करेंट अफेयर्स: 19 जून 2021

  • utkarsh
  • Jun 19, 2021
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करेंट अफेयर्स: 19 जून 2021

आयुध निर्माणी बोर्ड का किया जाएगा पुनर्गठन

केंद्रीय सरकार ने आयुध निर्माणी बोर्ड (Ordnance Factory Board) को भंग करने के निर्णय को मंजूरी दे दी है तथा इसे 7 नए रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा। जो भारत में 41 आयुध कारखानों की देखरेख करेगा। ये सारी संस्थाएँ 100% सरकार के स्वामित्व में होंगी।

मुख्य बिंदु

  • सरकार ने नीतिगत सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया। सरकार ने लगभग 200 साल पुराने आयुध निर्माण बोर्ड (OFB, Ordnance Factory Board) के पुनर्गठन (Restructuring) के लंबित प्रस्ताव को मंजूरी दी है। 
  • इसके तहत बोर्ड को सात विभिन्न कंपनियों में बदला जाएगा ताकि काम में जवाबदेही बढ़ सके। 
  • बोर्ड अभी हथियार और गोला-बारूद बनाने के 41 कारखाने चलाता है।
  • ओएफबी को रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों की तर्ज पर निगमित करने का निर्णय केंद्रीय मंत्रिमंडल के बैठक में लिया गया। 
  • लगभग दो दशक बाद व्यावसायिकता लाने और इसकी उत्पादकता में वृद्धि करने के लिए सुधार के कदम उठाए गए हैं।
  • केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे ‘ऐतिहासिक निर्णय’ बताते हुए कहा कि संगठन के लगभग 70,000 कर्मचारियों की सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं होगा। 
  • यह निर्णय भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है। 
  • इससे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिलेगी। यह रक्षा उत्पादन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी मदद करेगा।
  • सरकारी स्वामित्व वाली ऑर्डिनेन्स फैक्ट्रियों को आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) नियंत्रित करता है।
  • इन ऑर्डिनेन्स फैक्ट्रियों को अब सात सरकारी स्वामित्व वाली संस्थाओं में बांटा जाएगा। इसके साथ ही आर्डिनेन्स फैक्ट्रियों का अस्तित्व भी अब खत्म हो जाएगा।
  • सात संस्थाओं में से प्रत्येक संस्था किसी भी अन्य रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू) की तरह होगी।
  • उनका उद्देश्य पेशेवर प्रबंधन उत्पाद रेंज, प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और लागत-दक्षता में सुधार के बड़े लक्ष्य के साथ उनका संचालन करना होगा।
  • इन आर्डिनेन्स फैक्ट्रियों में गोला-बारूद, विस्फोटक, वाहन, हथियार, उपकरण, सैन्य सुविधा के सामान, पैराशूट, ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक्स गियर के साथ-साथ सैन्य उत्पादों का निर्माण किया जाएगा।

आयुध निर्माणी बोर्ड (Ordnance Factory Board) के बारे में :

  • यह आयुध कारखानों और संबंधित संस्थानों के लिए एक संपूर्ण निकाय है तथा वर्तमान में रक्षा मंत्रालय (MoD) का एक अधीनस्थ कार्यालय है।
  • पहला भारतीय आयुध कारखाना 1712 ई. में डच कंपनी द्वारा गन पाउडर फैक्ट्री, पश्चिम बंगाल में स्थापित किया गया था।
  • यह 41 कारखानों, 9 प्रशिक्षण संस्थानों, 3 क्षेत्रीय विपणन केंद्रों और 5 क्षेत्रीय सुरक्षा नियंत्रकों का एक समूह है।
  • मुख्यालय: कोलकाता
  • महत्त्व: सशस्त्र बल, अर्द्धसैनिक और पुलिस बलों हेतु हथियार, गोला-बारूद और आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा OFB द्वारा संचालित कारखानों से आता है।

