चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान फ्रांस की आधिकारिक यात्रा पर 21 अप्रैल 2024 को रवाना हुए। सीडीएस अनिल चौहान की इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सशक्त रक्षा संबंधों को और भी सुदृढ़ करना है।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता के मद्देनजर भारत-फ्रांस के बीच रक्षा एवं रणनीतिक संबंध अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।
- भारत-फ्रांस के मध्य पिछले कुछ वर्षों में रक्षा संबंधों में महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया है। सीडीएस अनिल चौहान की फ्रांस यात्रा उस समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम सीमा पर पहुँच गया है।
- रक्षा मंत्रालय ने सीडीएस की यात्रा की अवधि का उल्लेख किए बिना कहा कि, इस यात्रा का उद्देश्य, दोनों देशों के बीच मजबूत रक्षा संबंधों को और मजबूत करना है।
सीडीएस अनिल चौहान का फ्रांस में कार्यक्रम:
- जनरल अनिल चौहान की इस यात्रा के दौरान फ्रांस के वरिष्ठ सैन्य एवं नागरिक नेतृत्व के साथ विचार-विमर्श करने का कार्यक्रम है।
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सीडीएस चौहान के फ्रांसीसी समकक्ष चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीईएमए), जनरल थियरी बर्कहार्ड के साथ वार्ता प्रस्तावित है।
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जनरल थियरी बर्कहार्ड फ्रांस में एक साथ कई पदों का नेतृत्व करते हैं, जिनमें प्रमुखतः
- नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हायर डिफेंस स्टडीज (आईएचईडीएन) के निदेशक और आयुध महानिदेशक हैं।
- जनरल अनिल चौहान फ्रांसीसी अंतरिक्ष कमान तथा लैंड फोर्सज कमांड का दौरा करेंगे।
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इसके अलावा वे इकोल मिलिटेयर (मिलिट्री स्कूल) में सेना और संयुक्त स्टाफ कोर्स के सैन्य छात्र अधिकारियों को संबोधित करेंगे।
फ्रांस के रक्षा निर्माण कंपनियों के साथ वार्ता:
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अनिल चौहान का फ्रांस में सफ्रान ग्रुप, नेवल ग्रुप और डसॉल्ट एविएशन सहित कुछ अन्य प्रतिष्ठित रक्षा उद्योग इकाईयों का दौरा करने तथा उनके साथ बातचीत करने का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
भारतीय सैनिकों के सम्मान में पुष्पांजलि अर्पित करेंगे सीडीएस चौहान:
- सीडीएस का न्यूवे-चैपल मेमोरियल और विलर्स-गुइसलेन में भारतीय स्मारक भी जाने का कार्यक्रम है। यहाँ उन बहादुर भारतीय सैनिकों के सम्मान में पुष्पांजलि अर्पित करेंगे, जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया था।
भारत-फ्रांस रक्षा संबंध:
- भारत-फ्रांस संबंधों के मूल में रक्षा साझेदारी है। साथ ही अन्य पश्चिमी देशों की तुलना में फ्रांस भारत के साथ कहीं अधिक इच्छुक और उदार भागीदार के रूप में सामने आता है।
- राफेल सौदे से लेकर विमान के 26 समुद्री संस्करणों के अधिग्रहण तक, फ्रांसीसी, भारतीयों को अपनी कुछ सबसे बेहतरीन रक्षा प्रणालियाँ देने के इच्छुक रहे हैं।
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फ्रांस द्वारा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से भारत को पहले ही छह स्कॉर्पीन-श्रेणी की पनडुब्बियों के निर्माण में मदद मिल चुकी है। साथ ही नौसेना के लिए अब तीन और पनडुब्बियां खरीदी जा रही हैं।
संयुक्त सैन्य अभ्यास:
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भारत-फ्रांस के मध्य तीनों सैन्य स्तर पर संयुक्त सैन्य अभ्यास का आयोजन किया जाता है। जिसमें प्रमुखतः
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शक्ति अभ्यास (सेना)
- वरुण अभ्यास (नौसेना)
- गरुड़ अभ्यास (वायु सेना)