करेंट अफेयर्स: 22 जून 2021

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करेंट अफेयर्स: 22 जून 2021

जनजातीय कार्य मंत्रालय और NCERT ने निष्ठा (NISHTHA) के लिए भागीदारी की

जनजातीय कार्य मंत्रालय और NCERT (National Council of Educational Research and Training) ने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) में अकादमिक उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए निष्ठा (NISHTHA) मिशन पर सहयोग किया।

मुख्य बिंदु:

  • हाल ही में, जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने एकलव्य स्कूल (EMRS) के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के लिए NISHTHA क्षमता निर्माण कार्यक्रम के लिए एक संयुक्त मिशन पर सहयोग किया। 
  • इस कार्यक्रम के तहत, 3 राज्यों (हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़) के 120 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों ने कार्यक्रम के पहले बैच में हिस्सा लिया।
  • इस कार्यक्रम का मुख्य लाभ है कि शिक्षकों को प्रशिक्षण देना जो समावेशी कक्षा वातावरण बनाने में सहायता करेगा जिससे छात्रों के सीखने के परिणामों में सुधार किया जा सकेगा।
  • इसके अलावा, प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को प्रथम स्तर के परामर्शदाताओं के रूप में छात्रों की सामाजिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं के प्रति अधिक सतर्क और उत्तरदायी बनने की सुविधा प्रदान करता है।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम का एक अन्य उद्देश्य यह है कि यह शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों को स्कूली शिक्षा में सभी नई पहलों के बारे में जागरूक करता है। 
  • इसके अलावा, प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षा के विभिन्न पहलुओं जैसे कला-एकीकृत शिक्षा, लिंग समानता, स्कूलों की कोविड प्रतिक्रिया, पॉक्सो अधिनियम, विज्ञान की शिक्षाशास्त्र जैसे 18 समग्र और व्यापक मॉड्यूल शामिल है।

NISHTHA के बारे में:

  • केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने साल 2019 में प्राथमिक स्तर पर शिक्षा को सशक्त बनाने के लिये एक राष्ट्रीय मिशन ‘नेशनल इनीसिएटिव फॉर स्कूल हेड्स एंड टीचर्स होलीस्टिक एडवांसमेंट’ अर्थात् निष्ठा (National Initiative for School Heads and Teachers Holistic Advancement-NISHTHA) पहल शुरू की थी।
  • यह NCERT का एक राष्ट्रीय फ्लैगशिप कार्यक्रम है।
  • यह एक क्षमता निर्माण कार्यक्रम है जिसे शिक्षकों और स्कूल के प्रधानाचार्यों के बीच दक्षताओं के निर्माण के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया था।
  • यह एकीकृत शिक्षक प्रशिक्षण (Integrated Teacher Training) के माध्यम से स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने हेतु प्रयासरत है।
  • यह कार्यक्रम भारत में 350 कार्यात्मक EMRS स्कूलों में आयोजित किया जाएगा।

एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) के बारे में:

  • एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) आदिवासी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार की एक पहल है जो दूरस्थ क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों को कक्षा 6 से 12 तक गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा प्रदान करता है। 
  • यह पहल छात्रों को शिक्षा में अवसरों का उपयोग करने में सक्षम बनाती है। 
  • एकलव्य विद्यालय न केवल अकादमिक शिक्षा पर बल्कि छात्रों के समग्र विकास और विभिन्न क्षेत्रों में व्यावसायिक शिक्षा और रोजगार के लिए तैयार होने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। 
  • किसी भी उप-जिलों में जहाँ अनुसूचित जनजाति ST की आबादी का घनत्व (90% या अधिक) है, बिना किसी आवासीय सुविधा के एकलव्य मॉडल डे बोर्डिंग स्कूल (ईएमडीबीएस) स्थापित करने का प्रस्ताव है।

सामाजिक न्याय मंत्रालय ने ‘दिव्यांग खेल केंद्र’ (Divyangta Khel Kendras) की नींव रखी

केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने देश के दिव्यांगजनों में खेलों के प्रति रुचि और पैरालंपिक में उनके अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए मंत्रालय ने देश के विभिन्न हिस्सों में पांच ‘दिव्यांगता खेल केंद्र’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। इनमें से एक केंद्र गुजरात के अहमदाबाद शहर में खोला जाएगा।

मुख्य बिंदु:

  • यह घोषणा उन्होंने गुजरात में ‘सामाजिक अधिकारिता शिविर’ को वर्चुअली संबोधित करते हुए किया था।
  • सामाजिक अधिकारिता शिविर- इस शिविर का आयोजन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ADIP योजना (Scheme of Assistance to Disabled Persons) के तहत ‘दिव्यांगजनों’ को मदद और सहायक उपकरणों के वितरण के लिए किया गया था। 
  • यह ALIMCO और जिला प्रशासन जामनगर के मदद से विकलांग व्यक्तियों के अधिकारिता विभाग (DEPwD) ने आयोजित किया था। 
  • राज्य में 3805 दिव्यांगजनों को कुल मिलाकर 3.57 करोड़ रुपये की कुल 6225 की वित्तीय सहायता और सहायक उपकरण नि:शुल्क वितरित किए जाएंगे। 
  • ALIMCO ने जामनगर संसदीय क्षेत्र में (Scheme of Assistance to Disabled Persons – ADIP) योजना के तहत दिव्यांग लाभार्थियों की पहचान के लिए मूल्यांकन शिविर आयोजित किए थे।

दिव्यांगजनों को सहायता योजना (Scheme of Assistance to Disabled Persons – ADIP) के बारे में:

  • यह योजना 1981 में जरूरतमंद दिव्यांग व्यक्तियों को टिकाऊ, परिष्कृत और वैज्ञानिक रूप से निर्मित, आधुनिक सहायता (modern aids) और उपकरणों की खरीद में सहायता करने के उद्देश्य से प्रारम्भ की गई थी। 
  • यह योजना दिव्यंगों के प्रभाव को कम करके और उनकी आर्थिक क्षमता को बढ़ाकर उनके शारीरिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पुनर्वास को बढ़ावा देने में सहायता करती है। 
  • इस योजना के तहत दिव्यांगजनों को उनके स्वतंत्र कामकाज में सुधार लाने के उद्देश्य से सहायक उपकरण वितरित किए जाते हैं।

भारत ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर हरित हाइड्रोजन पहल पर शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा

भारत ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर 22 जून 2021 को ग्रीन हाइड्रोजन पर दो दिवसीय शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह प्रतिष्ठित कार्यक्रम अपनी ग्रीन हाइड्रोजन से सम्बंधित पहलों एवं विचारों को साझा करने के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करता है।

मुख्य बिंदु:

  • इस कार्यक्रम का संचालन भारत के सबसे बड़े बिजली उत्पादक और वैश्विक ऊर्जा कंपनियों में से एक विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत महारत्न सीपीएसयू एनटीपीसी लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। 
  • वर्चुअल शिखर सम्मेलन ब्रिक्स देशों के सर्वश्रेष्ठ विचारों, नीति निर्माताओं और प्रमुख हितधारकों को ऊर्जा मिश्रण में हाइड्रोजन के भविष्य पर विचार-विमर्श तथा चर्चा करने के लिए अवसर प्रदान कराएगा।
  • इस शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के सर्वश्रेष्ठ नीति निर्माता और प्रमुख हितधारक ऊर्जा मिश्रण में हाइड्रोजन के विषय पर विचार-विमर्श और चर्चा करेंगे।
  • यह शिखर सम्मेलन समग्र ऊर्जा नीति ढांचे में हाइड्रोजन को एकीकृत करने वाले विचारों पर चर्चा को मंच प्रदान करेगा।
  • वर्तमान में, विश्व में तेजी से समूची ऊर्जा प्रणाली को कॉर्बन मुक्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसमें हाइड्रोजन महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। 
  • जब हाइड्रोजन का उत्पादन नवीनीकरण ऊर्जा का इस्तेमाल कर इलेक्ट्रोलिसिस के जरिये किया जाता है, तो इसे हरित हाइड्रोजन कहा जाता है। इसमें कार्बन नहीं होता।
  • ग्रीन हाइड्रोजन को कई जगह उपयोग में लाया जाता हैं। अमोनिया और मेथनॉल जैसे हरित रसायनों का उपयोग सीधे मौजूदा आवश्यकताओं जैसे उर्वरक, गतिशीलता, बिजली, रसायन, शिपिंग आदि में किया जा सकता है।

