करेंट अफेयर्स: 23 जून 2021

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करेंट अफेयर्स: 23 जून 2021

स्वीडिश पीएम स्टीफन लोफवेन अविश्वास प्रस्ताव हारे

स्वीडन के प्रधानमंत्री स्टीफन लोफवेन ने विश्वास मत खो दिया, जिससे वह स्वीडन के वे ऐसे पहले नेता हो गए हैं जिन्हें इस तरह के प्रस्ताव पर हार का सामना करना पड़ा है। इस घटनाक्रम के बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई है। 2018 में हुए चुनाव के बाद भी संसद में गतिरोध पैदा हो गया था और सरकार बनाने के लिए कई महीनों तक वार्ताएं चली थी।

मुख्य बिंदु:

  • सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के स्टीफन लोफवेन 2014 से प्रधानमंत्री पद पर आसीन है।
  • स्वीडिश संसद  में कुल 349 सीट है जिसमे से 181 सांसदों के बहुमत से अविश्वास प्रस्ताव पारित किया गया।
  • लोफवेन विश्वास मत हारने वाली सरकार के पहले प्रमुख हैं.
  • मौजूदा लोफवेन की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव राष्ट्रवादी स्वीडन डेमोक्रेट्स पार्टी ने पेश किया।
  • इस अविश्वास प्रस्ताव का कारण आवास की कमी से निपटने के लिए एक प्रस्तावित कानून है जिससे लेफ्ट पार्टी द्वारा समर्थन वापस ले लेने के कारण मौजूदा सरकार अल्पमत में आ गई।
  • लेफ्ट पार्टी के मुताबिक नवनिर्मित मकानों के लिए किराया नियंत्रण खत्म करने के प्रस्ताव के कारण लोफवेन में उनका विश्वास नहीं रहा। 
  • स्वीडन में किराये पर कड़ा नियंत्रण है जिसका लक्ष्य बड़े शहरों में सस्ती दर बनाए रखना है।
  • वर्तमान में स्वीडन में भवन निर्माताओं में किराये के बाजार के लिए नए घर बनाने में निवेश करने को लेकर कम उत्साह है। इसलिए लेफ्ट पार्टी को डर है कि किराया बाजार को नियंत्रण मुक्त करने से मूल्यों में बढ़ोतरी होगी और गरीब एवं अमीर के बीच खाई बढ़ेगी।

स्वीडिश संसद रिक्सडैग (Riksdag) के बारे में:

  • स्वीडन के संसद को रिक्सडैग के नाम से जाना जाता है। यह 1971 से एक सदनीय विधायिका है।
  • यह संस्था स्वीडन की राष्ट्रीय विधायिका और सर्वोच्च निर्णय लेती है। 
  • रिक्सडैग में 349 सींटे हैं जो आनुपातिक रूप से चुने जाते हैं और चार साल के कार्यकाल के लिए काम करते हैं।
  • सरकार के उपकरण में रिक्सडैग के संवैधानिक कार्यों को सूचीबद्ध किया गया है और इसके काम का उल्लेख Riksdag Act मे होता है।

न्यूजीलैंड की लॉरेल हबर्ड बनी पहली ट्रांसजेंडर ओलंपियन

न्यूजीलैंड की लॉरेल हबर्ड को ओलंपिक में हिस्सा लेने के लिए मौका मिल गया है। इसी के साथ वह ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली पहली ट्रांसजेंडर एथलीट बन  गयी हैं। 43 वर्षीय हबर्ड वेटलिफ्टर हैं और वह महिलाओं की 87 किलोग्राम भार वर्ग में हिस्सा लेंगी।

हबर्ड को चुनने के फैसले पर विवाद भी हो रहा है और लोगों का मानना है कि उन्हें महिला वर्ग में हिस्सा लेने का लाभ मिलेगा।

मुख्य बिंदु:

