भारत सरकार ने देश में बिजली वितरण उपयोगिताओं की व्यवहार्यता से संबंधित मुद्दों के समाधान के लिए मंत्रियों का एक समूह स्थापित किया है। मंत्री समूह की पहली बैठक हाल ही में वर्चुअली आयोजित की गई थी। बैठक में केंद्र सरकार, सदस्य राज्यों के ऊर्जा मंत्री और केंद्र व राज्य सरकार के अधिकारी शामिल हुए। इस बैठक में पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारी भी शामिल हुए।
मंत्री समूह के अध्यक्ष
केंद्रीय ऊर्जा और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री, श्रीपाद येसो नाइक, मंत्री समूह के अध्यक्ष हैं।
मंत्री समूह के सदस्य राज्य
- केंद्र सरकार के अलावा, मंत्रियों के समूह में पांच प्रमुख राज्यों-उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री शामिल हैं।
- उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविन्द कुमार शर्मा मंत्री समूह के संयोजक हैं।
मंत्री समूह के कार्य
मंत्रियों का समूह निम्नलिखित मुद्दों पर विश्लेषण करेगा और सरकार को सिफारिशें देगा।
- भारत के प्रमुख राज्यों में विद्युत वितरण बोर्डों के ऋण का विश्लेषण करना ।
- उन मापदंडों की पहचान और निगरानी करना ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बिजली वितरण उपयोगिताओं द्वारा उधार लेना उत्पादक हो।
- उन राज्यों की पहचान करना जिन्हें तरलता समर्थन की तत्काल आवश्यकता है और उन्हें ऋण जाल से बचने में सक्षम बनाने के लिए एक राजकोषीय अनुशासन कार्यक्रम तैयार करना ।
- समग्र सुधार पर लक्षित पूंजीगत व्यय से संबंधित निवेश योजनाओं के लिए दिशानिर्देशों की सिफारिश करना।
- निजी प्रतिभागियों से और अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए बिजली वितरण क्षेत्र के समग्र स्वास्थ्य में सुधार के उपाय सुझाना।
विद्युत वितरण उपयोगिताओं को घाटा का कारण
बिजली वितरण उपयोगिताओं को बिजली वितरण के दौरान नुकसान उठाना पड़ता है। बिजली वितरण से तात्पर्य उस बिजली से है जो अंतिम उपभोक्ता (घर/दुकान/कारखाने) को आपूर्ति की जाती है। इसमें बिजली के प्रसारण के दौरान होने वाले नुकसान को शामिल नहीं किया जाता है।
घाटे के कुछ मुख्य कारण हैं:
- बिजली चोरी
- पुरानी प्रौद्योगिकी-आधारित मीटरों के उपयोग के कारण मीटरिंग में अशुद्धियाँ।
- कृषि क्षेत्रों को मुफ्त या अत्यधिक रियायती मूल्य पर बिजली की आपूर्ति
- दोषपूर्ण बिलिंग।