हेब्बल-नागवाड़ा घाटी परियोजना

कर्नाटक के हेब्बल-नागवाड़ा घाटी परियोजना के तहत झील निर्माण के लिए सिंगनायकनहल्ली में 6,000 से अधिक पेड़ों को साफ़ करने के लघु सिंचाई विभाग के प्रस्ताव के खिलाफ नागरिक और पर्यावरणविद् संघर्ष कर रहे हैं। कार्यकर्ता इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों को काटने की आवश्यकता और तर्क पर सवाल उठा रहे हैं।

मुख्य बिंदु:

  • यह परियोजना बेंगलुरु शहर, ग्रामीण और चिकबल्लापुर में 65 टैंकों को भरने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
  • बेंगलुरु झील इस परियोजना से उपचारित जल का प्रयोग करने वाली पहली झील थी।
  • यह परियोजना इस क्षेत्र में अन्य 11 झीलों में पानी की आपूर्ति के लिए एक संरक्षित जलाशय के रूप में कार्य करेगी।
  • पीने के पानी और कृषि उद्देश्यों के लिए उपचारित जल का प्रत्यक्ष उपयोग पर प्रतिबन्ध लगा दिया था लेकिन किसानों का विचार था कि परियोजना जल स्तर को बढ़ा रही है।

हेब्बल झील (Hebbal Lake) के बारे में:

  • यह झील बेल्लारी रोड और आउटर रिंग रोड के जंक्शन के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 7 के किनारे पर बेंगलुरु में स्थित है। 
  • इन झीलों को केम्पे गौड़ा ने 1537 ई. में बनाया था।
  • इसका निर्माण प्राकृतिक घाटी प्रणालियों को नुकसान देकर किया गया था। 
  • यह प्रणाली 75 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसे 143 हेक्टेयर तक विस्तारित करने की योजना है।

भारत ने जारी की श्रीलंका को 100 मिलियन डालर की LoC(Line of Credit)

भारत ने सौर ऊर्जा क्षेत्र में परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए श्रीलंका को 100 मिलियन के अमरीकी डालर की ऋण सहायता (Line of Credit) प्रदान की है।

मुख्य बिंदु: 

  • श्रीलंका सरकार और भारतीय निर्यात-आयात बैंक (Export-Import Bank of India) के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
  •  LoC (Line of Credit) यह भी सुनिश्चित करेगी कि 2030 तक 70% बिजली की जरूरत श्रीलंका में अक्षय ऊर्जा स्रोतों से पूरी हो।
  • यह LoC श्रीलंका में अन्य सौर ऊर्जा परियोजनाओं को भी वित्तपोषित करेगा, जिसकी घोषणा 2018 में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के संस्थापक सम्मेलन के दौरान की गई थी। 
  • इस परियोजना में घरों और सरकारी भवनों के लिए रूफटॉप सोलर फोटो-वोल्टाइक सिस्टम जैसी परियोजना शामिल है।
  • श्रीलंका की अभी स्थापित क्षमता 4,213 मेगावाट बिजली है। इसमें से 1,400 मेगावाट जलविद्युत है, जबकि लगभग 900 मेगावाट कोयले से उत्पादित है। 
  • पिछले पाँच वर्षों में, श्रीलंका ने ऊर्जा के अधिक अक्षय ऊर्जा स्रोतों, विशेष रूप से सौर ऊर्जा का दोहन करने की माँग की है। 
  • लोक उपयोगिता आयोग के अनुसार, देश की बिजली की माँग 2015-2034 से औसतन 5.3% बढ़ने की उम्मीद है।

भारत-श्रीलंका संबंध

भारत 2030 तक अक्षय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करके राष्ट्रीय बिजली आवश्यकताओं का 70% पूरा करने के लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति के दृष्टिकोण पर श्रीलंका के साथ ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला पहला देश बन गया है।

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) के बारे में: 