  • न्यूजीलैंड ओलंपिक समिति (NZOC) ने भारोत्तोलक लॉरेल हबर्ड को महिलाओं के +87 किग्रा वर्ग में लड़ने के लिए चुना है।
  • 2013 में ट्रांसजेंडर के रूप में सामने आने से पहले हबर्ड ने पुरुष वर्ग में भाग लिया था। आलोचकों का मानना है कि भारी शरीर के चलते उन्हें महिला वर्ग में लाभ मिलेगा।
  • इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) ने 2015 में अपने नियमों में बदलाव कर कहा था कि जिन ट्रांसजेंडर एथलीट्स का टेस्टोस्टेरोन लेवल मानक से कम होगा उन्हें महिला के रूप में हिस्सा लेने की छूट रहेगी।
  • 2015 में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा ट्रांसजेंडर एथलीटस के लिए महिला के रूप में प्रतिस्पर्धा करने के लिए यह शर्त रखी कि पहली प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले उनके टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम से कम 12 माह के लिए 10 नैनोमोल प्रति लीटर से कम होना चाहिए।
  • हबर्ड 2015 से ओलंपिक में भाग लेने के लिए पात्र हैं।
  • भले ही अब हबर्ड का टेस्टोस्टेरोन मानक के अनुसार है, लेकिन वह शरीर में महिला एथलीट्स से कहीं अधिक भारी हैं।

लॉरेल हबर्ड (Laurel Hubbard) के बारे में:

  • हबर्ड का असली नाम गेविन हबर्ड था, लेकिन लिंग परिवर्तन के बाद उन्होंने अपना नाम लौरेल हबर्ड रख लिया। 
  • उन्हें 23 जुलाई 2021 को होने वाले 2020 ग्रीष्मकालीन टोक्यो ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा करने के लिए चुना गया है । 
  • 2012 में उन्होंने अपना लिंग परिवर्तन कराया व वे लॉरेल हबर्ड बन गईं।
  • उनके नाम कई पदक है जैसे कि 2017 विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीता और 2019 में समोआ में आयोजित प्रशांत खेलों में स्वर्ण पदक जीता था ।

बच्चों में कोरोना का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है Throat Gargle Sample Test 

कर्नाटक सरकार ने कोविड -19 की तीसरी लहर की रोकथाम के लिए एक 13 सदस्यीय एक्सपर्ट समिति का गठन किया गया था । इसकी अध्यक्ष हृदय रोग विशेषज्ञ देवी प्रसाद शेट्टी थे। इस समिति द्वारा जारी एक सिफारिश के अनुसार  6-14 आयु वर्ग के बच्चों के गले में गरारे का नमूना लेकर COVID-19 इन्फेक्शन का पता लगाया जा सकता है।

मुख्य बिंदु:

  • इस तरह का एक अध्ययन इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने भी किया जिसमे बताया गया कि गले का गरारे का स्वैब से नमूना एकत्र कर SARS-CoV-2 वायरस का पता लगाया जा सकता है।
  • इस रिपोर्ट द्वारा जारी आंकड़ो के अनुसार तीसरी लहर में कर्नाटक में 18 वर्ष तक की उम्र के लगभग 3.4 लाख बच्चों के संक्रमित होने की आशंका है।
  • तीसरी लहर की पीक पर राज्य के अस्पतालों को औसतन 23,804 पीडियाट्रिक बेड 6,801 आईसीयू या एचडीयू बेड और 43,358 COVID केयर सेंटर बेड की आवश्यकता हो सकती है।
  • इस समिति के अनुसार, बच्चों के इलाज के लिए वयस्कों से अलग उपचार प्रोटोकॉल बनानी होगी।

उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 में संशोधन की तैयारी शुरू

केंद्रीय सरकार उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम- 2020 में संशोधन की तैयारी कर रही है। इसके लिए आम लोगों और दूसरे पक्षों से सुझाव मांगे गए हैं। दरअसल ई-कॉमर्स पोर्टल पर ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए कई नए प्रावधान सुझाए गए हैं। इन पोर्टल पर धोखाधड़ी पूर्ण बिक्री, भारी छूट और गलत तरीकों के खिलाफ प्रावधान शामिल हैं।

