करेंट अफेयर्स: 24 जून 2021

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  • Jun 24, 2021
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करेंट अफेयर्स: 24 जून 2021

कृषि में सहयोग के लिए भारत और फिजी ने किए समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर

भारत और फिजी के बीच कृषि एवं सहायक क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और फिजी के कृषि, जलमार्ग व पर्यावरण मंत्री डॉ. महेंद्र रेड्डी ने एक आभासी बैठक(virtual meeting) में भारत और फिजी के बीच कृषि एवं सहायक क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए।

मुख्य बिंदु:

  • भारत और फिजी आपस में सम्मान, सहयोग और मजबूत सांस्कृतिक तथा लोगों के संबंधों पर आधारित सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध साझा करते हैं।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फिजी यात्रा और Forum for India Pacific Islands Cooperation ने फिजी और प्रशांत क्षेत्र तथा भारत के साथ रिश्ते को और बढ़ावा दिया है। 
  • इसी की तर्ज पर इस MOU पर हस्ताक्षर से दोनों देशों के बीच बहुआयामी सहयोग और भी ज्यादा मजबूत होगा। 
  • खाद्य और कृषि का जलवायु परिवर्तन से गहरा रिश्ता है। दोनों देश कृषि में वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए एक दूसरे का सहयोग कर रहे हैं। 
  • कोरोना महामारी के बीच, भारत ने फिजी को चक्रवात यास से प्रभावित समुदायों की आजीविका बहाली के लिए अनुदान के रूप में 14 किस्मों के फलों और सब्जियों के लगभग 7 टन बीज वितरित किए थे।

समझौता ज्ञापन के बारे जानकारी:

  • दोनों देशों भारत और फिजी के बीच यह समझौता ज्ञापन डेयरी उद्योग विकास, जड़ फसल विविधीकरण, चावल उद्योग विकास, जल संसाधन प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग विकास, नारियल उद्योग विकास, कृषि मशीनीकरण, पशुपालन, कृषि अनुसंधान, बागवानी उद्योग विकास, कीट के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना है। 
  • यह समझौता ज्ञापन कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत और कृषि मंत्रालय, फिजी द्वारा निष्पादित किया जाएगा। 
  • प्रक्रियाओं को निर्धारित करने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह भी बनाया जाएगा।
  • एमओयू हस्ताक्षर की तिथि से पाँच साल की अवधि के लिए वैध रहेगा और इस दौरान किसी भी तरह के बदलाव के लिए दोनों ही पक्षों से लिखित में मंजूरी लेनी होगी।
  • यह समझौता डेयरी उद्योग विकास, चावल उद्योग विकास, रूट क्रॉप विविधीकरण, जल संसाधन प्रबंधन, नारियल उद्योग विकास, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग विकास, कृषि यंत्रीकरण, बागवानी उद्योग विकास, कृषि अनुसंधान, पशुपालन, कीट एवं रोग, जुताई, मूल्य संवर्धन एवं विपणन, कटाई बाद व मिलिंग, प्रजनन और कृषि विज्ञान के क्षेत्रों में सहयोग उपलब्ध कराता है।

Green Tariff Policy 2021

सरकार ग्रीन टैरिफ को लेकर खास पॉलिसी पर काम कर रही है। इसके तहत ग्रीन एनर्जी की खपत को बढ़ावा दिया जाएगा और जल्‍द ही इस बारे में नियम भी जारी कर दिए जाएंगे। भारत की कुल ऊर्जा खपत 2030 तक करीब 800 गीगावॉट से ज्‍यादा होने वाली है।

मुख्य बिंदु:

  • भारत अभी बिजली वितरण के लिए ‘ग्रीन टैरिफ’ पर काम कर रहा है। इसके तहत बिजली कंपनियाँ स्‍वच्‍छ ऊर्जा प्रोजेक्‍ट्स के जरिए तैयार की गई बिजली को कोयला या अन्‍य पारंपरिक ईंधन से तैयार की बिजली की जगह ख़रीदेगा।
  • ये स्वच्छ ऊर्जा प्रोजेक्ट्स कोयले की तुलना में सस्‍ता होगा।
  • इस पॉलिसी के बारे में केंद्रीय बिजली एवं रिन्‍यूवेबल ऊर्जा मंत्री राज कुमार सिंह ने मंगलवार को जानकारी दी। उन्‍होंने कहा कि इससे भारत में स्‍वच्‍छ ऊर्जा इस्‍तेमाल करने वाले साख़ को और भी मजबूत करने में सहायता मिलेगी। इसे विश्व की सबसे बड़ी स्‍वच्‍छ ऊर्जा प्रोग्राम बताया जा रहा है।
  • वर्तमान में अभी अगर कोई कंपनी बिजली वितरण कपंनियों से ग्रीन एनर्जी खरीदना चाहती है तो उसे इसके लिए उन्‍हें क्‍लीन एनर्जी डेवलपर से कॉन्‍ट्रैक्‍ट कराना होता है। कमर्शियल एंड इंडस्ट्रियल सेग्‍मेंट में यही प्रक्रिया पूरी होती है। वर्तमान में बिजली वितरण कंपनियाँ अनिवार्यता के तहत रिन्‍यूवेबल एनर्जी खरीदती हैं।
  • ग्रीन टैरिफ पॉलिसी, बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) को कोयले जैसे पारंपरिक ईंधन स्रोतों की तुलना में सस्ती दर पर स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं से उत्पन्न बिजली की आपूर्ति करने में सहायता करेगी।
  • बड़े कॉरपोरेट जो सिर्फ हरित ऊर्जा खरीदना चाहते हैं, वे एक स्वच्छ ऊर्जा डेवलपर से ऐसी उर्जा प्राप्त करने के लिए अनुबंध (contract) कर सकते हैं।
  • एक बार इस पॉलिसी को अंतिम रूप देने के बाद, DISCOMs विशेष रूप से हरित बिजली खरीद सकते हैं और इसे ‘ग्रीन टैरिफ’ पर आपूर्ति कर सकते हैं।
  • ग्रीन टैरिफ हरित ऊर्जा का भारित औसत टैरिफ (weighted average tariff) होगा जो उपभोक्ता को चुकाना होगा।
  • यह टैरिफ पारंपरिक ईंधन स्रोतों से टैरिफ से थोड़ा कम होगा और एक नया विनियमन यह सुनिश्चित करने में सहायता करेगा, यदि कोई उद्योग डेवलपर से केवल हरित ऊर्जा चाहता है, तो एक पखवाड़े के भीतर ओपन एक्सेस एप्लिकेशन (Open Access Application) को मंजूरी दी जाएगी।

ओपन एक्सेस 

  • ओपन एक्सेस ऊर्जा के बड़े उपयोगकर्ताओं को 1 मेगावाट(1 MW) से अधिक बिजली की खपत करने के लिए, महंगे ग्रिड पर निर्भर होने के बजाय, खुले बाजार से ऊर्जा खरीदने की अनुमति देता है। 
  • हालांकि, राज्य के डिस्कॉम स्वच्छ ऊर्जा डेवलपर्स को तीसरे पक्ष को बिजली की आपूर्ति के लिए बिजली पारेषण (power transmission) और वितरण नेटवर्क (distribution networks) का उपयोग करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। 

पृष्ठभूमि 

  • केंद्र सरकार की ओर से यह कदम एक ऐसे समय पर लाया जा रहा है जब भारत में सोलर एवं पवन ऊर्जा टैरिफ अब तक के सबसे न्‍यूनतम स्‍तर पर फिसल चुका है। सोलर टैरिफ की कीमत अब 1.99 रुपये प्रति यूनिट और पवन ऊर्जा की कीमत 2.43 रुपये प्रति यूनिट पर है।
  • इसके साथ भारत ने 2022 तक 175 गीगावॉट की रिन्‍यूवेबल क्षमता बढ़ाने का लक्ष्‍य रखा है। इसमें 100 गीगावॉट सोलर पावर है।

दिल्ली सरकार ने ‘मुख्यमंत्री COVID-19 परिवार आर्थिक सहायता योजना’ लागू करने की घोषणा

