें भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय, दोनों तरह के उपकरण होंगे। इस मिशन के 'प्रारंभिक डिज़ाइन समीक्षा' (Preliminary Design Review) का काम अप्रैल, 2026 में पूरा हो गया था।
इस मिशन के ज़रिए, ISRO का लक्ष्य शुक्र ग्रह के घने वातावरण, ज्वालामुखी वाली सतह, मौसम प्रणालियों और वहाँ मौजूद रहस्यमयी 'सुपर-रोटेटिंग' बादलों का अध्ययन करना है।
वैज्ञानिक इस बात की भी जाँच करना चाहते हैं कि क्या कभी शुक्र ग्रह पर तरल पानी के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ मौजूद थीं, जो बाद में बदलकर एक बेहद गर्म 'ग्रीनहाउस' ग्रह में तब्दील हो गईं।
अमेरिका - मेरिनर शृंखला वर्ष 1962-1974, वर्ष 1978 में पायनियर वीनस- 1 और पायनियर वीनस- 2, वर्ष 1989 में मैगेलन।
रूस - वेनेरा की अंतरिक्षयान शृंखला वर्ष 1967-1983, वर्ष 1985 में वेगास- 1 और वेगास- 2।
जापान - वर्ष 2015 में अकात्सुकी।
यूरोप - वर्ष 2005 में वीनस एक्सप्रेस
इसका नाम प्रेम और सुंदरता की रोमन देवी के नाम पर रखा गया है। यह चंद्रमा के बाद रात के समय आकाश में दूसरा सबसे चमकीला प्राकृतिक ग्रह है, शायद यही कारण है कि यह पहला ग्रह था जिसे दूसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व आकाश में अपनी गति के कारण जाना गया।
हमारे सौरमंडल के अन्य ग्रहों के विपरीत शुक्र और यूरेनस अपनी धुरी पर दक्षिणावर्त घूमते हैं।
कार्बन डाइऑक्साइड की उच्च सांद्रता के कारण यह सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह है जो एक तीव्र ग्रीनहाउस प्रभाव पैदा करता है। सौरमंडल में किसी भी ग्रह के एक बार घूर्णन में 243 पृथ्वी दिवस और सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने हेतु 224.7 पृथ्वी दिवस लगते हैं।
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