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गीतिका श्रीवास्तव पाकिस्तान में भारत की पहली महिला राजनयिक प्रभारी नियुक्त

Utkarsh Classes 29-08-2023
First women charge d'affaires  to be posted in Pakistan :Geetika Srivatava Person in News 5 min read

विदेश मंत्रालय  ने गीतिका श्रीवास्तव को इस्लामाबाद, पाकिस्तान में अपने उच्चायोग में भारत का नया प्रभारी नियुक्त किया है। वह इस्लामाबाद में यह पद संभालने वाली पहली महिला होंगी

2005 बैच की भारतीय विदेश सेवा अधिकारी गीतिका श्रीवास्तव वर्तमान में विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में कार्यरत हैं और वह डॉ. एम सुरेश कुमार का स्थान लेंगी।

चार्ज डी'एफ़ेयर एक राजनयिक होता है जो राजदूत या उच्चायुक्त की अनुपस्थिति में अस्थायी रूप से किसी विदेशी देश में राजनयिक मिशन का प्रमुख होता है।

इस्लामाबाद और नई दिल्ली में भारतीय और पाकिस्तानी मिशन अगस्त 2019 से उच्चायुक्त के बिना हैं और उनका नेतृत्व उनके संबंधित प्रभारी डी'एफ़ेयर द्वारा किया जा रहा है।

भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद, पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों को कम करने का फैसला किया था । दोनों देशों ने अपने-अपने उच्चायुक्त को वापस बुला लिया और 2019 के बाद से पाकिस्तान में भारत का कोई उच्चायुक्त नहीं है। अजय बिसारिया पाकिस्तान में अंतिम भारतीय उच्चायुक्त थे।

स्वतंत्रता के बाद, श्री प्रकाश को पाकिस्तान में भारत के पहले उच्चायुक्त के रूप में नियुक्त किया गया था। तब से 22 लोगों को पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त के रूप में नियुक्त किया गया है। 

कुछ महिला राजनयिकों को पाकिस्तान में तैनात किया गया है क्योंकि  पाकिस्तान  एक महिला के लिए काम करने के लिए एक  कठिन जगह माना जाता है। इसके अलावा विदेश मंत्रालय ने भारतीय राजनयिकों के लिए  पाकिस्तान को गैर-पारिवारिक नियुक्ति भी निर्धारित की है। इसका मतलब है की भारतीय राजनयिक पाकिस्तान अपने परिवार नहीं ले जा सकते हैं।

एक राजदूत की भूमिका और उच्चायोग और दूतावास के बीच अंतर

एक राजदूत किसी दूसरे विदेशी देश में, जिसके साथ उसके राजनयिक संबंध होते हैं, देश का सर्वोच्च पद का प्रतिनिधि होता है। राजदूत का मुख्य कार्य उस विदेशी देश में जहां वह तैनात है, वहां अपने देश के राष्ट्रीय हितों और अपने देश के नागरिकों की रक्षा करना है।

राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेंशन 1961 के तहत एक राजदूत को सर्वोच्च राजनयिक दर्जा प्राप्त है। राजदूत के पास विदेश में एक विशिष्ट क्षेत्र का नियंत्रण होता है जिसे दूतावास या उच्चायोग कहा जाता है। 

दूतावास या उच्चायोग मेज़बान देश के कानूनी अधिकार क्षेत्र से बाहर होता  है। इसका मतलब है कि मेजबान देश के नियम और कानून उस दूतावास और उसके कर्मचारियों पर लागू नहीं होते हैं जिन्हें राजनयिक दर्जा दिया गया है।

उच्चायोग

राष्ट्रमंडल देशों के बीच राजनयिक मिशनों को उच्चायोग कहा जाता है, जबकि गैर-राष्ट्रमंडल देशों के बीच के राजनयिक मिशनों को दूतावास कहा जाता है।

राष्ट्रमंडल देश वे देश हैं जिन पर कभी ब्रिटेन का शासन था और अब आज़ादी के बाद राष्ट्रमंडल नामक एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के सदस्य हैं। वर्तमान में राष्ट्रमंडल में 56 सदस्य देश हैं।

किसी राष्ट्रमंडल देश के राजदूत को दूसरे राष्ट्रमंडल देश में उच्चायुक्त कहा जाता है। दूतावास को उच्चायोग कहा जाता है।

भारत के विदेश मंत्री: एस जयशंकर

 

 

FAQ

उत्तर : गीतिका श्रीवास्तव

अजय ब्यासरिया
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