  • ISA भारत के प्रधानमंत्री और फ्राँस के राष्ट्रपति ने 30 नवंबर, 2015 को फ्राँस की राजधानी पेरिस में आयोजित कोप-21 (COP-21) के दौरान शुरू किया था।
  • ISA का उद्देश्य ISA सदस्य देशों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख चुनौतियों के साथ मिलकर रास्ता निकालना है। 
  • इसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा उत्पाद के लिए आवश्यक निवेश जुटाना, वित्तीय लागत एवं प्रौद्योगिकी लागत को कम करने के लिए आवश्यक संयुक्त प्रयास करना तथा भविष्य की प्रौद्योगिकी के लिए उचित मार्ग तैयार करना है।

भारत में सौर ऊर्जा उत्पादन

भारत में सौर ऊर्जा का उत्पादन मार्च 2014 में 2.6GW से बढ़कर 2021 में 34.6 GW हो गया है। भारत ने इसे और 100 GW तक बढ़ाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सौर मिशन (National Solar Mission) शुरू किया था।

ऊर्जा दक्षता और कम कार्बन की तकनीक पर पैनल का गठन किया जाएगा

बिजली, नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री श्री आर के सिंह ने देश में विभिन्न ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों की प्रगति तथा जलवायु परिवर्तन कार्रवाइयों की तैयारी की समीक्षा किया। इसके साथ ऊर्जा दक्षता और कम कार्बन तकनीक पर पैनल का गठन करने का निर्णय लिया

मुख्य बिंदु:

  • कई ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों के प्रगति की समीक्षा और भारत में जलवायु परिवर्तन कार्रवाइयों के लिए तैयारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान इस पर प्रकाश डाला गया।
  • कार्बनडाइ ऑक्साइड के  उत्सर्जन को कम करने के उद्देश्य से अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता गतिविधियों पर चर्चा की गई।
  • इस पैनल को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME), परिवहन और बिजली संयंत्रों जैसे उच्चतम उत्सर्जन तीव्रता वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया गया है।
  • मिशन दस्तावेज रोशनी के तहत परिभाषित गतिविधियों पर भी चर्चा की गई। मिशन दस्तावेज़ रोशनी को पूरे भारत में कई ऊर्जा संरक्षण योजनाओं को लागू करने के लिए चालु किया गया है।

मिशन रोशनी (Mission ROSHANEE) के बारे में: 

इस मिशन को मिशन उन्नति (Mission UNNATEE) के साथ Bureau of Energy Efficiency द्वारा तैयार किया गया है। दोनों मिशनों ने 2021-2030 की अवधि के लिए क्षेत्रवार कार्य योजना तैयार की है। मिशन रोशनी में अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में कई गतिविधियों की परिकल्पना की गई है। इसका लक्ष्य 2030 तक CO2 उत्सर्जन को 550 मिलियन टन तक कम करना है।

UNNATEE के बारे में:

UNNATEE एक कामकाजी दस्तावेज है जिसमें ऊर्जा की तीव्रता को कम करने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक कार्य योजनाएँ सम्मिलित हैं।

अमेरिका का जूनटीन्थ (Juneteenth) 

जूनटींथ अमरीका का एक बहुत पुराना त्योहार है जो देश में दास प्रथा समाप्त होने के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाईडेन इस वर्ष “जूनटीन्थ” को राष्ट्रीय अवकाश बनाने के लिए एक कानून पर हस्ताक्षर करेंगे।

