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न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के 28वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली
Updated: 26 Sep 2024
3 Min Read

न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने 25 सितंबर 2024 को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के 28वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति से पहले, न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश थे।
उन्होंने न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा का स्थान लिया, जो मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य कर रहे थे।
संविधान के अनुच्छेद 219 के तहत, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त प्रत्येक व्यक्ति को संविधान की तीसरी अनुसूची में उल्लिखित प्रारूप के अनुसार शपथ लेनी होती है।
शपथ राज्य के राज्यपाल या राज्यपाल द्वारा नियुक्त व्यक्ति द्वारा दिलाई जाती है।
मध्य प्रदेश के राज्यपाल ,मंगूभाई पटेल ने राज्य की राजधानी भोपाल के राज निवास में आयोजित एक समारोह में न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत को पद की शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव और कई अन्य मंत्री, उच्च न्यायालय और जिला अदालतों के वरिष्ठ न्यायाधीश और कुछ प्रमुख वकील भी उपस्थित थे।
न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाले पहले दलित हैं।
जस्टिस कैत हरियाणा के मूल निवासी हैं। 5 सितंबर, 2008 को उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। बाद में, 2013 में, उन्हें स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। उन्हें 12 अप्रैल, 2016 को हैदराबाद में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के उच्च न्यायालय में और फिर 2018 में राष्ट्रपति द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत के 23 मई 2025 को सेवानिवृत्त होने की उम्मीद है, जब वह 62 वर्ष के होंगे।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष है, और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष है।
1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के तहत वर्तमान मध्य प्रदेश राज्य केअस्तित्व में आने के बाद, नागपुर उच्च न्यायालय को राज्य का उच्च न्यायालय बनाया गया था।
नागपुर उच्च न्यायालय की एक अस्थायी पीठ इंदौर और ग्वालियर में स्थापित की गई थी।
बाद में, 1968 में इंदौर और ग्वालियर को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की स्थायी पीठ बना दिया गया।
1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ के गठन के बाद, जबलपुर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की स्थायी पीठ बन गया।
उच्च न्यायालय की खण्डपीठें ग्वालियर एवं इंदौर में हैं।
मुख्य न्यायाधीश सहित उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की कुल स्वीकृत संख्या 53 है।
प्रथम मुख्य न्यायाधीश: न्यायमूर्ति एम.हिदायतुल्लाह
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