मुख्य बिंदु:

  • धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं पर अंकुश लगाने के लिए भारत सरकार ने देश के ई-कॉमर्स नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। 
  • सरकार के अनुसार, जिन बदलावों का प्रस्ताव दिया गया है, उनमें कुछ तरह की फ्लैश सेल पर बैन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की ओर से नियमों को नहीं मानने पर कार्रवाई शामिल है।
  • यह निर्णय लघु व्यवसायों की शिकायतों के बाद लिया गया था। उन्होंने ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस जैसे अमेज़न, फ्लिपकार्ट पर मार्केट दबदबे का गलत इस्तेमाल करने और ऑनलाइन रिटेलर्स द्वारा भारी छूट देने का आरोप लगाया है। 
  • इन संशोधन का प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब फ्लिपकार्ट और अमेज़न इंडिया जैसे बड़े ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस की बाजार प्रभुत्व के कथित दुरुपयोग के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India) द्वारा जांच की जा रही है।

प्रस्तावित नियम इस प्रकार है:

  • संशोधित नियमों में ई-कॉमर्स कंपनियों जैसे अमेज़न, फ्लिपकार्ट द्वारा वस्तुओं और सेवाओं की ‘फ्लैश सेल’ को सीमित करने का प्रस्ताव है।
  • लेकिन यह पारंपरिक ई-कॉमर्स फ्लैश सेल पर प्रतिबंध नहीं लगाता है।
  • कुछ विशिष्ट फ्लैश सेल या बैक-टू-बैक सेल की अनुमति नहीं दी जाएगी जो ग्राहकों की पसंद को सीमित करती है, जिससे कीमतों में बढ़ोतरी होती है।
  • ई-कॉमर्स फर्मों को पर्याप्त निवारण तंत्र स्थापित करने के साथ एक मुख्य अनुपालन अधिकारी (Chief Compliance Officer) नियुक्त करना होगा।
  • कंपनियों को एक निवासी शिकायत अधिकारी (Resident Grievance Officer) नियुक्त करना होगा जो कंपनी का कर्मचारी और भारत का नागरिक हो। ऐसे अधिकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए संपर्क के नोडल बिंदु के रूप में काम करेंगे।

इजराइली सेना ने हवाई उच्च शक्ति वाले लेजर का सफलतापूर्वक परीक्षण किया

इज़राइली सेना ने 21 जून 2021 को घोषणा की है कि उन्होंने एक हवाई उच्च शक्ति वाले लेजर का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है जो ड्रोन को हवा में मारने की क्षमता रखता है। इस तरह इजरायल की सेना ने रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा कारनामा कर दिखाया है।

मुख्य बिंदु:

  • इजरायल ने हवाई लेजर गन की सहायता से कई बार टेस्‍ट में ड्रोन विमानों को मार गिराया।
  • इजरायल ने वर्तमान स्थिति में इस शानदार उपलब्‍ध‍ि को ‘मील का पत्‍थर’ करार दिया है।
  • यह घातक इजरायली हवाई लेज़र किसी भी उड़ती हुई वस्‍तु जैसे ड्रोन, मोर्टार, रॉकेट, मिसाइल को हवा में ही मार गिराने में सक्षम है।
  • इजरायल ने यह करनामा ऐसे समय पर कर दिखाया है जब विश्वभर में भविष्‍य में ड्रोन युद्ध की आशंका तेज होती जा रही है।
  • इस साल मई 2021 के 11-दिवसीय युद्ध के दौरान गाजा से दागे गए हजारों रॉकेटों के मुकाबले इस प्रणाली में 90% अवरोधन दर (interception rate) थी।
  • प्रयोग के दौरान इस लेजर वेपन ने 3 फुट की दूरी से ड्रोन विमान को मार गिराया लेकिन इसे बनाने वाले वैज्ञानिकों का दावा है कि जब सिस्‍टम पूरी तरह से तैयार हो जाएगा तब तक़रीबन 20 किलोमीटर दूरी से ही ड्रोन विमानों को तबाह किया जा सकेगा।
  • यह लेजर हथियार इजरायल के वर्तमान हवाई डिफेंस तकनीक का इस्‍तेमाल अपने दुश्‍मन को तलाश करने और उस पर निशाना लगाने के लिए करता है। और इसके बाद यह लेजर हथियार 100 किलोवाट की लेजर बीम को अपने सामने दुश्‍मन पर छोड़ता है।

