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भारतीय सेना में 106 पीसकीपर ‘अग्निवैग’ जेट-पावर्ड कामिकेज़ ड्रोन शामिल किए गए
Updated: 18 Jun 2026
2 Min Read

भारतीय सेना (IA) को रक्षा निर्माता SMPP लिमिटेड से 106 जेट-पावर्ड पीसकीपर (अग्निवैग) ड्रोन मिले, जिनमें 100 ऑपरेशनल ड्रोन और 6 ट्रेनिंग ड्रोन शामिल हैं।
कामिकेज़ ड्रोन या 'लोइटरिंग म्यूनिशन', ऐसे बिना पायलट वाले सिस्टम हैं, जो सीधे टारगेट से टकराकर उन्हें नष्ट कर देते हैं।
बेलारूस की KB Indela के साथ मिलकर विकसित किए गए पीसकीपर ड्रोन को भारत में आंशिक रूप से लोकलाइज़ (स्थानीय स्तर पर निर्मित) किया गया है और इसके 750 किलोमीटर प्रति घंटे (kmph) की गति वाले अपग्रेडेड वर्शन का प्रस्ताव दिया गया है।
यह डिलीवरी सफल यूज़र ट्रायल्स के बाद की गई है, जिसमें पीसकीपर (अग्निवैग) ने भारी जैमिंग और स्पूफिंग वाले माहौल में काम करते हुए 5 मीटर से कम का CEP (सर्कुलर एरर प्रोबेबल) और लगभग 180 किमी की ऑपरेशनल रेंज दिखाई।
इसका परफ़ॉर्मेंस सिस्टम की सटीकता, भरोसेमंदता और मुश्किल युद्धक्षेत्र की स्थितियों में काम करने की क्षमता को दिखाता है।
यह टर्बोजेट-पावर्ड कामिकेज़ ड्रोन है, जिसे दुश्मन के अहम और कीमती ठिकानों पर लंबी दूरी से सटीक हमला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
खासियतें: इस ड्रोन की ऑपरेशनल रेंज 180 किलोमीटर (km) है, अधिकतम रफ़्तार 450 किलोमीटर प्रति घंटा (kmph) है, और इसका सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) 5 मीटर (m) से कम है। यह जैमिंग, स्पूफिंग और ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) के बिना वाले माहौल में भी असरदार ढंग से काम कर सकता है।
यह ड्रोन दुश्मन के रणनीतिक ठिकानों पर हमला कर सकता है और आर्टिलरी (तोपखाने) व लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों के बीच की कमी को पूरा कर सकता है।
पीसकीपर (अग्निवैग) को ऐसे समय में शामिल किया जा रहा है, जब आधुनिक युद्ध तेज़ी से प्रिसिजन-गाइडेड अनमैन्ड सिस्टम (सटीक निशाना लगाने वाले बिना पायलट वाले सिस्टम) से आकार ले रहा है, जो पारंपरिक स्ट्राइक प्लेटफ़ॉर्म की तुलना में बहुत कम लागत पर युद्धक्षेत्र में बड़ा असर डाल सकते हैं।
यह सिस्टम पारंपरिक आर्टिलरी और लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों के बीच क्षमता के अंतर को पाटता है, जिससे कमांडरों को सटीक हमला करने की क्षमता का एक नया स्तर मिलता है।
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