मुख्य बिंदु

  • “जूनटीन्थ” (Juneteenth) को राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्थापित करने वाले विधेयक को अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में समर्थन मिला है और अब इसे कानून बनने के लिए व्हाइट हाउस द्वारा अनुमोदित करने की जरुरत है।
  • इसे जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या की पृष्ठभूमि में पारित किया गया था जिसने अमेरिका में नस्लवाद विरोधी प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
  • जूनटीन्थ तक़रीबन चार दशकों में बनाया गया पहला नया संघीय अवकाश होने जा रहा है।
  • जूनटीन्थ की शुरुआत 1866 ई. में टेक्सास राज्य से हुई, जिसमें समुदाय-केंद्रित कार्यक्रम जैसे कुकआउट, परेड, प्रार्थना सभा, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक वाचन और संगीत प्रदर्शन शामिल थे।
  • जबकि, “मॉडर्न जुनेटेन्थ मूवमेंट” का युग वर्ष 1994 में लुइसियाना के न्यू ऑरलियन्स से प्रारम्भ हुआ था, जिसका उद्देश्य जूनटीन्थ को अधिक मान्यता देना था।
  • वर्तमान में अमेरिका के 50 राज्यों में से 46 और डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ कोलंबिया, जूनटीन्थ को आधिकारिक तौर पर मनाते हैं लेकिन नागरिक अधिकारों के संगठनों की सालों की पैरवी के बावजूद ये तारीख राष्ट्रीय अवकाश नहीं बन पाई।

जूनटीन्थ क्या है?

  • June + nineteenth = Juneteenth, प्रत्येक वर्ष 19 जून को मनाया जाता है। 
  • ये वो तिथि है जब अमरीका में दास प्रथा का अंत हुआ था। इसे मुक्ति दिवस और स्वतंत्रता दिवस के रूप से भी जाना जाता है।
  • अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने मुक्ति प्रस्तावना जारी की थी जिसने सभी दासों को औपचारिक रूप से दो साल पहले ही मुक्त कर दिया गया था। लेकिन इसे सही होने में समय लगा।
  • यह अमेरिका में गुलामी के अंत का राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाने वाला सबसे पुराना दिवस है।
  • इस दिन को 47 अमेरिकी राज्यों और कोलंबिया जिले में अवकाश के रूप में मान्यता प्राप्त है। जूनटीन्थ को मुक्ति दिवस या जूनटीन्थ स्वतंत्रता दिवस के नाम से भी जाना जाता है।

जापान कोविड-19 वैक्सीन पासपोर्ट जारी करेगा

जापान अगले माह से जापानी यात्रियों के लिए एक वैक्सीन पासपोर्ट उपलब्ध कराने जा रहा है, ताकि विदेश में पर्यटन और व्यापारिक यात्राओं को फिर से प्रारम्भ किया जा सके।

मुख्य बिंदु:

  • यह प्रमाण पत्र डिजिटल के बजाय पेपर बेस्ड होगा।
  • इसे अगले माह से स्थानीय सरकारें जारी करेंगी।
  • इसके साथ ही यूरोपीय संघ भी डिजिटल वैक्सीन पासपोर्ट पर काम कर रहा है ताकि कोरोना के कारण ठप पड़ चुके पर्यटन को फिर से शुरू किया जा सके। 
  • इसके अतिरिक्त कुछ यूरोपीय देश राष्ट्रीय स्तर पर वैक्सीन प्रमाण पत्र जारी करने पर विचार कर रहे हैं।
  • इसमें यह जानकारी शामिल होगी कि क्या किसी व्यक्ति को टीका लगा है या वह संक्रमित था, नकारात्मक परीक्षण किया गया था या ठीक हो गया है।
  • इसके साथ ही अमेरिका भी टीका लगवा चुके अमेरिकियों के लिए विशेष दस्तावेज तैयार करने का विचार कर रहा है जो विदेश यात्रा करना चाहते हैं।
  • लेकिन फ्लोरिडा, टेक्सास जैसे अमेरिकी राज्यों द्वारा इसका विरोध करने के बाद इस विचार को खारिज कर दिया गया। इन राज्यों ने ऐसे दस्तावेज को नागरिकों के मूल अधिकारों का उल्लंघन बताया था।
  • जापान में टीकाकरण अभियान तुलनात्मक रूप से धीरे शुरू हुआ था लेकिन हाल ही के दिनों में इसमें तेजी आई है। 
  • जापान में अब तक केवल 6 प्रतिशत लोगों को पूरी तरह से टीका लगाया गया है। जापान ने अपने यहां विदेशी नागरिकों की आवाजाही पर पाबंदी लगा रखी है, हालांकि ओलंपिक खेलों की वजह से कोरोना के नियमों में ढील दी जाएगी। 
  • जापान में 23 जुलाई से टोक्यो में ओलंपिक खेलों की शुरुआत होगी।