दिल्ली की सरकार ने मुख्यमंत्री कोविड-19 परिवार आर्थिक सहायता योजना लागू करने की घोषणा की है। यह योजना राजधानी दिल्ली में कोरोना के कारण मृत्यु होने पर आश्रित को 2,500 रुपये प्रति महीने आर्थिक सहायता देने से संबंधित है। 

मुख्य बिंदु:

  • दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। 
  • मुख्यमंत्री कोविड-19 परिवार आर्थिक सहायता योजना के अंतर्गत कोरोना के कारण पति की मृत्यु होने पर दिल्ली सरकार मृतक की पत्नी को जीवनपर्यंत 2,500 रुपये मासिक सहायता देगी। इस 2,500 रुपये की धनराशि के साथ पत्नी को विधवा पेंशन भी दी जाएगी।
  • इसी प्रकार पत्नी की मृत्यु होने पर पति को 2,500 रुपये प्रति महीने जीवनपर्यंत दिया जाएगा। 
  • अगर परिवार में सिर्फ माता या पिता हैं और उनकी कोरोना से मृत्यु हो जाती है तो सभी बच्चों को 2,500 रुपये हर महीने दिया जाएगा जब तक बच्चे 25 वर्ष के उम्र के नहीं हो जाते। 
  • अगर किसी बच्चे के माता पिता दोनों की मृत्यु हो गई है (इसमें एक की मृत्यु कोरोना के कारण हुई है) तो सभी बच्चे को 25 वर्ष की आयु तक 2,500 रुपये प्रतिमाह आर्थिक सहायता दिल्ली सरकार देगी।
  • समाज कल्याण विभाग के अनुसार, महामारी के बीच एक सदस्य को खोने वाले प्रत्येक परिवार को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि (ex-gratia) प्रदान की जाएगी।
  • उन परिवारों को भी 2,500 रुपये हर महीने पेंशन दी जाएगी, जिन्होंने कोविड -19 महामारी के कारण एकमात्र कमाने वाले परिवार के व्यक्ति को खो दिया है।
  • सरकार प्रभावित परिवार के एकल सदस्य को नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक के रूप में नामांकित करने पर भी विचार कर रही है।
  • सरकार आश्रित बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा की आवश्यकतओं को भी पूरा करेगी।
  • अनुग्रह राशि प्राप्त करने के लिए शर्तें
  • इस योजना के तहत अनुग्रह राशि प्राप्त करने के लिए तथा आवेदन करने के लिए कोई आय मानदंड नहीं है। लेकिन मृतक और आश्रित दिल्ली से होना चाहिए।
  • अनुग्रह राशि प्राप्त करने के लिए, मृत्यु को COVID-19 सकारात्मक परीक्षण के एक महीने के भीतर प्रमाणित किया जाना चाहिए।
  • ऐसी योजना लाने की घोषणा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 18 मई, 2021 को की थी। 
  • केजरीवाल ने एक या दोनों माता-पिता को खोने वाले बच्चों को मुफ्त शिक्षा और वित्तीय सहायता का भी वादा किया है।

WHO ने जारी की विश्वभर की आत्महत्या पर रिपोर्ट

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2019 में विश्वभर में हुई आत्महत्याओं की रिपोर्ट प्रकाशित की है।

मुख्य बिंदु:

  • इस रिपोर्ट में पाया गया है कि वैश्विक आत्महत्या मृत्यु दर को एक तिहाई तक कम करना एक संकेतक के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र-अनिवार्य सतत विकास लक्ष्यों (SDG) में एक लक्ष्य है। लेकिन दुनिया इस लक्ष्य को नहीं पा सकेगी।
  • पूरी दुनिया के केवल 38 देशों में राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम की रणनीति है।
  • 2019 में भी आत्महत्या का संकट पहले से ही था। 2019 में लगभग 7,03,000 लोगों (100 में से एक) की आत्महत्या से मृत्यु हुई है।
  • साल 2019 में, वैश्विक आयु-मानकीकृत आत्महत्या दर 9 प्रति 1,00,000 जनसंख्या थी।
  • 58% आत्महत्याएँ दुनियाभर में 50 वर्ष की आयु से पहले हुईं।
  • 2019 में विश्व भर में 15-29 आयु वर्ग के युवाओं में आत्महत्या मृत्यु का चौथा प्रमुख कारण था।
  • 2019 में 77 प्रतिशत वैश्विक आत्महत्याएँ निम्न आय और मध्यम आय वाले देशों में हुईं।
  • अफ्रीका, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया में आत्महत्या की दर दुनिया के औसत से अधिक है।
  • आत्महत्या एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है। हालांकि, समय पर, साक्ष्य-आधारित और अक्सर कम लागत वाले हस्तक्षेपों से आत्महत्याओं पर नियंत्रण पाया जा सकता है। राष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं के प्रभावी होने के लिए, एक व्यापक बहुक्षेत्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति की इस समय जरूरत है।
  • उच्च आय वाले देशों में आत्महत्या और मानसिक विकारों (विशेष रूप से, अवसाद और शराब के उपयोग के विकारों) के बीच की कड़ी अच्छी तरह से स्थापित है, लेकिन कई आत्महत्याएँ संकट के क्षणों में आवेगपूर्ण रूप से भी हो जाती हैं, जिसमें जीवन के तनाव से निपटने की क्षमता में कमी होती है, जैसे कि वित्तीय समस्याएँ, संबंध टूटना या पुराना दर्द और बीमारी।

भारत में आत्महत्या की स्थिति:

  • WHO की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र में आत्महत्या की दर सबसे ज्यादा है।
  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार 2018 में आत्महत्या के लगभग 1,34,516 मामले सामने आए। 2017 में आत्महत्या की दर 9.9 थी, जो 2018 में बढ़कर 10.2 हो गई। 
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में महिलाओं की आत्महत्या दर 16.4 प्रति 1,00,000 और वही पुरुषों की 25.8 है।
  • विश्व भर में प्रतिवर्ष लगभग 8,00,000 लोग आत्महत्या करते हैं, इनमें से 1,35,000 (17%) भारत के निवासी हैं, (दुनिया में भारत की 17.5% आबादी है)।

गुजरात के मुख्यमंत्री ने लॉन्च की कृषि विविधीकरण योजना (Agricultural Diversification Scheme)

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने कृषि विविधीकरण योजना-2021 की नींव रखी, जिससे वनबंधु- आदिवासी क्षेत्रों के किसानों को फायदा होगा। यह आदिवासी क्षेत्रों में कृषि को सतत और लाभदायक बनाने में सहायता

मुख्य बिंदु:

  • इस योजना से गुजरात के 14 आदिवासी जिलों के लगभग 26 लाख किसानों को फायदा होगा।
  • इस योजना के तहत आदिवासी किसानों को उर्वरक-बीज सहायता के रूप में 31 करोड़ रुपये की मदद दी जाएगी।
  • इन किसानों को करीब 45 किलो यूरिया, 50 किलो एनपीके और 50 किलो अमोनियम सल्फेट दिया जाएगा।
  • इस योजना के तहत मक्का, बाजरा, टमाटर, करेला, दूधी आदि फसलों के बीज मुहैया कराए जाएंगे।
  • इसके पहले भी राज्य सरकार ने आदिवासी जिलों के पहाड़ी क्षेत्रों में कई लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के माध्यम से ऊंचाई पर सिंचाई का पानी पहुंचाने का काम भी किया है। इन योजनाओं से आदिवासी किसान अपने दम पर खेती कर सकेंगे।
  • गुजरात के अनुसूचित क्षेत्रों या जनजातीय क्षेत्रों को वलसाड जिले, पंचमहल जिले, वडोदरा जिले, तापी जिले, भरूच जिले, डांग जिले और तालुका, सौराष्ट्र क्षेत्र, साबरकांठा जिले और सूरत जिले में बांटा गया है। 
  • 2011 की जनगणना के अनुसार, गुजरात की जनसंख्या 6,04,39,692 थी, जिसमें से 89,17,174 व्यक्ति अनुसूचित जनजाति (ST) हैं। वे गुजरात की कुल जनसँख्या का लगभग 14.75 प्रतिशत हैं। 

