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Utkarsh Classes
Updated: 05 Apr 2025
3 Min Read

रक्षा एवं अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की देखरेख में भारतीय सेना की पूर्वी और दक्षिणी कमान ने मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एमआर-एसएएम) के चार उपयोगकर्ता परीक्षण सफलतापूर्वक किए हैं ।
इस मिसाइल को भारत और इजरायल ने भारतीय सशस्त्र बलों के इस्तेमाल के लिए संयुक्त रूप से विकसित किया है। यह परीक्षण 3 और 4 अप्रैल, 2025 को ओडिशा के तट पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप पर किया गया था।
डीआरडीओ के अनुसार, एमआर-एसएएम प्रणाली के इस सफल उपयोगकर्ता परीक्षण के साथ, मिसाइल प्रणाली भारतीय सेना की पूर्वी और दक्षिणी कमान में शामिल होने के लिए तैयार है।
इस मिसाइल को पहले ही भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना में शामिल किया जा चुका है।
मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली को डीआरडीओ और इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (आईएआई) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।
यह एक बैलिस्टिक मिसाइल है जिसे हवाई खतरों के खिलाफ़ डिज़ाइन किया गया है।
मिसाइल की मारक दूरी 70 किलोमीटर है।
यह कई लक्ष्यों को एक साथ भेद सकती है।
मिसाइल की लंबाई 4.5 मीटर है और इसका वजन 275 किलोग्राम है।
मिसाइल को जहाज़ या ज़मीन से लॉन्च किया जा सकता है।
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