वैक्सीन पासपोर्ट के बारे में:

  • वैक्सीन पासपोर्ट, जिसे इम्युनिटी पासपोर्ट या इम्युनिटी प्रमाण पत्र के रूप में भी जाना जाता है।
  • कागज के साथ-साथ यह डिजिटल प्रारूप में एक दस्तावेज है। 
  • यह प्रमाणपत्र प्रमाणित करता है कि व्यक्ति किसी छूत की बीमारी से प्रतिरक्षित है या नहीं। यह क्लिनिक के मेडिकल रिकॉर्ड द्वारा सत्यापित टीकाकरण रिकॉर्ड या टीकाकरण प्रमाण पत्र से अलग है। 
  • वैक्सीन पासपोर्ट के सने COVID-19 महामारी के दौरान महामारी को रोकने और तेजी से आर्थिक सुधार की अनुमति के लिए पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है।

Stygarctus keralensis: केरल के नाम पर किया गया टार्डीग्रेड की प्रजाति का नामकरण 

केरल में “स्टाइगारक्टस केरलेंसिस” (Stygarctus Keralensis) नाम के टार्डीग्रेड्स की एक नई प्रजाति की पहचान की गई है। इस छोटी प्रजाति का नाम केरल के नाम पर रखा गया है।

टार्डिग्रेड्स (Tardigrades) के बारे में: 

  • टार्डीग्रेड (Tardigrade), जल में रहने वाला आठ-टाँगों वाला एक सूक्ष्मप्राणी है जिन्हें आमतौर पर ‘वाटर बियर’ (water bears) और ‘मॉस पिगलेट’ (moss piglets) भी कहा जाता है। 
  • वे इतने छोटे हैं कि उनका अध्ययन करने के लिए अत्याधुनिक सूक्ष्मदर्शी की जरूरत होती है।
  •  टार्डीग्रेड पृथ्वी पर पहाड़ से लेकर गहरे महासागरों तक और वर्षावनों से लेकर अंटार्कटिका तक लगभग हर जगह रहते हैं।
  • वे अपने आकार के बावजूद पृथ्वी पर सबसे कठोर जानवर भी हैं। 
  • इनकी पहली बार 1773 ई. में जर्मन प्राणी विज्ञानी जोहान अगस्त एप्रैम गोएज़ (Johann August Ephraim Goeze) ने वर्णित किया था। उन्होंने इन प्रजातियों को क्लेनर वासरबार (Kleiner Wasserbar) कहा था।
  • टार्डीग्रेड पृथ्वी का सबसे प्रत्यास्थी ( हर तरह की परिस्थितियाँ झेल सकने वाला) प्राणी है।
  • मनुष्यों की तुलना में यह सैंकड़ों गुना अधिक विकिरण (रेडियेशन) में जीवित रह सकते हैं और अंतरिक्ष के व्योम में भी कुछ काल तक ज़िन्दा रहते हैं।
  • टार्डीग्रेड 30 वर्षों से अधिक बिना कुछ खाए-पिए रह सकते हैं और धीरे-धीरे लगभग पूरी शारीरिक क्रियाएँ रोक लेते हैं और उनमें सूखकर केवल 3% जल की मात्रा रह जाती है।

स्टाइगारक्टस केरलेंसिस (Stygarctus keralensis) के बारे में:

  • यह नई टार्डीग्रेड की प्रजाति जीनस स्टाइगारक्टस से संबंधित है। 
  • वे भारतीय जल की पहली टैक्सोनॉमिक रूप से वर्णित समुद्री टार्डिग्रेड हैं। 
  • Stygarctus keralensis की खोज उत्तरी केरल के वडकारा में हुई थी। यह जीनस स्टाइगारक्टस के तहत नामित आठवीं प्रजाति है। ये 130 माइक्रोमीटर (0.13 मिमी.) की लंबाई तक बढ़ते हैं।