हाइड्रोजन के विभिन्न प्रकार:

  • हाइड्रोजन जो जीवाश्म ईंधन से विकसित होता है उसे ग्रे हाइड्रोजन (grey hydrogen) कहा जाता है।
  • जो हाइड्रोजन कार्बन कैप्चर और भंडारण विकल्पों के साथ जीवाश्म ईंधन से उत्पन्न होता है उसे नीला हाइड्रोजन (blue hydrogen) कहा जाता है।
  • दूसरी ओर, ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) पूरी तरह से अक्षय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त किया जाता है।

ग्रीन हाइड्रोजन के लाभ:

  • ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग से शून्य उत्सर्जन होता है इसलिए यह पर्यावरण के अनुकूल है।
  • यह एक स्वच्छ जलने वाला पदार्थ है जो लोहा और इस्पात, रसायन और परिवहन जैसे क्षेत्रों को डीकार्बोनाइज कर सकता है। 
  • ग्रीन हाइड्रोजन स्वच्छ विद्युत गतिशीलता की ओर परिवर्तन में भी मदद करेगा और ऊर्जा भंडारण के लिए खनिजों और दुर्लभ-पृथ्वी तत्व-आधारित बैटरी पर निर्भरता को कम करने में सहायता करेगा।

कर्नाटक ने तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण के लिए अधिसूचना जारी किया

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कर्नाटक तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (Karnataka Coastal Zone Management Authority) के गठन के बारे में अधिसूचित किया है। इसे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के आधार पर अधिसूचना जारी की गई है।

मुख्य बिंदु:

  • कर्नाटक तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण एक 15 सदस्यीय निकाय है जिसका गठन तटीय पर्यावरण की गुणवत्ता की रक्षा और तटीय पर्यावरण के सुधार के लिए किया जाएगा।
  • इसका मुख्य कार्य कर्नाटक के तटीय विनियमन क्षेत्र में पर्यावरण प्रदूषण को कम करना, रोकना और नियंत्रित करना है।
  • इसकी अध्यक्षता अतिरिक्त मुख्य सचिव, राज्य वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण विभाग, कर्नाटक करेंगे।
  • वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल तीन साल का होगा।

प्राधिकरण के कार्य:

  • यह प्राधिकरण परियोजना प्रस्ताव के अनुमोदन के लिए प्राप्त आवेदनों की जांच करेगा, जो अनुमोदित तटीय क्षेत्र प्रबंधन योजना के अनुसार होना चाहिए।
  • यह 2011 की अधिसूचना में निर्दिष्ट तटीय विनियमन क्षेत्र (Coastal Regulation Zone-CRZ) में सभी विकासात्मक गतिविधियों को भी विनियमित करेगा।
  • यह प्राधिकरण, अधिसूचना के प्रावधानों को लागू करने और निगरानी के लिए जिम्मेदार है।
  • यह तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) क्षेत्रों के वर्गीकरण में परिवर्तन या संशोधन के लिए कर्नाटक सरकार से प्राप्त प्रस्तावों की जांच करेगा।
  • यह नियमों के प्रावधानों के उल्लंघन के मामलों की जांच करेगा और अधिनियम या नियमों के प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की समीक्षा करेगा।
  • यह स्वत: संज्ञान लेकर अधिसूचना के उल्लंघन के मामलों की जांच व् समीक्षा करेगा।
  • इस अधिनियम की धारा 19 के तहत शिकायत दर्ज करने के लिए इस प्राधिकरण को अधिकार दिया गया है।

ईरान के राष्ट्रपति बने इब्राहिम रायसी (Ebrahim Raisi)

