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Updated: 07 Apr 2025
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आईएएसवी (भारतीय सेना नौकायन पोत) त्रिवेणी पर सवार होकर पहला त्रि-सेवा महिला वैश्विक परिक्रमा अभियान "समुद्र प्रदक्षिणा" 7 अप्रैल 2025 को मुंबई से रवाना किया गया। इस अभियान को लेफ्टिनेंट जनरल एके रमेश, कमांडेंट, कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग ने भारतीय नौसेना वाटरमैनशिप प्रशिक्षण केंद्र, कोलाबा, मुंबई से रवाना किया।
यहअभियान मुंबई से सेशेल्स जाएगा और 55 दिनों में 4,000 समुद्री मील की यात्रा पूरी करके वापस मुंबई आएगा। यह अभियान महिला सशक्तिकरण या नारी शक्ति को बढ़ावा देने के लिए सशस्त्र बलों के पहल का एक हिस्सा है।
पिछले साल, भारतीय नौसेना ने भारतीय नौसेना नौकायन पोत तारिणी या आईएनएसवी तारिणी पर सवार होकर दुनिया की परिक्रमा करने के लिए अपनी सिर्फ महिलाओं का दूसरा नाविका सागर परिक्रमा अभियान सफलता पूर्वक पूरा किया था।
आईएएसवी त्रिवेणी के 12 चालक दल के सदस्य भारतीय सशस्त्र बलों -भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना से लिए गए हैं।
सभी चालक दल के सदस्यों को मुंबई के मार्वे में स्थित आर्मी एडवेंचर नोडल सेंटर फॉर ब्लू वाटर सेलिंग में कठोर प्रशिक्षण दिया गया था।
आर्मी एडवेंचर नोडल सेंटर फॉर ब्लू वाटर सेलिंग, भारतीय सेना के कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग, पुणे के अंतर्गत आता है।
प्रशिक्षण के दौरान ,नौपरिवहन, मौसम विज्ञान, नाविक कौशल, आपातकालीन प्रतिक्रिया, मरम्मत और रखरखाव जैसे नौकायन कौशल सिखाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
इन अधिकारियों को मार्ग नियोजन, मौसम पूर्वानुमान, उपकरण रखरखाव, स्टॉकिंग और सुरक्षा प्रोटोकॉल का प्रशिक्षण भी दिया गया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों और संबंधित प्रक्रियाओं के बारे में भी सिखाया गया ताकि वे यात्रा के समय किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहें।
आईएएसवी त्रिवेणी पर सवार सभी महिला चालक दल अफ्रीका के पास पश्चिमी हिंद महासागर में स्थित सेशेल्स जाएंगे और 55 दिनों में 4,000 समुद्री मील की यात्रा पूरी करके मुंबई वापस आएंगे।
आईएएसवी त्रिवेणी के 30 मई 2025 को मुंबई के कोलाबा में डॉक करने की उम्मीद है।
वर्तमान मिशन दुनिया की परिक्रमा करने वाली विश्व की पहली महिला त्रि-सेवा टीम बनने की तैयारी के लिए यह प्रशिक्षण मिशन का हिस्सा है।
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