संयुक्त राष्ट्र ने 5 जनवरी 2024 को ‘विश्व आर्थिक स्थिति और संभावनाएं (डब्ल्यूईएसपी) 2024’ नाम से अपना वार्षिक रिपोर्ट जारी किया। डब्ल्यूईएसपी में कहा कि 2024 में भारत की आर्थिक विकास दर 6.2% रहेगी। यह विकास दर दक्षिण एशिया में सर्वाधिक है।
डब्ल्यूईएसपी 2024 के मुख्य बिन्दु:
- भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.2 प्रतिशत के साथ 2024 में सबसे तेज बढती अर्थव्यवस्था वाला देश बना रहेगा। 2025 में भारत की जीडीपी बढ़कर 6.6 प्रतिशत होने का अनुमान है।
- वर्ष 2023 में भारतीय अर्थव्यवस्था की अनुमानित विकास दर 6.3 फीसदी रहा था।
- भारतीय अर्थव्यवस्था की वजह से एशिया व दुनिया की समग्र विकास दर को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
- दक्षिण एशिया में सकल घरेलू उत्पाद में 5.2% की वृद्धि होने का अनुमान लगाया है।
2022-2025 तक भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान (यूएन):
- 2022 - 7.7%
- 2023 - 6.3%
- 2024 - 6.2%
- 2025 - 6.6%
भारतीय अर्थव्यवस्था की 2024 में वृद्धि का अनुमान:
संस्था वृद्धि का अनुमान
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संयुक्त राष्ट्र - 6.2%
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विश्व बैंक - 6.3%
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आईएमएफ - 6.3%
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आरबीआई - 6.5%
संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट में वैश्विक आर्थिक वृद्धि:
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संयुक्त राष्ट्र के रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक आर्थिक वृद्धि 2023 में अनुमानित 2.7% रही। यह इस वर्ष 2024 में 2.4 प्रतिशत होने का अनुमान है। यह कोविड महामारी से पहले की तीन प्रतिशत की वृद्धि दर से भी नीचे है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के तेज विकास का मुख्य कारण:
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भारत की आर्थिक विकास दर तेज होने के पीछे घरेलू मांग व सेवा सेक्टर का अच्छा प्रदर्शन होना मुख्य कारण है।
- चीन की आर्थिक स्थिति के बिगड़ने की आशंका में निवेशकों का भारत की ओर आकर्षित होने से भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी आना भी एक कारण है।
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डब्ल्यूईएसपी में यह माना गया है कि महंगाई को काबू में करने के जो तरीके यहां की सरकार व आरबीआई उठा रहे हैं उसका असर दिख रहा है।
महंगाई दर बढ़ने की संभावना:
- वर्ष 2023 की औसत महंगाई की दर 5.7 फीसदी से घट कर 4.5 रहने के अनुमान लगाए गए हैं। महंगाई दर आरबीआई की तरफ से तय स्तर (दो से छह फीसदी) के बीच रहेगी। लेकिन वैश्विक वजहों से इसमें वृद्धि होने की संभावना व्यक्त की गई है।
- संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने बेरोजगारी दूर करने के मोर्चे पर भी दूसरे देशों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।
सितंबर 2023 में 7.1% रही बेरोजगारी दर:
- अगस्त, 2023 में भारत के श्रम बाजार में कोरोना महामारी के बाद सर्वाधिक लोगों की भागीदारी रही जो बताता है कि अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है।
- सितंबर, 2023 में बेरोजगारी दर 7.1 फीसदी रही है जो पिछले एक वर्ष का सबसे न्यूनतम स्तर है। रिपोर्ट में यहां तक कहा गया है कि मानसून के खराब होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर घट रही है।
- एशिया के अन्य देशों में बेरोजगारी की स्थिति में विशेष सुधार नहीं हुआ है। वास्तव में कई देशों में स्थिति और भी खराब हुई है।
चीन की आर्थिक प्रगति को लेकर संयुक्त राष्ट्र संशय में:
- रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र चीन की आर्थिक प्रगति को लेकर ज्यादा भरोसे नहीं है। विशेषकर जिस तरह से वहां प्रॉपर्टी की कीमतों में इजाफा हुआ है। इससे वहां निवेश के माहौल में गिरावट आने की बात कही गई है।
- भारत वर्ष 2023 में विदेशी निवेशकों का आकर्षित करने में सफल रहा है और वर्ष 2024 भी कुछ इसी तरह का होगा।
विदेशी निवेशकों की भारत में बढ़ती रूचि:
- भारत में सरकार की ओर से पूंजीगत व्यय में 43% की वृद्धि की गयी है जिससे निवेश का माहौल बनाने में मदद मिली है।
- रिपोर्ट के अनुसार बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अब अधिक रूचि ले रही है। इन कंपनियों की तरफ से मैन्यूफैक्चरिंग आधार को विस्तार देने की रणनीति में भारत केंद्र में है।
- वर्ष 2022 में भारत में होने वाला एफडीआई 49 अरब डॉलर का रहा था। वर्ष 2021 के मुकाबले 10% अधिक था।