ईरान में राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में कट्टरपंथी उम्मीदवार और न्यायपालिका के प्रमुख इब्राहिम रायसी ने जीत हासिल की। रायसी राष्ट्रपति के रूप में हसन रूहानी की जगह लेंगे। वे अभी वर्तमान में ईरान के मुख्य न्यायाधीश हैं।

मुख्य बिंदु:

  • इस बार राष्ट्रपति पद के चुनाव में ईरान के इतिहास में इस बार सबसे कम मतदान हुआ है। 
  • आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, रायसी ने एक करोड़ 79 लाख मत हासिल किए हैं।
  • 24 लाख वोट के साथ चुनावी दौड़ में वे एकमात्र उदारवादी उम्मीदवार अब्दुलनासिर हिम्माती बहुत पीछे छोड़ गए।
  • उनकी जीत पर भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी उनको बधाई दी।
  • सत्ता परिवर्तन होते ही राईसी की नई सरकार ने पहले ही दिन बड़े कूटनीतिक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सऊदी अरब के साथ पांच साल तक राजनयिक संबंध तोड़ने के बाद अपने राजदूत को फिर से रियाद भेजने की घोषणा कर दी है। हालांकि, सऊदी ने अभी तक इसके लिए औपचारिक मंजूरी नहीं दी है।
  • रायसी की जीत की आधिकारिक घोषणा के बाद वह पहले ऐसे ईरानी राष्ट्रपति हैं, जिन पर पदभार संभालने से पहले ही अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध उनपर 1988 में राजनीतिक कैदियों की सामूहिक हत्या के कारण लगाया गया था।

इब्राहिम रायसी (Ebrahim Raisi) के बारे में:

  • इब्राहिम रायसी का जन्म 14 दिसम्बर, 1960 को ईरान के मशाद में हुआ था। 
  • उन्होंने 22 अगस्त, 1994 से 9 अगस्त, 2004 तक जनरल इंस्पेक्शन ऑफिस के चेयरमैन के रूप में कार्य किया। 
  •  27 जुलाई, 2004 से लेकर 23 अगस्त, 2014 तक वे ईरान के पहले उप-मुख्य न्यायधीश रहे। 
  • इसके बाद 23 अगस्त, 2014 से लेकर 1 अप्रैल, 2016 तक वे ईरान के प्रासीक्यूटर जनरल रहे। 
  • 7 मार्च, 2019 से लेकर वे वर्तमान में ईरान के मुख्य न्यायधीश के रूप में कार्य कर रहे हैं।

ईरान के बारे में:

  • ईरान एक इस्लामिक देश है, यह पश्चिम एशिया में स्थित है। इसका का क्षेत्रफल 16,48,195 वर्ग किलोमीटर है। 
  • ईरान की सीमायें अर्मेनिया, अज़रबैजान, तुर्कमेनिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, तुर्की और इराक से लगती हैं। 
  • ईरान की जनसँख्या लगभग 83 मिलियन है, इसमें लगभग 89% लोग शिया मुस्लिम हैं। 
  • ईरान की राजधानी तेहरान में है और इसकी मुद्रा ईरानी रियाल है।

ओलंपिक के लिए जाने वाले एथलीटों को तैयारियों के लिए 10 करोड़ रुपये की दान करेगा BCCI

जापान के टोक्यो में 23 जुलाई से 8 अगस्त के बीच ओलंपिक खेलों का आयोजन होने जा रहा है। ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने जा रहे भारतीय दल की मदद के लिए विश्व की सबसे अमीर क्रिकेट संस्था बीसीसीआई आगे आई है।

मुख्य बिंदु:

  • भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने टोक्यो ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाले भारतीय एथलीटों की सहायता करने के लिए भारतीय ओलंपिक संघ को 10 करोड़ रुपये देने का एलान किया है।
  • बीसीसीआई से मिली इस राशि से भारतीय दल की कई तरीकों से सहायता होगी जिसमें ट्रेनिंग और तैयारियां शामिल हैं। 
  • युवा मामले और खेल मंत्रालय से अनुरोध प्राप्त होने के बाद, बीसीसीआई ने एक आपात बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी।
  • शीर्ष परिषद ने ओलंपिक की अगुवाई में प्रचार अभियान के लिए 2.5 करोड़ रुपये नकद और अधिकतम 7.5 करोड़ रुपये जारी करने का फैसला किया है।
  • बीसीसीआई ने कहा है कि वह ओलंपिक खेलों के विकास में पूरी सहायता करने के लिए तैयार है।

