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इसरो ने गगनयान मिशन के तहत लद्दाख में 'मिशन मित्र' शुरू किया
Updated: 06 Apr 2026
4 Min Read

भारत के गगनयान मिशन के तहत लद्दाख की बेहद कठिन परिस्थितियों में एक अनोखा प्रयोग शुरू किया गया है, जिसे 'मिशन मित्र' नाम दिया गया है। इस मिशन का नेतृत्व भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) कर रहा है।
इसरो ने 02 से 09 अप्रैल, 2026 तक केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लेह में मिशन मित्र संचालित कर रहा है।
लेह की लगभग 3,500 मीटर की उच्च ऊँचाई पर हाइपोक्सिया, कम तापमान और अलगाव जैसी पर्यावरणीय स्थितियाँ मौजूद हैं, जो अंतरिक्ष उड़ान कार्यों के लिए एक प्राकृतिक एनालॉग (प्रतिरूप) का काम करती हैं।
मिशन मित्र अपनी तरह का पहला टीम व्यवहार अध्ययन है, जिसे इसरो और IAF-इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन द्वारा उच्च ऊँचाई वाले वातावरण में काम करने वाले क्रू और ग्राउंड टीमों की शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और परिचालन गतिशीलता की जाँच करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य मिशन में शामिल सदस्यों की शारीरिक सहनशक्ति, टीम वर्क और मानसिक मजबूती को परखना है। चूँकि भारत लंबे समय तक चलने वाले अंतरिक्ष मिशनों की तैयारी कर रहा है, इसलिए इस कार्यक्रम का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरिक्ष यात्री न केवल शारीरिक रूप से प्रशिक्षित हों, बल्कि अंतरिक्ष में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से भी पूरी तरह तैयार हों।
इस कार्यक्रम का संचालन इसरो के 'ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर' (HSFC) द्वारा विभिन्न शोध टीमों और विशेषज्ञों के सहयोग से किया जा रहा है।
इस मिशन के तहत, चार नामित अंतरिक्ष यात्रियों, शुभांशु शुक्ला, प्रशांत बालकृष्णन नायर, अजीत कृष्णन और अंगद प्रताप, का व्यवहार संबंधी परीक्षणों के एक समूह के तहत उनके शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और परिचालन गतिकी के लिए परीक्षण किया जाएगा।
इस मिशन में चार चुने हुए अंतरिक्ष यात्री हिस्सा ले रहे हैं, जिन्होंने लेह में पहुंचकर वहां के वातावरण के अनुकूल खुद को ढालने (acclimatization) की प्रक्रिया पूरी कर ली है।
मिशन मित्र का पूरा नाम 'मैपिंग ऑफ इंटरऑपरेबल ट्रेड्स एंड रिलायबिलिटी असेसमेंट' (Mapping of Interoperable Traits & Reliability Assessment) है। इसे पृथ्वी पर ही अंतरिक्ष जैसी परिस्थितियाँ निर्मित करने (simulate करने) के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
इसरो और IAF-इंस्टीट्यूट ऑफ़ एयरोस्पेस मेडिसिन ने मिलकर इस मिशन को डिज़ाइन किया है और बेंगलुरु स्थित स्टार्ट-अप Protoplanet इसकी सुविधाओं के प्रबंधन और ज़रूरी नियमों के पालन के लिए ज़िम्मेदार है।
मिशन मित्र इस समय लद्दाख के ऊँचे पहाड़ी इलाके में चल रहा है। लद्दाख अपने कठोर मौसम, ऑक्सीजन के कम स्तर और एकांत (अलगाव) के लिए जाना जाता है। ये परिस्थितियाँ काफी हद तक वैसी ही हैं, जैसी चुनौतियाँ अंतरिक्ष में सामने आती हैं।
गगनयान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का एक मिशन है, जिसका उद्देश्य 400 km की कक्षा में तीन दिनों के लिए एक मानवयुक्त मिशन भेजकर और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाकर मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता का प्रदर्शन करना है।
इस अंतरिक्ष मिशन की घोषणा सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2018 में राष्ट्र के नाम अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में की थी। अगर यह सफल होता है, तो भारत अंतरिक्ष में इंसान भेजने वाला चौथा देश बन जाएगा; बाकी तीन देश अमेरिका, रूस और चीन हैं।
इसरो की योजना वर्ष 2026 के आखिर में पहली बिना क्रू वाली गगनयान (G1) टेस्ट फ़्लाइट लॉन्च करने की है। इस फ़्लाइट में एक महिला जैसी दिखने वाली ह्यूमनॉइड रोबोट "व्योममित्र" को भेजा जाएगा। इसरो ने रोस्कोस्मोस (रूसी अंतरिक्ष एजेंसी) की एक सहायक कंपनी, जिसे Gavkosmos कहा जाता है, के साथ इस मिशन के लिए चुने गए भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को तैयार करने के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।
भारत और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसियों ने भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन, गगनयान के लिए सहयोग हेतु एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। गगनयान को लॉन्च करने के लिए GSLV Mk III, जो एक तीन-चरणों वाला भारी लिफ्ट लॉन्च व्हीकल है, का उपयोग किया जाएगा।
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