Reuters Digital News Report, 2021 जारी

रॉयटर्स डिजिटल न्यूज रिपोर्ट- 2021 का 10वाँ संस्करण 23 जून, 2021 को जारी किया गया। यह रिपोर्ट रॉयटर्स इंस्टीट्यूट फॉर स्टडी ऑफ जर्नलिज्म (Reuters Institute for Study of Journalism – RISJ) द्वारा जारी की गई है।

मुख्य बिंदु:

  • 23 जून, 2021 को छह महाद्वीपों और 46 बाजारों के आंकड़ों पर आधारित डिजिटल समाचार रिपोर्ट रॉयटर्स डिजिटल न्यूज रिपोर्ट 2021का दसवाँ संस्करण प्रकाशित किया गया। 
  • यह रिपोर्ट रॉयटर्स इंस्टीट्यूट फॉर स्टडी ऑफ जर्नलिज्म (RISJ) द्वारा प्रकाशित की जाती है। 
  • रिपोर्ट का उद्देश्य उन प्रमुख मुद्दों पर प्रकाश डालना है जो गहरी अनिश्चितता और तेजी से बदलाव के समय उद्योग का सामना करते हैं। 
  • जिसमें पहली बार भारत, इंडोनेशिया, थाईलैंड, नाइजीरिया, कोलंबिया और पेरू शामिल हैं।
  • रॉयटर्स अधिक वैश्विक नमूना और इस बात की गहरी समझ प्रदान करता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप के बाहर समाचार वातावरण कैसे अलग तरीके से संचालित होते हैं और इसी के साथ इसने नए तरीके खोजने की कोशिश की है। 
  • यह भी स्वीकार किया है कि इंटरनेट की पहुँच, शिक्षा में अंतर लाने में मदद करेगा।
  • रॉयटर्स द्वारा सर्वेक्षण किए गए 46 मीडिया बाजारों में “समाचार में विश्वास” की श्रेणी में भारत 31 वें स्थान पर था।
  • एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म (एसीजे) ने भारतीय बाजार का सर्वेक्षण करने के लिए लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की। 
  • अध्ययन ने समाचारों में विश्वास पर ध्यान केंद्रित किया और इस वर्ष भारत को अपनी मुख्य रिपोर्ट में पहली बार चित्रित किया। 
  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 73 प्रतिशत उत्तरदाता समाचार प्राप्त करने के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं जबकि 82 प्रतिशत सोशल मीडिया का उपयोग करके ऑनलाइन समाचार प्राप्त करते हैं। 
  • उत्तरदाताओं में से 63 प्रतिशत केवल व्हाट्सएप और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। भारत में 38 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कुल मिलाकर समाचारों पर भरोसा किया। 
  • फ़िनलैंड, 65% के साथ, समाचारों में समग्र विश्वास में उच्च श्रेणी में है। इसी के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका, 29% के साथ, विश्वास में निम्नतम स्तर पर है।
  • ACJ और RISJ ने मात्र ऑनलाइन समाचार उपयोगकर्ताओं और अंग्रेजी बोलने वाले संपन्न, युवा, शिक्षित और शहर में रहने वाली आबादी को  अपने इस रिपोर्ट में सम्मिलित किया है, जो की भारतीय जनसँख्या का एक छोटा सा हिस्सा हैं और उन्हें भारत का प्रतिनिधित्व करने वाला नहीं माना जा सकता है।

साल 2021 के लिए भारत की विकास दर 9.6% रहेगी: मूडीज

वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज इंन्वेस्टर्स सर्विस (Moodys Investors Service) ने 2021 के लिए भारत के आर्थिक वृद्धि अनुमान को काम कर दिया है। इसके पीछे बड़ी वजह देश में कोरोना वैक्सीनेशन की सुस्त गति को बताया है और ये भी कहा गया है कि यह अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम है।

मुख्य बिंदु:

  • मूडीज ने भारत के विकास अनुमान को घटाकर 9.6% कर दिया है, जो पहले 13.9% था। 
  • मूडीज के अनुसार, 2022 में विकास दर 7% तक सीमित रहेगी।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतक (high-frequency economic indicators) दिखाते हैं कि भारत में COVID-19 की दूसरी लहर ने अप्रैल और मई में अर्थव्यवस्था को बुरी तरीके से प्रभावित किया है।
  • यह रिपोर्ट प्रकाश डालती है कि अब प्रतिबंधों में भी ढील दी जा रही है।
  • कोरोना वैक्सीनेशन की सुस्त रफ्तार को अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बताते हुए मूडीज ने कहा कि जून के तीसरे सप्ताह तक देश की मात्र 16% जनसंख्या को ही वैक्सीन का एक डोज मिला है। जबकि पूरी तरह टीकाकरण यानी दोनों खुराक लेने वाली आबादी केवल 3.6% है। ऐसे में आर्थिक नुकसान को मौजूदा तिमाही तक सीमित रखने के लिए तेजी से टीकाकरण किया जाना जरूरी है।
  • आर्थिक नुकसान को जून 2021 तक कन्ट्रोल रखने में तेजी से टीकाकरण की प्रगति महत्त्वपूर्ण होगी।
  • इसमें यह भी कहा गया है कि वायरस के पुनरुत्थान ने 2021 के लिए भारत के विकास के पूर्वानुमान में अनिश्चितता बढ़ा दी है। पर यह संभावना है कि अप्रैल-जून तिमाही के लिए आर्थिक क्षति सीमित रहेगी।
  • इससे पहले भी विश्वबैंक(World Bank) ने भारत की वृद्धि दर अनुमान को घटाया था। वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर के अनुमान को 10.1 प्रतिशत से घटाकर 8.3 प्रतिशत कर दिया था।
  • भारत के 10 राज्य दूसरी लहर से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। ये भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के पूर्व-महामारी स्तर का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा हैं। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक ऐसे चार राज्य हैं जिन्होंने वित्तीय वर्ष 2019-20 में सभी राज्यों में सबसे ज्यादा योगदान दिया।

केन्दीय सरकार ने CWC और CRWC के विलय को मंजूरी दी

केन्द्र सरकार ने कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (Public Sector Undertakings) में निजी क्षेत्र की दक्षता का सही से प्रयोग करने की दिशा में एक और कदम उठाया है। कैबिनेट ने दोनों कंपनियों के समान कार्यों को एकीकृत करने के लिए Central Railside Warehouse Company (CRWC) और उसके होल्डिंग एंटरप्राइज Central Warehousing Corporation (CWC) के विलय को मंजूरी दे दी है।

मुख्य बिंदु:

  • सरकार ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) के उद्यम ‘सेंट्रल रेलसाइड वेयरहाउस कंपनी लिमिटेड’ (CRWC) की सभी संपत्तियों, देनदारियों, अधिकारों और दायित्वों को अपने होल्डिंग उद्यम ‘सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन’ (CWC) के साथ ट्रान्सफर करने और विलय को मंजूरी दे दी है। 
  • यह फैसला प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में हुई केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। 
  • सीआरडब्ल्यूसी (CRWC) को कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत 2007 में एक मिनी रत्न श्रेणी-II में शामिल किया गया था।
  • इस विलय से एक ही प्रशासन के माध्यम से न सिर्फ दोनों कंपनियों के वेयरहाउसिंग, हैंडलिंग और परिवहन जैसे समान कार्य एकीकृत होंगे बल्कि इनकी दक्षता, इष्टतम क्षमता उपयोग, पारदर्शिता, जवाबदेही को बढ़ावा देने के साथ-साथ वित्तीय बचत को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। 
  • इसके अलावा नई वेयरहाउसिंग क्षमताओं के लिए रेलवे साइडिंग का फायदा उठाया जा सकेगा। 

