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Updated: 19 Jun 2025
4 Min Read
भारत सरकार ने इजरायल-ईरान युद्ध के कारण ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए ऑपरेशन सिंधु शुरू किया है। यह ऑपरेशन ईरान और आर्मेनिया सरकार के सहयोग से शुरू किया गया है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, ऑपरेशन सिंधु 18 जून 2025 को शुरू किया गया था, और 110 भारतीय छात्रों का पहला जत्था आर्मेनिया की राजधानी येरेवान से एक विशेष उड़ान से नई दिल्ली पहुंचा।
बाद में, 19 जून 2025 को विदेश मंत्रालय ने ऑपरेशन सिंधु का दायरा को बढ़ाते हुए इजरायल में फंसे भारतीय नागरिकों को भी इसमे शामिल कर लिया है।
ईरान को रोकने के लिए इजरायल ने ईरान के परमाणु और सैन्य स्थलों को निशाना बनाते हुए ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ शुरू किया। इजरायल के अनुसार, सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई की है, और दोनों देशों के बीच युद्ध जारी है, जिसमें ईरान द्वारा इजरायल पर लगातार मिसाइल हमला और ईरान पर इजरायल के द्वारा हवाई हमले किए जा रहें है।
शुरू में उत्तरी ईरान में भारतीय छात्रों को निकाला जा रहा है। ईरान की उत्तरी सीमा अजरबैजान, आर्मेनिया, तुर्कमेनिस्तान और कैस्पियन सागर से लगती है।
भारत के अजरबैजान के साथ अच्छे संबंध नहीं हैं, लेकिन आर्मेनिया और तुर्कमेनिस्तान के साथ उसके अच्छे संबंध हैं।
इस प्रकार, उत्तरी ईरान में भारतीयों को पहले सड़क मार्ग से आर्मेनिया पहुंचाया गया और राजधानी येरेवान पहुंचाया गया।
येरेवान से उन्हें विशेष विमानों से भारत लाया गया।
आगे भी भारत सरकार ईरान से भारतीयों को निकालने के लिए अर्मेनियाई मार्ग का उपयोग कर सकती है।
अतीत में, भारत सरकार ने दुनिया भर के संघर्ष क्षेत्रों से भारतीयों को निकालने के लिए इसी तरह के अभियान शुरू किए हैं।
कुवैत से निकासी 1990
ऑपरेशन सुकून 2006 (लेबनान)
ऑपरेशन सेफकमिंग 2011 (लीबिया)
ऑपरेशन राहत 2015 (यमन)
ऑपरेशन संकट मोचन 2016 (दक्षिण सूडान)
ऑपरेशन देव शक्ति 2021 (अफ़गानिस्तान)
ऑपरेशन गंगा 2022 (यूक्रेन)
यह भी पढ़ें: इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करने के लिए ऑपरेशन राइजिंग लायन शुरू किया
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