इज़रायल की लेजर रक्षा प्रणाली के बारे में:

  • इस लेज़र को एलबिट सिस्टम्स (Elbit Systems) के साथ तैयार किया गया है। 
  • इसे एक नागरिक विमान पर रखा गया था और हाल ही में भूमध्य सागर में हुए परीक्षण में इसने एक ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया गया।

लेजर हथियार के बारे में:

  • लेजर हथियार लेजर पर आधारित एक निर्देशित-ऊर्जा हथियार है। 
  • इस क्षेत्र में कई अनुसंधान एवं विकास के बावजूद, लेजर सहित निर्देशित-ऊर्जा हथियार वर्तमान में प्रयोगात्मक चरण में हैं। 
  • वायुमंडलीय तापीय प्रस्फुटन लेजर हथियार के लिए एक बड़ी समस्या है और कोहरा, धुआं, बारिश, धूल, बर्फ, स्मॉग, झाग जैसे अस्पष्ट रसायन इस समस्या को और बढ़ा सकते है।

Yellow Gold 48 : भारत में पीला तरबूज व्यावसायिक रूप से पेश किया गया

भारत में, जर्मनी की प्रमुख कृषि रसायन कंपनी बायर द्वारा दो वर्ष के स्थानीय परीक्षणों के बाद तरबूज की पहली पीली किस्म ‘येलो गोल्ड 48’ की व्यवसायिक शुरुआत की है।

मुख्य बिंदु:

  • कंपनी के अनुसार उन्होंने इस पीले तरबूज को बायर के वैश्विक अनुसंधान और विकास प्रयासों के तहत बेहतर जर्मप्लाज्म से विकसित किया गया है।
  • येलो गोल्ड 48 से तरबूज उत्पादकों को बढ़ी हुई उपज क्षमता, बेहतर रोग और कीट सहनशीलता और अधिक लाभ का फायदा हो सकता है। 
  • येलो गोल्ड 48 किस्म अक्टूबर से फरवरी तक खेती के लिए और अप्रैल से कटाई के लिए अधिक उपयुक्त है और जुलाई के मध्य तक यह बाजार में उपलब्ध हो सकते हैं ।
  • येलो गोल्ड 48 ने उपज क्षमता, बेहतर रोग और कीट सहिष्णुता और उच्च रिटर्न में वृद्धि की है जो तरबूज उत्पादकों को लाभान्वित कर सकता है।
  • येलो गोल्ड 48 अपनी उच्च उपज और आय क्षमता के साथ तरबूज उत्पादकों को नई श्रेणियों को अपनाने में विविधता लाने और विदेशी फलों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सशक्त बनाएगा।
  • पीले तरबूज उत्पादकों को सीधे बड़े खरीदारों और खाद्य खुदरा स्टोर से जोड़कर बाजार भी विकसित किया जा रहा है।
  • यह तरबूज का छिलका गहरे हरे रंग का होता है जिसमें हल्की धारियाँ और नारंगी पीले रंग आंतरिक भाग होता है। इस फल का औसत वजन 2.5 -3 किलो है।
  • येलो गोल्ड 48 एक विशिष्ट, मीठा स्वाद प्रदान करती है। लाल तरबूज की किस्म की तुलना में इसकी त्वचा अधिक मोटी होती है, जो इसे लंबी शेल्फ-लाइफ देती है।
  • इसकी मोटी परत खेतों से बाजारों तक परिवहन के दौरान क्षति से संभावित नुकसान को भी कम करती है।