स्टाइगारक्टस (Stygarctus) के बारे में: 

Stygarctus परिवार Stygarctidae के tardigrades की एक प्रजाति है। इनका नाम वर्ष 1951 में एरिच शुल्ज (Erich Schulz) के द्वारा रखा गया था।

World Sauntering Day

विश्व सौहाद्र दिवस 19 जून को हर साल मनाया जाता है ताकि लोगों को बताया जा सके की धीमे-धीमे जीवन में चले और धीरे-धीरे जीवन का आनंद लें।

मुख्य बिंदु:

  • इस दिन को मनाने का उद्देश्य इस रोजमर्रा की फास्ट लाइफ में थोड़ा समय प्रकृति के लिए निकालने के लिए है।
  • यह दिन अपने लिए समय निकालने और जीवन कितना सुन्दर है इसकी महत्ता को पहचानने का दिन है।
  • सौंटरिंग चलने के स्टाइल ‘बस धीरे धीरे चलना’  कहा जाता है। इसे ‘हर्षित स्वभाव से चलना’ को भी कहा जाता है। 
  • इस शब्द का प्रयोग कई फेमस नॉवेलिस्ट ने प्रयोग किया है जैसे हेनरी डेविड थोरो और जॉन बोरॉघस। 
  • इस दिवस को 1979 में डब्लू. टी. राबे द्वारा बनाया गया था तथा इस दिन कई देशों में छुट्टियाँ भी मनायी जाती हैं।
  • इस दिन को जॉगिंग के बढ़ते प्रचलन से शुरू किया गया था।
  • ऐसा कहा जाता है कि इस दिन की शुरुआत मैकिनै के ग्रैंड होटल मिशिगन से शुरुआत हुई थी। 
  • इस दिन को अपने दिनचर्या को धीमी करने और अपनी जिंदगी को खुल के जीने के लिए मनाया जाता है।

सरकार ने खाद्य तेल के आयात पर टैरिफ़ घटाया

भारत सरकार ने तमाम खाद्य तेलों के लिए आयात शुल्क में 112 डॉलर प्रति टन तक की कमी कर दी है। इसमें पाम ऑइल को भी शामिल किया गया है। इस बारे में  विशेषज्ञों का यह कहना है कि इससे घरेलू बाजार में खाद्य तेल की कीमतों में काफ़ी कमी आ सकती है।

मुख्य बिंदु

● केंद्रीय  अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड  (सी बी आई सी) के द्वारा कच्चे पाम ऑइल के आयात शुल्क में 86 डॉलर प्रति टन की  कमी कर दी गई है।

● कच्चे सोयाबीन तेल के आधार आयात मूल्य मेें 37 डॉलर प्रति टन की कमी की गई है।

● खाद्य तेल के टैरिफ मूल्य में परिवर्तन 17 जून, 2021 से प्रभावी हो गया है।

भारत में खाद्य तेलों के आयात की स्थिति :

● भारत एक साल में औसतन 8.5 से 10 अरब डॉलर का खाद्य तेल आयात करता है।

● खाद्य तेल भारत का तीसरा सबसे अधिक आयात किया जाने वाला आइटम है। सबसे ज्यादा आयात किए जाने वाले आइटम में पहले नंबर पर क्रूड ऑयल और दूसरे नंबर पर गोल्ड आता है।

● देश में खाद्य तेलों की कुल मांग के दो तिहाई भाग को आयात से पूरा किया जाता है।

● नवंबर 2020 से लेकर मई 2021 तक कुल खाद्य और खाद्य तेलों का आयात पहले की तुलना में 9 परसेंट बढ़ गया है और अब यह आयात 76,77,998 टन हो गया है।

