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Updated: 07 Apr 2026
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इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (IRENA) ने अपनी सालाना 'रिन्यूएबल कैपेसिटी स्टैटिस्टिक्स 2026' रिपोर्ट में बताया कि सौर और पवन ऊर्जा क्षमता में तेज़ी से विस्तार के चलते, वर्ष 2025 में भारत चीन और यूएसए के बाद, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी बाज़ार बनकर उभरा है।
वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में उथल-पुथल के बावजूद, देश ने अपनी मज़बूत गति बनाए रखी और वर्ष 2025 में लगभग 45 GW की रिन्यूएबल क्षमता जोड़ी।
इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (IRENA) के हाल ही में जारी 'रिन्यूएबल कैपेसिटी स्टैटिस्टिक्स 2026' के अनुसार, वर्ष 2025 में दुनिया भर में 692 GW की नई क्षमता जुड़ने के बाद, वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 5,149 गीगावॉट (GW) तक पहुँच गई; यह 15.5% की वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है।
रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि पिछले वर्ष जोड़ी गई कुल नई क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा का योगदान 85.6% रहा, जबकि गैर-नवीकरणीय स्रोतों का वैश्विक स्थापनाओं में हिस्सा लगातार घटता गया।
हाइड्रोपावर (पंप स्टोरेज को छोड़कर) में 18.4 GW की बढ़ोतरी हुई, जिसमें से 96% चीन से आया और इसमें इथियोपिया, भारत, तंजानिया, भूटान, वियतनाम, कनाडा, ऑस्ट्रिया, इंडोनेशिया और नेपाल का भी योगदान रहा।
वैश्विक सौर क्षमता में सबसे ज़्यादा योगदान चीन का रहा (जिसने एक साल में 315 GW से ज़्यादा क्षमता जोड़ी), वहीं भारत दूसरे स्थान पर रहा, जिसके बाद दक्षिण कोरिया का नंबर आता है।
पवन ऊर्जा में पिछले साल के मुकाबले 14% की बढ़ोतरी हुई, जिससे 158.7 GW क्षमता और जुड़ी; इस बढ़ोतरी का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा चीन का था, जबकि भारत ने 6.3 GW क्षमता जोड़ी। बायोएनर्जी की क्षमता में 3.4 GW की बढ़ोतरी हुई, जिसमें जापान की 1.1 GW की बढ़ोतरी सबसे ज़्यादा रही, उसके बाद चीन का 0.8 GW और ब्राज़ील का 0.6 GW का योगदान रहा।
जियोथर्मल ऊर्जा में मामूली 0.3 GW की बढ़ोतरी हुई, जिसमें फिलीपींस और इंडोनेशिया ने 0.1 GW-0.1 GW क्षमता जोड़ी और जर्मनी, तुर्की और जापान में भी थोड़ी-थोड़ी बढ़ोतरी हुई।
भारत वर्ष 2025 में 250.5 GW क्षमता और 45 GW की बढ़ोतरी के साथ तीसरा सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी बाज़ार बन गया है। वर्ष 2025 में कुल स्थापित क्षमता लगभग 250.5 GW है। इससे पहले, वर्ष 2023 में यह क्षमता 175.9 GW थी।
वर्ष 2025 में सोलर क्षमता में 37 GW की बढ़ोतरी हुई। साथ ही, सोलर एनर्जी के विस्तार के मामले में भारत चीन के बाद दूसरे स्थान पर रहा। वर्ष 2025 में पवन ऊर्जा के इस्तेमाल से ऊर्जा क्षमता में 6.3 GW की बढ़ोतरी हुई है, जिससे पता चलता है कि पवन ऊर्जा दिन-ब-दिन बढ़ रही है।
इसके अलावा, जलविद्युत ऊर्जा उत्पादन वर्ष 2024 के 52 GW से बढ़कर 2025 में 56 GW हो गया है। इसके साथ ही, पंपड हाइड्रो स्टोरेज क्षमता 4.7 GW से बढ़कर 7.2 GW हो गई है।
इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (IRENA) की स्थापना 26 जनवरी, 2009 को बॉन, जर्मनी में रिन्यूएबल एनर्जी को बड़े पैमाने पर अपनाने को बढ़ावा देने के लिए की गई थी।
वर्ष 1981 में ही इसका प्रस्ताव रखा गया था, यह पहला इंटरनेशनल संगठन बन गया जो खास तौर पर रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस करता था और वर्ष 2011 तक ऑफिशियली चालू हो गया, जिसका हेडक्वार्टर अबू धाबी, UAE में था, ताकि ग्लोबल एनर्जी ट्रांज़िशन को आसान बनाया जा सके।
IRENA का कॉन्सेप्ट वर्ष 1981 में नैरोबी में सामने आया और अगले कुछ दशकों में EUROSOLAR और वर्ल्ड काउंसिल फॉर रिन्यूएबल एनर्जी (WCRE) जैसे संगठनों ने इसका बड़ा सपोर्ट किया।
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