एक ही दिन में 86 लाख कोविड-19 टीके लगाकर भारत ने बनाया रिकॉर्ड

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर भारत सरकार ने टीकाकरण अभियान के तीसरे चरण की शुरुआत की। शुरु करने के पहले ही दिन देश में रिकॉर्ड टीकाकरण देखने को मिला। कोविड टीकाकरण के लिए संशोधित दिशानिर्देश लागू किए जाने के पहले दिन कोविड रोधी टीकों की 85 लाख से अधिक खुराकें लगाई गईं। संशोधित दिशानिर्देशों में कहा गया है कि सभी नागरिक निशुल्क टीकाकरण के हकदार हैं, चाहे उनकी आय कितनी भी हो। जो लोग भुगतान करने की क्षमता रखते हैं उन्हें निजी अस्पतालों के टीकाकरण केंद्रों में जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

मुख्य बिंदु:

  • 21 जून, 2021 को भारत ने एक ही दिन में 86,16,373 कोरोना के टीके लगाकर रिकॉर्ड बना दिया है, इसके साथ ही देश में कुल टीकाकरण का आंकड़ा 28 करोड़ 87 लाख तक पहुँच गया है। 
  • देश के इस रिकॉर्ड टीकाकरण के पैमाने का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत ने केवल एक दिन 86 लाख लोगों को कोरोना का टीका लगाया गया है, जबकि इजरायल जैसे देश की कुल जनसँख्या ही 90 लाख है।
  • बता दें कि, भारत के टीकाकरण अभियान का नया चरण 21 जून से प्रारम्भ हुआ जिसमें केंद्र सरकार ने 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को मुफ्त में कोविड के टीके उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया है।
  • कोविड-19 टीकाकरण के पंजीकरण के लिए Co-WIN पोर्टल (https://www.cowin.gov.in) और आरोग्य सेतु एप्प पर किया जा सकता है। पंजीकरण करने के बाद व्यक्ति को वैक्सीन का स्थान और समय चुनने का ऑप्शन होता है।

भारत में प्रयोग किये जाने वाले टीके:

COVAXIN

  • COVAXIN को भारत बायोटेक द्वारा निर्माण किया हुआ एक सरकार समर्थित टीका है। 
  • इसकी प्रभावकारिता दर 81% दर्ज की गयी है। COVAXIN वैक्सीन के चरण तीन परीक्षणों में 27,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया है। COVAXIN दो खुराक में दिया जाता है। खुराक के बीच का समय अंतराल चार हफ्ते है।
  • COVAXIN को मृत COVID-19 वायरस से तैयार किया जाता है।

COVISHIELD

  • COVISHIELD वैक्सीन एस्ट्राज़ेनेका द्वारा निर्मित है। 
  • स्थानीय रूप से, COVISHIELD सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया द्वारा निर्मित किया गया है। 
  • यह चिम्पांजी के एडेनोवायरस नामक एक सामान्य कोल्ड वायरस के कमजोर संस्करण से बनाया गया था। 
  • COVID-19 वायरस की तरह लगने के लिए वायरस को संशोधित किया गया है। इसे भी दो खुराक में लगाया जाता है।

स्पुतनिक वी (Sputnik V)

  • इसे मॉस्को के गैम्लेया रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी (Gamleya Research Institute of Epidemiology and Microbiology) द्वारा निर्मित किया गया था।
  • यह भी दो खुराक वाला टीका है। हालांकि, हाल ही में रूस में स्पुतनिक वी के एकल खुराक टीके का उत्पादन किया गया है। इसे स्पुतनिक लाइट सिंगल डोज कहा जाता है । भारत अभी केवल डबल खुराक स्पुतनिक वी का प्रयोग कर रहा है।
  • COVISHIELD को जहां एक कमजोर सामान्य एडेनोवायरस से बनाया गया है जो चिंपैंजी को प्रभावित करता है वही स्पुतनिक वी को विभिन्न मानव एडेनोवायरस का प्रयोग करके बनाया गया है।