● पिछले साल का कुल खाद्य तेल आयात 70,61,749 था।

● खाद्य तेल का वर्ष एक नवंबर से 31 अक्टूबर तक चलता है।

● इस साल सोया ऑयल फ्यूचर्स मे 70 परसेंट की तेजी आई है।

● एक साल में पाम ऑयल की कीमतें बढ़कर दोगुनी से भी ज्यादा हो गई हैं। 

● पिछले साल पाम ऑयल की कीमतों में 18 परसेंट की तेजी आई थी।

● दो दशक में पाम ऑयल का आयात 40 लाख टन से बढ़कर 1.5 करोड़ टन तक पहुँच गया है।

खाद्य तेलों के दामों में निम्न अनुसार 20 पर्सेन्ट तक कमी होगी :

पाम ऑइल – 

पुरानी कीमत – 142 रुपये

नई कीमत     – 115 रुपये

कमी            – 19%

सूरजमुखी – 

पुरानी कीमत  – 188 रुपये

नई कीमत     – 157 रुपये

कमी             – 16%

सोया – 

पुरानी कीमत  – 162 रुपये

नई कीमत     – 138 रुपये

कमी             – 15%

सरसों     – 

पुरानी कीमत  – 175 रुपये

नई कीमत      – 157 रुपये

कमी             – 10%

मूँगफली  – 

पुरानी कीमत  – 190 रुपये

नई कीमत      – 174 रुपये

कमी             – 8%

वनस्पति – 

पुरानी कीमत  – 154 रुपये

नई कीमत      – 141 रुपये

कमी             – 8%

विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस – 19 जून

विश्व सिकल सेल दिवस हर साल 19 जून को  सिकल रोग और उसके उपचार के उपायों के बारे में पूरे विश्व में जागरूकता फैलाने के लिए और दुनिया भर में इस पर प्रभावी नियंत्रण पाने के लिए मनाया जाता है। 

मुख्य बिंदु

● वर्ष 2021 के लिए विश्व सिकल सेल दिवस की थीम ” शाइन द लाइट ऑन सिकल सेल ” रखी गई है। 

●  यह 24 घंटे का अभियान ‘ सिनर्जी ‘ द्वारा सिकल सेल डिजीज एसोसिएशन ऑफ अमेरिका, कार्पोरेशन (एस सी डी ए ए) के सहयोग से आयोजित किया जाएगा। 

●  सिकल सेल डिजीज एसोसिएशन ऑफ इल्लीनोएस (एस सी डी ए आई) का नारा है – “लेट्स बोल ऑन वर्ल्ड सिकल सेल डे”।

●  पीडमोंट हेल्थ सर्विसेस और सिकल सेल एजेंसी का नारा है – “रोड मैप टू सिकल सेल ट्रांज़ीशन”। 

●  सिकल सेल फाउंडेशन ऑफ मिनेसोटा का नारा है – “वर्ल्ड सिकल सेल डे सेल्फी चैलेंज”।

●  मार्टिन सेंटर सिकल सेल  इनीशिएटिव का नारा है – “ट्वेंटी फिफ्थ एनुअल सिकल सेल 5 के वॉक / वर्चुअल रन एडिशन”।

●  सिकल सेल डिजीज ऑफ अमेरिका, मिशिगन चैप्टर का नारा है – “सिकल स्ट्रांग सिकल सेल एंपावरमेंट सर्किल “

सिकल सेल रोग (एस सी डी) की सही और विस्तृत जानकारी :

●  सिकल सेल रोग (एस सी डी) लाल रक्त कोशिकाओं से जुड़ा एक वंशानुगत विकार है  जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं का आकार अर्धचंद्र के आकार (सिकल) का हो जाता है।

●  इस तरह के असामान्य आकार वाली लाल रक्त कोशिकाएँ चिपचिपी और कठोर होकर रक्त वाहिकाओं में फ़ंस जाती हैं जिसके कारण हमारे शरीर के कई भागों में रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है और कभी कभी रुक भी जाता है।

