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सड़क दुर्घटना पीड़ितों के कैशलेस इलाज के लिए पायलट परियोजना

Utkarsh Classes Last Updated 07-02-2025
Pilot project for cashless treatment of road accident victims Transport 4 min read

भारत सरकार द्वारा सड़क दुर्घटना पीड़ितों को कैशलेस उपचार प्रदान करने के उद्देश्य से एक प्रायोगिक परियोजना (पायलट प्रोजेक्ट) शुरू की गई।  यह प्रायोगिक परियोजना केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा चंडीगढ़ में शुरू की गई है।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में 4,61,312 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1,68,491 लोगों की मृत्यु हो गई और 4,43,366 लोग घायल हुए।

परियोजना का उद्देश्य सड़क दुर्घटना में पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता प्रदान करना है ताकि मृत्यु और गंभीर क्षति की संभावना कम हो सके।

प्रायोगिक परियोजना की विशेषता

  • प्रायोगिक परियोजना का लक्ष्य सुनहरे घंटे (गोल्डन ऑवर) के दौरान सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर चिकित्सा देखभाल प्रदान करने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना है।
  • सड़क दुर्घटना में पीड़ित व्यक्ति को प्रति दुर्घटना अधिकतम 1.5 लाख रुपये का लाभ प्रदान किया जाएगा  और दुर्घटना की तिथि से 7 दिनों के भीतर उन्हे राशि प्रदान की जाएगी।
  • सड़क दुर्घटना में पीड़ित के इलाज में होने वाले अस्पताल के खर्च की प्रतिपूर्ति मोटर वाहन दुर्घटना निधि से की जाएगी।
  • प्रायोगिक परियोजना में किसी भी श्रेणी की सड़क पर मोटर वाहनों के कारण होने वाली सभी प्रकार की सड़क दुर्घटनाओं को शामिल किया जाएगा।
  • चिकित्सकीय भाषा में दुर्घटना के बाद के पहले घंटे को 'गोल्डन ऑवर' कहा जाता है। यदि इन घंटों में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को उचित प्राथमिक उपचार उपलब्ध हो जाए, तो उनके बचने की संभावना अधिक हो जाती है और उनकी चोटों की गंभीरता में कमी आती है।

क्रियान्वयन एजेंसी

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली संस्था राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण प्रायोगिक परियोजना के लिए कार्यान्वयन एजेंसी होगी, जो राज्य पुलिस, अस्पतालों और राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) के साथ समन्वय स्थापित करेगी।

कार्यक्रम को एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा जो सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के ई-विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (ईडीएआर) एप्लिकेशन को राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी  के लेनदेन प्रबंधन प्रणाली (टीएमएस) के साथ जोड़ता है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की स्थापना 2 जनवरी 2019 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी के स्थान पर की गई थी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी की स्थापना 2018 में की गई थी।।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आती है।
  • केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण  के अध्यक्ष होते हैं।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण  भारत की प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजना, "आयुष्मान भारत प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना" को लागू करने के लिए प्रमुख निकाय है।
  • यह राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए रणनीति तैयार करने, तकनीकी बुनियादी ढांचे के निर्माण और "राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन" को लागू करने के लिए भी  जिम्मेदार है।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी: सुश्री दीप्ति गौड़ मुखर्जी हैं।

FAQ

उत्तर: चंडीगढ़

उत्तर ; केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण पायलट कार्यक्रम के लिए कार्यान्वयन एजेंसी होगी, जो पुलिस, अस्पतालों और राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) के साथ समन्वय करेगी।

उत्तर: सड़क दुर्घटना के पीड़ित व्यक्ति को दुर्घटना की तारीख से अधिकतम 7 दिनों के भीतर प्रति दुर्घटना अधिकतम 1.5 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी।

उत्तर: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने चंडीगढ़ में प्रायोगिक परियोजना की शुरूआत की है।
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