International Olympic Day 2021

ओलंपिक दिवस हर वर्ष 23 जून को विश्व भर में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि खेलों में अंतराष्ट्रीय स्तर प्रस्तुत किया जा सके और सभी देशो के खिलाड़ियों की खेलों में भागीदारी बढ़ा सके ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग खेल के प्रति आकर्षित हो।

मुख्य बिंदु:

  • विश्वभर के खिलाड़ियों को एक मंच पर इकठ्ठा कर विभिन्न खेलों में विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा करवाने वाले खेलों के महाकुंभ ओलंपिक के लिए आज का दिन बेहद खास है। 
  • आज 23 जून को विश्वभर में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस मनाया जा रहा है। 
  • ओलंपिक दिवस खेल, स्वास्थ्य, और सबसे अच्छा होने का एक त्यौहार है जिसमें दुनियाभर से लोग शामिल होते हैं।
  • इस दिन पर विश्व के अलग-अलग हिस्सों में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिसमें हर वर्ग के लोग या खिलाड़ी शामिल होते हैं।
  • आज ही के दिन यानी 23 जून को 1894 में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की स्थापना हुई थी, यह दिन खेल, स्वास्थ्य और खुद को बेहतर बनाने का दिन है।
  • चेक International Olympic Committee(IOC) के सदस्य डॉक्टर जोसेफ  ग्रस ने स्टॉकहोम में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति(IOC)के 41वें सत्र में विश्व ओलंपिक दिवस का विचार प्रस्तुत किया था।
  • जिसमें ओलंपिक के संदेशों और मूल उद्देश्य को मनाने के लिए एक दिन निर्धारित करने की बात कही गयी थी। 
  • कुछ महीनों बाद जनवरी 1948 में सेंट मोरित्ज में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति(IOC) के 42वें सत्र में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई। 
  • राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों को इस कार्यक्रम के आयोजन का प्रभारी बनाया गया, उसके बाद से यह दिन आईओसी के इतिहास में एक विशेष दिन का हिस्सा बन गई। 
  • गौरतलब है कि सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की स्थापना 23 जून, 1894 को सोरबोन, पेरिस में की गई थी। जहां पियरे डे कोबेर्टिन ने ओलंपिक खेलों के पुनरुद्धार के लिए एक रैली की थी।
  • ओलंपिक दिवस औपचारिक रूप से 23 जून 1948 को पहली बार मनाया गया था। उस समय पुर्तगाल, ग्रीस, ऑस्ट्रिया, कनाडा, स्विट्जरलैंड, ग्रेट ब्रिटेन, उरुग्वे, वेनेजुएला और बेल्जियम ने अपने-अपने देशों में ओलंपिक दिवस का आयोजन किया और उस समय के आईओसी के अध्यक्ष सिगफ्रीड एडस्ट्रॉम ने दुनिया के युवाओं को खेल के प्रति संदेश दिया।

International Widow Day 2021

हर साल 23 जून को दुनियाभर में International Widows Day यानी  अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस मनाया जाता है। यह दिन व्यापक रूप से विधवाओं की आवाज़ों और उन्हें होने वाले अनुभवों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए मनाया जाता है। इस दिवस को उनके द्वारा किए जाने वाले अद्वितीय समर्थन को प्रोत्साहित करने के लिए जाना जाता है। 

मुख्य बिंदु:

  • इस दिन सभी उम्र, क्षेत्र और संस्कृति की विधवाओं की स्थिति को विशेष पहचान देने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 23 जून  2011 को पहली बार अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस की घोषणा की थी जिसे हर साल मनाया जाता है।
  • आज भी विधवा महिलाएं अपने जीवन साथी को खोने के बाद दुनिया भर में कई चुनौतियों का सामना करती हैं और बुनियादी जरूरतों, मानवीय अधिकार और सम्मान के लिए लंबे समय तक संघर्ष करती हैं।
  • सामाजिक और कानूनी संरक्षण के अभाव में इन विधवा महिलाओं की जीवन भर की कमाई और बचत अक्सर गरीबी से संघर्ष में खत्म हो जाती हैं। 
  • जिन देशों में अच्छी पेंशन प्रणाली है, वहां भी इन महिलाओं को वृद्धावस्था पुरुषों के मुकाबले निर्धनता का सामना ज्यादा करना पड़ता है। 
  • वृद्ध विधवाओं के लिए विशेष रूप से सामाजिक सेवाएं अधिक महत्वपूर्ण हैं जो अकेली रह जाती हैं या जिन्हें वृद्धावस्था में देखभाल सेवाओं की ज्यादा आवश्यकता पड़ती है।
  • कई देशों में महिलाओं के पास पुरुषों के समान पैतृक अधिकार नहीं होता हैं। इसका अर्थ यह है कि उन्हें अक्सर ज़मीन, संपत्ति और अपने खुद के बच्चों के जीवन से बेदखल कर दिया जाता है। 
  • जिन देशों के क़ानूनों में महिलाओं-पुरुषों के बीच भेदभाव नहीं किया जाता, वहां भी व्यवहार में महिलाएं पुरुषों की तरह अपने अधिकारों का प्रयोग नहीं कर पातीं।
  • इसके अतिरिक्त कुछ समाजों में विधवाओं को यौन शोषण एवं उत्पीड़न या जबरन विवाह, दुर्व्यवहार और हिंसा का शिकार होती है। 
  • इन परिस्थितियों को बदला जाना चाहिए और उन नियमों में भी परिवर्तन किया जाना चाहिए। इन सभी भेदभावकारी रीतियों और हिंसा का समर्थन करने वाले नीतियों पर ही यह दिन प्रकाश डालता है।

United Nations Public Services Day 2021

संयुक्त राष्ट्र लोक सेवा दिवस हर साल 23 जून को दुनियाभर में मनाया जाता है। यह दिवस विकास प्रक्रिया में लोक सेवा के योगदान को उजागर करने और समुदाय में लोक सेवा को महत्व देने के लिए मनाया जाता  है। 

मुख्य बिंदु:

  • इस दिन को विश्व भर में विभिन्न सार्वजनिक सेवा संगठनों और विभागों द्वारा व्यापक रूप से मनाया जाता है।
  • इस दिन समुदाय में विकास और सुधार करने में लोक सेवकों की भूमिका को पहचानने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र लोक सेवा दिवस को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 2003 के रिजोल्युशन A/RES/57/277 में नामित किया गया था।
  • इसका उद्देश्य समुदाय के लिए सार्वजनिक सेवा के मूल्य और गुण को पहचानना और विकास प्रक्रिया में लोक सेवा के योगदान के बारे में लोगों को जागरूक करना है।
  • इसके द्वारा लोक सेवकों के काम को मान्यता मिलती है। इसके अतिरिक्त यह युवाओं को सार्वजनिक क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
  • संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद की ओर से लोक सेवा दिवस के दिन लोक सेवा की भूमिका, प्रतिष्ठा और दृश्यता बढ़ाने के लिए किए गए योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र लोक सेवा पुरस्कार दिए जाते हैं। 
  • इस दिन अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने श्रम संबंधों पर कन्वेंशन (लोक सेवा), 1978 (नंबर 151) को अपनाया था। 
  • यह कन्वेंशन विश्व भर में सभी सिविल सेवकों की कामकाजी परिस्थितियों को निर्धारित करने के लिए एक रूपरेखा तैयार करता है।
  • इस वर्ष का आयोजन सार्वजनिक सेवाओं के वितरण में नवाचार और प्रौद्योगिकी द्वारा निभाई जाने वाली तेजी से केंद्रित भूमिका पर जोर डालेगा।
  • इस वर्ष के कार्यक्रम में भविष्य की सार्वजनिक सेवा को एक नए युग के लिए बेहतर तरीके से कैसे तैयार किया जाए इस पर भी चर्चा की जाएगी, जिससे कि 2030 के सतत विकास लक्ष्यों (SDG) तक पहुंचा जा सके।

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