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Updated: 17 Mar 2026
3 Min Read

भारत में भवन निर्माण और अवसंरचना सुरक्षा से जुड़े सीस्मिक कोड (IS 1893) को लेकर हाल ही में बड़ा निर्णय लिया गया है।
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं के बाद वर्ष 2025 के प्रस्तावित सीस्मिक कोड को वापस ले लिया है।
इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2016 का सीस्मिक मानक (IS 1893:2016) पुनः प्रभावी कर दिया गया है।
आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) ने वर्ष 2025 के मसौदे को लेकर कई महत्त्वपूर्ण चिंताएँ जताई थीं। जैसे कि भवन निर्माण लागत में भारी वृद्धि, पर्याप्त हितधारक परामर्श का अभाव, नए नियमों को लागू करने में व्यावहारिक कठिनाइयाँ एवं अनुमान के अनुसार भूकंपीय ज़ोन V और VI में भवन निर्माण लागत लगभग 10–15% तक बढ़ सकती थी और बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं में लागत 50% तक बढ़ने की संभावना थी।
विशेषज्ञों के अनुसार 2025 के ड्राफ्ट को लागू करने से कई तकनीकी और आर्थिक चुनौतियाँ सामने आ सकती थीं। जिसके कुछ उदाहरण है-
वर्ष 2025 के प्रस्तावित संशोधन को अंतर्राष्ट्रीय मानकों (अमेरिका, यूरोप और न्यूज़ीलैंड) के अनुरूप बताया गया था। यह नया ज़ोन मुख्य रूप से हिमालय, पूर्वोत्तर और कच्छ क्षेत्र के लिए प्रस्तावित था। इनकी मुख्य विशेषताएँ है-
वर्तमान में प्रभावी IS 1893:2016 मानक के अनुसार भारत को चार भूकंपीय ज़ोन में विभाजित किया गया है:
भारत में भूकंप जोखिम को समझने के लिए समय-समय पर भूकंपीय ज़ोनिंग नक्शे बनाए गए हैं।
1935 – पहला भूकंपीय नक्शा
1934 के नेपाल-भारत भूकंप के बाद जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने 1935 में पहला राष्ट्रीय भूकंपीय नक्शा तैयार किया।
1962 में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने नया ज़ोनिंग मैप जारी किया जिसमें भारत को 0 से VI तक सात ज़ोन में विभाजित किया गया।
1970 के नक्शे में भारत को I से V तक पाँच ज़ोन में बाँटा गया और संशोधित मरकली तीव्रता पैमाने का उपयोग किया गया।
1984 में, भारत के भूकंपीय ज़ोन मैप का एक नया अपडेट जारी किया गया। देश का लगभग 11% इलाका ज़ोन V में, 18% ज़ोन IV में, 30% ज़ोन III में और बाकी ज़ोन II में आता है।
भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards – BIS) भारत की राष्ट्रीय मानकीकरण संस्था है, जो BIS Act 2016 के तहत उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
यह उत्पादों की गुणवत्ता (ISI मार्क), स्वर्ण/चाँदी हॉलमार्किंग (HUID) और मानकीकरण सुनिश्चित करता है। नवंबर, 2025 से वरिष्ठ IAS अधिकारी श्री संजय गर्ग इसके महानिदेशक हैं।
बीआईएस (BIS) की स्थापना 1 अप्रैल, 1987 (पूर्व में भारतीय मानक संस्थान - ISI) को हुई। बीआईएस अधिनियम, 2016 (12 अक्टूबर, 2017 से प्रभावी)।
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