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सुदर्शन पटनायक: फ्रेड डारिंगटन सैंड मास्टर पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय
Updated: 07 Apr 2025
2 Min Read

ओडिशा के प्रसिद्ध रेत कलाकार और मूर्तिकार सुदर्शन पटनायक, इंग्लैंड के डोरसेट के वेमाउथ में आयोजित सैंडवर्ल्ड के अंतर्राष्ट्रीय रेत कला महोत्सव में कला और संस्कृति में उत्कृष्टता के लिए प्रतिष्ठित फ्रेड डारिंगटन पुरस्कार जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं।
सुदर्शन को उनके,भगवान गणेश की 10 मीटर ऊंची रेत की मूर्ति के लिए यह पुरस्कार मिला ।
वार्षिक सैंडवर्ल्ड अंतर्राष्ट्रीय रेत कला महोत्सव 5-9 अप्रैल 2025 तक दक्षिणी इंग्लैंड के काउंटी डोरसेट के वेमाउथ में आयोजित किया गया था।
सुदर्शन पटनायक पहली बार सैंडवर्ल्ड के अंतर्राष्ट्रीय रेत कला महोत्सव में भाग ले रहे थे।
2025 में वेमाउथ,इस क्षेत्र में रेत मूर्तिकला के 100 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है।
इस क्षेत्र में रेत मूर्तिकला की शुरुआत फ्रेड डारिंगटन ने एक सदी पहले किया था।
यह पुरस्कार फ्रेड डारिंगटन की स्मृति में स्थापित किया गया है।
सुदर्शन पटनायक को इस विशेष अवसर पर आमंत्रित किया गया था, और उन्होंने भगवान गणेश की 10 मीटर ऊंची रेत की मूर्ति बनाई, जो शांति, ज्ञान और भाग्य का प्रतीक है।
वेमाउथ के मेयर पार्षद जॉन ऑरेल ने फ्रेड डारिंगटन के पोते और सैंडवर्ल्ड के निदेशक मार्क एंडरसन की उपस्थिति में सुदर्शन पटनायक को कला और संस्कृति में उत्कृष्टता के लिए फ्रेड डारिंगटन पुरस्कार प्रदान किया।
सुदर्शन पटनायक का जन्म 1977 में ओडिशा के पुरी नामक समुद्र तटीय शहर में हुआ था।
सुदर्शन पटनायक बचपन से ही रेत पर कलाकृतियां बनाने के प्रति आकर्षित थे।
वह प्राकृतिक रेत का उपयोग करके सुंदर मूर्तियां बनाते हैं जो सामाजिक संदेश देती हैं, जैसे जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण, या शांति का प्रतीक, जैसे महात्मा गांधी, नेल्सन मंडेला, आदि।
उनकी उपलब्धियों में 100-फुट लंबी सांता क्लॉज़ की मूर्ति और भगवान गणेश की दुनिया की सबसे बड़ी रेत की मूर्ति शामिल है।
पुरस्कार और सम्मान
उन्हें 2014 में भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार, पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।
उनके द्वारा बनाए गए 12-फुट की भगवान जगन्नाथ की मूर्ति ने रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित गोल्डन सैंड मास्टर पुरस्कार 2024 जीता था।
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