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Utkarsh Classes
Updated: 31 Dec 2024
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इतिहास रचते हुए , 16 जनवरी 2025 को अंतरिक्ष में दो उपग्रहों को सफलतापूर्वक डॉक किया । इन दो उपग्रहों को इसरो ने अपने स्पैडेक्स मिशन के तहत 30 दिसंबर 2024 को इसरो के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र , श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश से प्रक्षेपित किया गया था।
रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का चौथा देश बन गया है, जिसने अंतरिक्ष रेंडेज़वस, डॉकिंग और अनडॉकिंग की कला में महारत हासिल कर ली है।
इसरो का यह पूरा मिशन देश के चंद्रमा पर मानवयुक्त मिशन और अंतरिक्ष स्टेशन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।
अंतरिक्ष रेंडेज़वस, डॉकिंग और अनडॉकिंग क्या है?
अंतरिक्ष में रेंडेज़वस दो अंतरिक्ष यान को एक साथ लाने की प्रक्रिया है। डॉकिंग का मतलब है दोनों अंतरिक्ष यान का मिलना और शारीरिक रूप से जुड़ना है।
रेंडेज़वस के लिए दोनों अंतरिक्ष यानों का कक्षीय प्रक्षेप पथों का मिलान और दोनों की दूरी आमतौर पर 100 मीटर (330 फीट) के भीतर होना आवश्यक होता है। आदर्श रूप से, दोनों अंतरिक्ष यान को एक ही कक्षीय तल में स्थित होना चाहिए।
स्पैडेक्स मिशन इसरो की एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक परियोजना है।
मिशन का महत्व
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण और संचालन तथा चंद्रमा पर मानवयुक्त मिशन के लिए अंतरिक्ष डॉकिंग में महारत हासिल करना महत्वपूर्ण है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है जिसकी स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई थी।
यह भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत आता है।
मुख्यालय: बेंगलुरु, कर्नाटक
संस्थापक और प्रथम अध्यक्ष: विक्रम साराभाई
अध्यक्ष: एस.सोमनाथ
फुल फॉर्म
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