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Updated: 07 Apr 2026
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उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के मंदिर चौक में 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' को स्थापित कर दी गई है। मध्य प्रदेश के उज्जैन के बाद अब काशी में भी भारतीय पंचांग के अनुसार सटीक काल गणना, मुहूर्त और ग्रहों की स्थिति देखी जा सकेगी।
काशी विश्वनाथ धाम में 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी', जो 700 किलो का एक अद्भुत नमूना है, को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा भेंट की गई। यह अनोखी घड़ी भारत की प्राचीन समय गणना प्रणाली को दिखाती है, जो दिन को 30 'मुहूर्तों' में बाँटती है और स्थानीय माध्य समय, 'तिथि', 'नक्षत्र' और भी बहुत कुछ दिखाती है।
इस घड़ी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में आयोजित एक समारोह के दौरान औपचारिक रूप से पेश किया गया।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 मार्च, 2024 को मध्य प्रदेश के उज्जैन के जंतर-मंतर पर बने 85 फुट ऊँचे टॉवर में दुनिया की पहली वैदिक घड़ी का अनावरण किया। यह घड़ी एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय के आधार पर समय की गणना करेगी।
उज्जैन स्थित 'महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ' द्वारा विकसित यह घड़ी, केवल समय बताने वाला एक यंत्र मात्र नहीं है, बल्कि यह भारत के प्राचीन वैज्ञानिक ज्ञान का एक डिजिटल पुनरुद्धार है।
'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' को मानक 24-घंटे वाली ग्रेगोरियन प्रणाली के बजाय पारंपरिक 'वैदिक पंचांग' के आधार पर समय दिखाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
यह घड़ी समय बताने के पारंपरिक तरीके को पूरी तरह से बदल देती है - इसमें दिन आधी रात को नहीं, बल्कि सूर्योदय के समय शुरू होता है और अगले सूर्योदय के साथ समाप्त होता है। यह दिन को 30 'मुहूर्तों' में बाँटती है, जिनमें से हर एक लगभग 48 मिनट का होता है। घड़ी सूर्योदय के समय 0:00 से शुरू होती है, और सूर्यास्त आमतौर पर 15वें मुहूर्त के आसपास होता है।
यह लोकल मीन टाइम (LMT) भी दिखाता है, जिसकी गणना सूरज की स्थिति के आधार पर की जाती है, जिससे यह किसी खास जगह के लिए ज़्यादा सटीक हो जाता है।
यह घड़ी 'पंचांग' के मुख्य तत्त्व जैसे 'तिथि' (चंद्र दिवस) और 'नक्षत्र' (तारामंडल) भी दिखाती है। यह त्योहारों, ग्रहणों, चंद्रमा की कलाओं और ज्योतिषीय गणनाओं के बारे में भी जानकारी देती है। संदर्भ के लिए, यह एक ही समय पर इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) और ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) भी दिखाती है।
इस पहल का मकसद वैदिक ग्रंथों से ली गई 'काल गणना' (समय की गणना) की प्राचीन भारतीय प्रणाली को फिर से जीवित करना है, और इसे आधुनिक डिजिटल तकनीक के साथ जोड़ना है। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का सॉफ्टवेयर बेहद उन्नत किस्म का है, इसके मोबाइल ऐप में पिछले 7,000 वर्षों के पंचांग का डेटा सुरक्षित है, जो शोधकर्ताओं और ज्योतिष प्रेमियों के लिए एक खजाना है. इतना ही नहीं वैश्विक स्तर पर पहुँच बनाने के लिए यह 189 से अधिक भाषाओं को सपोर्ट करती है।
वैदिक काल (1500-600 ई.पू.) सिंधु घाटी सभ्यता के बाद भारत की दूसरी बड़ी नगरीय सभ्यता थी, जिसकी जानकारी वेदों (ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद) से मिलती है।
आर्यों द्वारा स्थापित यह काल मुख्य रूप से ग्रामीण था, जिसमें 1500-1000 ई.पू. का ऋग्वैदिक काल (पशुपालन प्रधान) और 1000-600 ई.पू. का उत्तर वैदिक काल (कृषि प्रधान) शामिल है। ऋग्वैदिक आर्य सप्त-सिंधु (पंजाब और सरस्वती) क्षेत्र में थे, जबकि उत्तर वैदिक काल तक वे गंगा-यमुना दोआब तक फैल गए।
वेद: ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद।
ब्राह्मण ग्रंथ: वेदों की व्याख्या।
आरण्यक: दार्शनिक चिंतन।
उपनिषद: आत्मा-ब्रह्म का दार्शनिक ज्ञान।
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