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Updated: 13 Nov 2025
5 Min Read

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के पक्षकारों की एमओपी37, 3 से 7 नवंबर 2025 तक केन्या के नैरोबी स्थित संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के मुख्यालय में आयोजित हुई।
इससे पहले 2 नवंबर, 2025 को मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन को सुगम बनाने पर एक अनौपचारिक बैठक हुई।
इस महत्त्वपूर्ण मील के पत्थर का स्मरण करते हुए, सभी पक्ष ओज़ोन परत और जलवायु दोनों की सुरक्षा में और प्रगति करने के लिए कन्वेंशन की सफलता का लाभ उठाने की तैयारी कर रहे हैं।
वर्ष 1985 और 1987 में, क्रमशः वियना कन्वेंशन और उसके मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को अपनाया गया था ताकि समताप मंडल की ओज़ोन परत की रक्षा की जा सके।
इसके लिए क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी), हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन (एचसीएफसी), हैलोन, मिथाइल क्लोरोफॉर्म और मिथाइल ब्रोमाइड सहित ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थों के उत्पादन और उपभोग को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा सके।
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (MOP36) के पक्षकारों की 36वीं बैठक 28 अक्टूबर से 1 नवंबर, 2024 तक बैंकॉक, थाईलैंड में आयोजित की गई।
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर पहली बैठक 2-5 मई, 1989 को हेलसिंकी, फ़िनलैंड में आयोजित की गई थी।
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के पक्षकारों की अड़तीसवीं बैठक (MOP38) 2-6 नवंबर, 2026 को किगाली, रवांडा में आयोजित होने वाली है। MOP38 का उद्देश्य किगाली संशोधन की दसवीं वर्षगांठ को चिह्नित करना है, जिसे वर्ष 2016 में पक्षकारों की 28वीं बैठक के दौरान अपनाया गया था। वर्ष 2025 ओज़ोन परत संरक्षण के लिए वियना कन्वेंशन की 40वीं वर्षगांठ है।
वर्ष 2016 में किगाली संशोधन को अपनाने के साथ, सभी पक्षों ने हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (एचएफसी) के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से कम करने पर भी सहमति व्यक्त की, जो शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें हैं और जिन्होंने प्रशीतन और वातानुकूलन प्रणालियों में कुछ ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थों का स्थान ले लिया था।
इन बहुपक्षीय पर्यावरणीय समझौतों के सफल कार्यान्वयन के बिना, समताप मंडल में ओज़ोन की सांद्रता इतनी कम हो जाती कि पृथ्वी की ओज़ोन परत मनुष्यों और पर्यावरण को सूर्य की पराबैंगनी (यूवी) विकिरण से नहीं बचा पाती, जिसके परिणामस्वरूप व्यापक त्वचा कैंसर, नेत्र मोतियाबिंद, प्रतिरक्षा संबंधी कमियाँ और स्थलीय तथा जलीय जीवन को नुकसान पहुँचता है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के सितंबर, 2025 के ओज़ोन बुलेटिन में बताया गया कि पृथ्वी की सुरक्षात्मक ओज़ोन परत ठीक हो रही है और वर्ष 2024 में ओज़ोन छिद्र हाल के वर्षों की तुलना में छोटा था।
यदि वर्तमान नीतियाँ लागू रहती हैं, तो अंटार्कटिका में ओज़ोन परत के वर्ष 1980 के स्तर (ओज़ोन छिद्र के प्रकट होने से पहले) तक लगभग वर्ष 2066 तक, आर्कटिक में वर्ष 2045 तक और शेष विश्व में वर्ष 2040 तक ठीक हो जाने की उम्मीद है, जैसा कि वर्ष 2022 में ओज़ोन क्षरण के सबसे हालिया चतुर्धातुक वैज्ञानिक आकलन से पता चलता है। अगला आकलन वर्ष 2026 में होगा।
इथियोपिया को अदीस अबाबा (2027) में UNFCCC COP32 की मेजबानी के लिए चुना गया है।
हालांकि, अगले साल के COP31 के मेज़बान का चुनाव अभी भी विवाद का विषय बना हुआ है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया और तुर्की दोनों ही वर्ष 2026 के आयोजन के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
इथियोपिया ने सितंबर में नाइजीरिया के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए अपनी दावेदारी पेश की थी, लेकिन अफ्रीकी देशों के ब्यूरो ने सर्वसम्मति से इथियोपिया को मेजबान उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ाने का फैसला किया।
अफ्रीका के हॉर्न में स्थित एक स्थलरुद्ध देश; वर्ष 1993 में इरिट्रिया के अलग होने के बाद समुद्र तक पहुँच खो दी। पूरी तरह से उष्णकटिबंधीय अक्षांशों में स्थित है।
पड़ोसी देश: इरिट्रिया (उत्तर), जिबूती (उत्तर-पूर्व), सोमालिया (पूर्व), केन्या (दक्षिण), दक्षिण सूडान और सूडान (पश्चिम)।
नवंबर 2025 में, संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने पेरिस, फ्रांस में आयोजित अपने 43वें महाधिवेशन के दौरान, न्यूरोटेक्नोलॉजी के लिए दुनिया का पहला वैश्विक नैतिक ढाँचा, "न्यूरोटेक्नोलॉजी की नैतिकता पर अनुशंसा" को अपनाया। यह ढाँचा 12 नवंबर, 2025 से प्रभावी होगा।
इस मानक उपकरण को अपनाना यूनेस्को की महानिदेशक ऑड्रे अज़ोले द्वारा वर्ष 2019 में शुरू की गई एक व्यापक प्रक्रिया की परिणति का प्रतीक है और यह वर्ष 2018 में शुरू किए गए कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नैतिकता पर यूनेस्को के कार्य से निकटता से जुड़ा है।
इस सिफारिश को अपनाना वर्ष 2021 में शुरू की गई एक व्यापक परामर्श प्रक्रिया का परिणाम है। फ्रांसीसी वैज्ञानिक हर्वे चेनीवाइस और अमेरिकी प्रोफेसर नीता फराहनी की अध्यक्षता में अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों के एक समूह को नागरिक समाज, निजी क्षेत्र, शिक्षा जगत और सदस्य देशों के 8,000 से अधिक योगदानों का उपयोग करते हुए, मानक ढाँचा विकसित करने का कार्य सौंपा गया था।
न्यूरोटेक्नोलॉजी में ऐसे उपकरण शामिल हैं जो तंत्रिका तंत्र के साथ सीधे संपर्क करके उसे माप सकते हैं, नियंत्रित कर सकते हैं या उत्तेजित कर सकते हैं।
यह विशेष रूप से चिकित्सा के क्षेत्र में आशाजनक लाभ प्रदान करता है: गहन मस्तिष्क उत्तेजना अवसाद और पार्किंसंस रोग जैसे विकारों के लक्षणों को कम करती है और मस्तिष्क-कंप्यूटर इंटरफेस विकलांग लोगों को कृत्रिम अंगों को नियंत्रित करने या विचारों के माध्यम से संवाद करने में सक्षम बनाता है।
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