●  लाल रक्त कोशिकाओं का असामान्य आकार उनके जीवन काल को कम कर देता है और जिसके कारण शरीर में खून की कमी हो जाती है जिसे सिकल सेल एनीमिया कहा जाता है। 

●  दुनिया की लगभग 5% आबादी सिकल सेल रोग से प्रभावित है।

●  दुनिया में हर साल तीन लाख से ज्यादा बच्चे जन्म से ही सिकल सेल रोग से ग्रसित होते हैं और उनमें गंभीर हिमोग्लोबिन विकार पाया जाता है।

●  यह रोग अफ्रीकन अमेरिकन लोगों में ज्यादा सामान्य रूप से पाया जाता है। इन के प्रति 365 बच्चों में से 1 बच्चा जन्म से ही सिकल सेल रोग से प्रभावित होता है।

●  सिकल सेल रोग से प्रभावित बच्चों में श्वास लेने में समस्या सामान्य रूप से पाई जाती है।

भारत में सिकल सेल रोग का प्रभाव:

●  भारत में मुख्य रूप से यह रोग महाराष्ट्र, पूर्वी गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तरी तमिलनाडु, पश्चिमी ओडिशा और केरल में नीलगिरी पहाड़ी क्षेत्रों में व्याप्त है।

●  ओडिशा के आदिवासी समुदायों में सिकल सेल रोग ज्यादा पाया जाता है इसलिए ओडिशा सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अतंर्गत संबलपुर जिले के बुरला में “वीर सुरेंद्र साईं इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड रिसर्च” के परिसर में पहला सिकल सेल संस्थान स्थापित किया गया है।‌

●  इस संस्थान ने पश्चिमी ओडिशा के 12 जिलों में सिकल सेल इकाइयाँ भी स्थापित की हैं।

● भारत में एक करोड़ 13 लाख 83 हजार 664 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें से लगभग 9 लाख 96 हजार 368 लोगों में यह  रोग परिलक्षित हुआ और 9 लाख 49 हजार 57 लोगों में लक्षण पाए गए और 47 हजार 311 लोगों में सिकल सेल रोग की पुष्टि की गई। 

●  सिकल सेल रोग भारतीय जनजाति समूह में ज्यादा पाया जाता है। इनमें प्रत्येक 86 बच्चों में से एक बच्चे में यह बीमारी पाई जाती है।

विश्व सिकल सेल दिवस की भूमिका :

●  22 दिसंबर, 2008 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा की गई थी कि हर साल 19 जून को विश्व सिकल सेल दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

● साल 2009 में पहला विश्व सिकलसेल दिवस मनाया गया था। 

● 10 जनवरी, 2020 को एम्स्टर्डम, नीदरलैंड में ग्लोबल अलायंस ऑफ सिकल सेल डिजीज आर्गेनाईज़ेशन की स्थापना की गई थी। 

● सिकल सेल रोग से पीड़ित लोगों का प्रतिनिधित्व करने के लिए दुनिया भर में यह पहली इकाई है। 

रोकथाम एवं प्रबंधन के लिए भारत सरकार के प्रयास :

1.राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम – इस कार्यक्रम का उद्देश्य जन्म से लेकर 18 वर्ष की आयु तक के बच्चों में चार प्रकार की बीमारियों, जैसे कि बाल अवस्था की बीमारियाँ, जन्म दोष कमियाँ, विकासात्मक विलंब और अशक्तता। इनकी शीघ्र पहचान और जरूरी कार्रवाई के अलावा सिकल सेल एनीमिया का उपचार करना भी है। 

2. सभी रक्त बैंकों के लिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के अनुसार, यह अनिवार्य किया गया है कि जिन रोगियों को सिकल सेल रोग, थैलेसीमिया, एनीमिया और हीमोफीलिया जैसे रोग हैं, उनको जीवन रक्षक उपायों के रूप मेें निशुल्क रक्त / रक्त घटक उपलब्ध कराएं। 


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