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विश्व युद्धों में भारतीय सेना की भूमिका का सम्मान करेगी ब्राइटन काउंसिल, इंग्लैंड
Updated: 22 Apr 2024
4 Min Read

इंग्लैंड में ब्राइटन और होव काउंसिल ने दो विश्व युद्धों में भारतीय सैनिकों की भूमिका को याद करते हुए उन्हें सम्मानित करने के लिए इस साल अक्टूबर में ब्राइटन शहर के इंडिया गेट स्मारक पर एक वार्षिक बहु-विश्वास कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है।
इस वार्षिक बहु-विश्वास कार्यक्रम में अविभाजित भारत के सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए ब्राइटन में इंडिया गेट पर एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
थॉमस टायरविट ने इंग्लैंड के ब्राइटन में स्तिथ इंडिया गेट स्मारक को डिजाइन किया था। गुजराती वास्तुकला से प्रभावित इस संरचना में एक गुंबद, चार स्तंभों पर टिका हुआ है।
पटियाला के महाराजा भूपेंदर सिंह ने 26 अक्टूबर 1921 को ब्राइटन में इंडिया गेट का अनावरण किया था । ब्राइटन शहर के अस्पतालों द्वारा प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में घायल हुए भारतीय सैनिकों को प्रदान की गई देखभाल के लिए आभार व्यक्त करने के लिए भारत के राजाओं और लोगों द्वारा ब्राइटन के लोगों को इंडिया गेट भेंट किया गया था।
इंडिया गेट की संरचना शाही मंडप के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर स्थित है। प्रथम विश्व युद्ध के पश्चिमी मोर्चे पर घायल हुए बारह हजार भारतीय सैनिकों को ब्राइटन, इंग्लैंड के आसपास के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इनमें यॉर्क प्लेस स्कूल, डोम, कॉर्न एक्सचेंज और रॉयल पवेलियन में स्तिथ अस्पताल शामिल थे।
अविभाजित भारत के भारतीय सैनिकों में आधुनिक भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार और भूटान के सैनिक शामिल थे।
प्रथम विश्व युद्ध (4 अगस्त 1914 से 11 नवंबर 1918) में अविभाजित भारत के लगभग 13 लाख भारतीय सैनिकों ने ब्रिटिश साम्राज्य के लिए वैश्विक स्तर पर विभिन्न युद्ध स्थलों पर लड़ाईयां लड़ी और जिसमे 74,000 से अधिक भारतीय सैनिकों ने अपनी जान गंवाई। भारतीय सैनिकों ने पूर्वी अफ्रीका, मेसोपोटामिया (इराक), मिस्र, गैलीपोली (तुर्की) मेऔर पश्चिमी मोर्चे पर ब्रिटिश साम्राज्य के लिए लड़ाई लड़ी।
द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) में अविभाजित भारत के 25 लाख से अधिक भारतीय सैनिकों ने ब्रिटिश सेना में भाग लिया। इसे मानव इतिहास की सबसे बड़ी स्वयंसेवी सेना माना जाता है। भारतीय सेना को अफ्रीका में जर्मन टैंक डिवीजनों के खिलाफ, म्यांमार (तब बर्मा) में जापानी सेना के खिलाफ लड़ने के लिए तैनात किया गया था। भारतीय सेना ने इटली पर आक्रमण में और मध्य पूर्व के लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अनुमानित 87 हजार भारतीय सैनिकों ने अपनी जान गंवाई थी ।
इंडिया गेट के अलावा, ब्राइटन में प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में लड़ने वाले भारतीय सैनिकों के सम्मान में अन्य स्मारक भी बनाये गए हैं।
छत्री स्मारक
पैचम के पास छत्री स्मारक उस स्थान पर बनाया गया है जहां ब्राइटन अस्पतालों में मारे गए 53 हिंदू और सिख सैनिकों का अंतिम संस्कार किया गया था। स्मारक चबूतरे पर अंग्रेजी, पंजाबी, उर्दू और हिंदी में शिलालेख अंकित हैं। स्मारक का अनावरण 21 फरवरी 1921 को वेल्स के राजकुमार एडवर्ड अष्टम द्वारा किया गया था।
शाहजहाँ मस्जिद, वोकिंग, सरे
अंग्रेजी अस्पतालों में मरने वाले भारतीय मुस्लिम सैनिकों को भी इंग्लैंड में दफनाया गया था। कुछ सैनिकों को इंग्लैंड के वोकिंग, सरे के पास शाहजहाँ मस्जिद के पास एक कब्रिस्तान में दफनाया गया था।
इंडिया गेट को मूल रूप से अखिल भारतीय युद्ध स्मारक के रूप में जाना जाता था। यह इंपीरियल वॉर ग्रेव्स कमीशन जिसे बाद में कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन का नाम दिया गया के तहत बनाया गया था । प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों के लिए लड़ते हुए मारे गए सैनिकों को सम्मानित करने के लिए 1917 में ब्रिटिश सरकार द्वारा इंपीरियल वॉर ग्रेव्स कमीशन की स्थापना की गई थी।
ड्यूक ऑफ कनॉट ने 10 फरवरी 1921 को अखिल भारतीय युद्ध स्मारक की नींव रखी थी। एडवर्ड लुटियंस ने 42 मीटर ऊंचे इंडिया गेट को डिजाइन किया था। 1931 में, वाइसरॉय लॉर्ड इरविन ने इस स्मारक को राष्ट्र को समर्पित किया था ।
इंडिया गेट ,ब्रिटिश सेना के 70,000 भारतीय सैनिकों की याद दिलाता है जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अपनी जान गंवा दी थी।
स्मारक में 1919 के अफगान युद्ध में उत्तर-पश्चिमी सीमा पर मारे गए 13,516 भारतीय और ब्रिटिश सैनिकों के नाम उत्कीर्ण हैं।
इंडिया गेट का पूरा मेहराब भरतपुर के लाल पत्थर से बने आधार पर खड़ा है।
अमर जवान ज्योति को बाद में इंडिया गेट में जोड़ा गया। अमर जवान ज्योति एक अखंड ज्योति है जो दिन-रात जलती रहती है। यह उन भारतीय सैनिकों की याद में है जिन्होंने दिसंबर 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपने प्राणों की आहुति दी थी।
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