विलय का महत्त्व 

  • इस विलय के साथ कार्यालय के किराए, कर्मचारियों के वेतन और अन्य प्रशासनिक लागतों में बचत के कारण Railside Warehouse Complexes (RWCs) के प्रबंधन व्यय में 5 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद है।
  • ये कार्य एकल प्रशासन के अंतर्गत आएंगे जो बदले में दक्षता, अधिकतम क्षमता उपयोग, जवाबदेही, पारदर्शिता को बढ़ावा देंगे और वित्तीय बचत सुनिश्चित करेंगे।
  • यह गुड-शेड स्थानों के पास कम से कम 50 गोदाम स्थापित और रेलसाइड गोदाम स्थापित करने में मदद करेगा।
  • इससे कुशल कामगारों के लिए 36,500 एवं अकुशल कामगारों के लिए 9,12,500 श्रम दिवसों के बराबर रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना जताई जा रही है। इस विलय की पूरी प्रक्रिया निर्णय की तिथि से 8 माह के भीतर पूरा होने की उम्मीद की जा रही है।

Central Railside Warehouse Company Limited 

  • CRWC एक द्वितीय श्रेणी का मिनी-रत्न सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम है। इसे 2007 में कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत निर्मित किया गया था।
  • यह केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित कृषि उपज और कुछ अन्य वस्तुओं के भंडारण के उद्देश्य से बनाई गई थी।
  • यह भंडारण से जुड़े मामलों के लिए वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के निगमन और विनियमन के लिए सेवाएँ प्रदान करती है। 
  • सीडब्ल्यूसी( CWC) एक मुनाफा कमाने वाला सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम है, जिसकी अधिकृत पूंजी 100 करोड़ रुपये और चुकता पूंजी 68.02 करोड़ रुपये है। 
  • सीडब्ल्यूसी(CWC) ने 10 जुलाई, 2007 को ‘सेंट्रल रेलसाइड वेयरहाउस कंपनी लिमिटेड’ (CRWC) नामक एक अलग सहायक कंपनी का गठन किया, जो रेलवे से पट्टे पर ली गई थी और यह अधिग्रहित भूमि पर रेलसाइड वेयरहाउसिंग कॉम्प्लेक्स/टर्मिनलों/मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब की योजना, विकास, प्रचार, अधिग्रहण और संचालन करती है।

भारत और अमेरिका की नौसेनाएँ पैसेज एक्सरसाइज का आयोजन करेंगी

जून के अंतिम हफ्ते में भारत और अमेरिका पैसेज नेवल अभ्यास (Passage Naval Exercise) आयोजित करने जा रही हैं। भारतीय नौसेना अमेरिकी नौसेना के रोनाल्ड रीगन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए समुद्री गश्त वाले पोत और अन्य विमान ले जाएंगी।

मुख्य बिंदु:

  • Passex भारतीय और अमेरिकी नौसेनाओं के मध्य नियमित अभ्यास का हिस्सा है।
  • यह द्विपक्षीय और बहुपक्षीय प्रारूप एक खुली, समावेशी और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की प्रतिबद्धता सुनिश्चित करने में दोनों नौसेनाओं के साझा मूल्यों को दर्शाता है।
  • भारतीय नौसेना ने अक्टूबर, 2020 में यूएसएस रोनाल्ड रीगन (USS Ronald Reagan) के साथ Passex अभ्यास में हिस्सा लिया और बाद में भारतीय नौसैनिक जहाजों ने यूएसएस निमित्ज़ (USS Nimitz) के साथ एक और Passex अभ्यास में हिस्सा लिया। 
  • सितंबर 2020 में, अमेरिकी नौसेना का P-8A जो एक लंबी दूरी का समुद्री गश्ती विमान है, वो भी द्विपक्षीय लॉजिस्टिक्स सहायता समझौते के तहत पहली बार ईंधन भरने के लिए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर में उतरा था। 

Ronald Reagan Carrier Strike Group:

  • यह अभी फ़िलहालअफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी के लिए मदद करने के लिए मध्य-पूर्व जा रहा है। 
  • इससे पहले जून माह में, रोनाल्ड रीगन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप दक्षिण चीन सागर के विवादित जलक्षेत्र में था जहां इसने सिंगापुर की नौसेना के साथ अभ्यास किया था।
  • भारत-अमेरिका Passex अभ्यास एक दो दिवसीय अभ्यास है जिसका मुख्य उद्देश्य समुद्री ऑपरेशन में व्यापक रूप से एकीकृत और समन्वय करने की क्षमता का प्रदर्शन करके द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग को मजबूत करना है।

जमशेदजी टाटा पिछली सदी के विश्व के सबसे बड़े दानी व्यक्ति : रिपोर्ट

23 जून, 2021 को जारी की गई EdelGive Hurun Philanthropists of Century की सूची में जमशेदजी नसरवानजी टाटा जो टाटा समूह के संस्थापक थे ने पहला स्थान प्राप्त किया है। जमशेदजी टाटा द्वारा स्थापित टाटा समूह ने सबसे ज्यादा 102 अरब डॉलर (करीब 75 खरब 70 अरब 53 करोड़ 18 लाख रुपये) का दान दिया है। 

मुख्य बिंदु:

  • हुरुन रिपोर्ट और एडेलगिव फाउंडेशन द्वारा तैयार दुनिया के 50 दानवीरों की सूची में जमशेदजी को पिछले 100 सालों में दुनिया का सबसे बड़ा दानवीर व्यक्ति चुना गया है। 
  • इस सूची में दूसरे नंबर पर बिल गेट्स और उनकी तलाकशुदा पत्नी मिलिंडा गेट्स हैं, जिन्होंने 74.6 अरब डॉलर का दान दिया है। 
  • वहीं वारेन बफे 37.4 अरब डॉलर के साथ तीसरे, जॉर्ज सॉरस 34.6 अरब डॉलर के साथ चौथे और जॉन डी रॉकफेलर 26.8 अरब डॉलर के साथ सूची में पाँचवें नंबर पर हैं।
  • जमशेदजी ने अपनी दो तिहाई संपत्ति ट्रस्ट को दे दी थी, जो शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अन्य क्षेत्रों में निरंतर आज भी काम कर रहा है। 
  • उन्होंने 1892 ई. से ही दान देना प्रारम्भ कर दिया था। इस सूची में एकमात्र दूसरे भारतीय उद्योगपति अजीम प्रेमजी हैं, जिन्होंने करीब 22 अरब डॉलर की अपनी संपत्ति दान कर दी है।
  • दानवीरों की सूची में सबसे अधिक 39 लोग अमेरिका के हैं। दूसरे नंबर पर ब्रिटेन है, जिसके 5 लोगों को इस सूची में जगह दिया गया है। 
  • वहीं, इसमें चीन के तीन दानवीर शामिल हैं। 
  • सूची में शामिल सबसे बड़े दानवीरों में 37 लोग अब इस दुनिया में नहीं है, जबकि केवल 13 लोग जीवित हैं।

जमशेदजी टाटा:

  • जमशेदजी टाटा जमशेदपुर में टाटा आयरन एंड स्टील वर्क्स कंपनी (टिस्को) के संस्थापक थे, जिसे अब टाटा स्टील के नाम से भी जाना जाता है। 
  • वह कपास और कच्चा लोहा उद्योग के भीतर अपने उपक्रमों के लिए मशहूर थे। 
  • जमशेदजी टाटा की मृत्यु 1904 में हुई थी। 
  • टाटा स्टील 26 देशों में काम करती है और लगभग 80,500 लोगों को रोजगार दिया हुआ है। 
  • जमशेदजी टाटा को “भारतीय उद्योग का जनक” भी कहा जाता है। 
  • वह उद्योग की दुनिया में इतने प्रभावशाली थे कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें “वन-मैन प्लानिंग कमीशन” कहा था।

टाटा समूह के बारे में:

  • टाटा समूह एक भारतीय निजी बहुराष्ट्रीय समूह है जो ऑटोमोबाइल, हवाई जहाज और अन्य उत्पादों का निर्माण करता है। 
  • इसका मुख्यालय मुंबई में है।
  • इसकी स्थापना 1868 ई. में हुई थी।

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