BCCI के बारे में:

  • भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) भारत में क्रिकेट के लिए गठित एक राष्ट्रीय शासकिय निकाय है। 
  • इसका तमिलनाडु सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत एक सोसाइटी के रूप में दिसंबर 1928 में गठन किया गया था। 
  • यह राज्य के क्रिकेट संघों का एक संघ है। 
  • राज्य संघों के प्रतिनिधि बीसीसीआई के अधिकारियों का चुनाव करते है।

अदाणी पावर सिंगरौली में 1,200 मेगावाट की एस्सार पॉवर्स की महान परियोजना का अधिग्रहण करेगी

निजी क्षेत्र में भारत की सबसे बड़ी ऊर्जा उत्पादन करने वाली अदानी पावर 2900 करोड़ रुपये में एस्सार पावर के 1200 मेगावाट के ‘महान प्रोजेक्ट’ का अधिग्रहण करेगी।

मुख्य बिंदु:

  • अडानी पावर, ऋण शोधन समाधान प्रक्रिया से गुजर रही एस्सार पावर एमपी लि. की मध्य प्रदेश में 1,200 मेगावाट की महान तापीय बिजली परियोजना के अधिग्रहण के लिए सामने आयी है।
  • अडानी पावर की बोली को कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) ने सहमति दे दी है। 
  • अब इस परियोजना के अधिग्रहण के लिये राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की मंजूरी ली जाएगी।
  • एस्सार पॉवर (74 फीसदी और आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (तत्कालीन एस्सार स्टील इंडिया 26 फीयदी ) द्वारा प्रवर्तित एस्सार पॉवर को पिछले साल सितंबर में दिवालियापन के लिए जमा कराया गया था। 
  • आईसीआईसीआई बैंक ने मार्च 2020 तक 1,923 करोड़ रुपए के डिफॉल्‍ट पर फर्म को दिवालियापन न्यायाधिकरण में खींच लिया था।

अडानी पावर के बारे में:

  • अडानी पॉवर, अदानी समूह का हिस्सा है, जो भारत में सबसे बड़ा निजी ताप विद्युत उत्पादक कंपनी है। 
  • कंपनी के आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इसके पास गुजरात में 40 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में छह बिजली संयंत्रों में फैले 12,410 मेगावाट की एक स्थापित थर्मल पावर क्षमता है।
  • इसके साथ ही 7,000 मेगावाट से अधिक क्षमता के बिजली उत्पादन संयंत्र बनाने की प्रक्रिया में हैं।

World Test Championship (WTC Final): जेमिसन ने तोड़ा 8 दशक पुराना रिकॉर्ड

वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) के फाइनल में भारत के खिलाफ न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज काइल जेमिसन ने अपनी स्विंग गेंदबाजी से भारत को पवेलियन भेज दिया। जेमिसन ने पहली पारी में अपनी घातक गेंदबाजी से 5 विकेट चटकाकर भारतीय बल्लेबाजों को टिकने तक का मौका नहीं दिया। जेमिसन ने अपनी स्विंग गेंदबाजी से ऋषभ पंत को आउट करते ही 8 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया।

मुख्य बिंदु:

  • ऐसा करने के बाद जेमिसन न्यूजीलैंड के पहले ऐसे गेंदबाज बन गए है जिन्होंने शुरुआती 8 टेस्ट मैच में सबसे ज्यादा विकट लेने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है।
  •  जेमिसन ने 5 विकट लेने के बाद तेज गेंदबाज जैक कॉवी को पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने 1937 से 1949 में 8 टेस्ट मैच में 41 विकेट लिए थे।
  • तीसरे दिन बारिश के कारण मैच लेट से शुरू हुआ था। जेमिसन ने 68वें ओवर में विराट को अंदर आती हुई गेंद पर आउट किया फिर इसके बाद कोहली ने डीआरएस लिया, जो की व्यर्थ गया. रिप्ले में साफ था दिख रहा था कि गेंद लेग स्टंप से टकरा रही है और वो आउट घोषित हुए।
  • जेमिसन ने इसके बाद अजिंक्य रहाणे और ऋषभ पंत को अपनी घातक गेंदबाजी से जल्दी पवेलियन लौटा दिया। 
  • इसके बाद पंत ने जेमिसन की गेंद पर चौका मारकर अपना खाता खोला, लेकिन वह ज्यादा देर तक पिच पर अपना कमल नहीं दिखा सके और तीसरी गेंद में कैच थमा बैठे।

‌केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अंतर्देशीय पोत विधेयक-2021(Inland Vessels Bill 2021) को मंज़ूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में अंतर्देशीय पोत विधेयक-2021 को मंज़ूरी दी है जो संसद में पारित होने के बाद अंतर्देशीय पोत अधिनियम, 1917 को प्रतिस्थापित करेगा। यह विधेयक अंतर्देशीय जहाज़ों की रक्षा, बचाव और पंजीकरण को विनियमित करेगा।

मुख्य बिंदु:

  • अंतर्देशीय पोत विधेयक का मुख्य उद्देश्य  विभिन्न राज्यों द्वारा बनाए गए अलग-अलग नियमों के बजाय पूरे देश के लिये एक संयुक्त कानून का प्रावधान करना है।
  • प्रस्तावित कानून के तहत दिया गया पंजीकरण प्रमाण पत्र सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में मान्य होगा तथा इसके लिये राज्यों से अलग से अनुमति लेने की कोई जरुरत नहीं होगी।
  • यह विधेयक इलेक्ट्रॉनिक पोर्टल पर पोत, पोत का पंजीकरण और चालक दल के विवरण रिकॉर्ड करने हेतु एक केंद्रीय डेटा बेस का प्रावधान करता है।
  •  केंद्रीय डेटाबेस के लिए सभी यांत्रिक रूप से चालित जहाजों को अनिवार्य रूप से पंजीकृत करने की जरुरत होगी।
  • इसमें गैर-यांत्रिक रूप से चलने वाले जहाजों को भी जिला, तालुक या पंचायत या ग्राम स्तर पर नामांकित करने का प्रावधान है।
  • यह विधेयक अंतर्देशीय जहाज़ों के प्रदूषण नियंत्रण उपायों से भी संबंधित है तथा केंद्र सरकार को रसायनों, पदार्थों आदि की सूची को प्रदूषकों के रूप में नामित करने का निर्देश देता है।
  • यह केंद्र सरकार द्वारा घोषित ज्वारीय जल सीमा और राष्ट्रीय जलमार्गों को शामिल करते हुए ‘अंतर्देशीय जल’ की परिभाषा को व्यापक रूप देता है।

अंतर्देशीय जलमार्ग के बारे में:

  • भारत में लगभग 14,500 किलोमीटर नौगम्य जलमार्ग हैं जिनमें नदियाँ, नहरें, बैकवाटर/अप्रवाही जल, खाड़ियाँ आदि सम्मिलित हैं। 
  • राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम 2016 के अनुसार, 111 जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है।
  • अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण, विश्व बैंक की तकनीकी और वित्तीय सहायता से गंगा के हल्दिया-वाराणसी खंड पर नौ- परिवहन (नेविगेशन) की क्षमता वृद्धि हेतु जल मार्ग विकास परियोजना को कार्यान्वित कर रहा है।
  • अंतर्देशीय जल परिवहन द्वारा सालाना लगभग 55 मिलियन टन कार्गो का परिवहन किया जाता है जो एक ईंधन-कुशल और पर्यावरण अनुकूल साधन है।
  • हालाँकि विकसित देशों की तुलना में भारत में जलमार्ग द्वारा माल ढुलाई का अधिक प्रयोग किया जाता है।

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