“The Great Conjunction”

  • utkarsh
  • Dec 21, 2020
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“The Great Conjunction”

21 दिसम्बर की रात्रि हमारे सौर मंडल के दो विशाल काय गैसीय ग्रह होंगे सबसे करीब

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • सौर मंडल के दो खगोलीय पिंडो के बीच ऐसी घटना को Conjunction (संयोजन) कहते है परन्तु,
  •  सन् 1623 में बृहस्पति तथा शनि ग्रह के इतने करीब आने की घटना को Great Conjunction (“महान संक्रांति”) कहा गया।
  • दुनिया में यह खगोलीय घटना “क्रिसमस स्टार” के रूप में लोकप्रिय है।  
  •  अन्तरिक्ष में इनके बीच दूरी 73.5 करोड़ किमी. होगी। 
  • पृथ्वी से आभासीय दूरी 0.06 डिग्री। 
  • इसके साथ ही हमारे सौर मंडल के दो विशाल ग्रहों के चन्द्रमा एक ही क्षेत्र में दिखाई देने लगेंगे।
  • सामान्यत: करीब आने का समय 20 वर्ष मगर इतने करीब 397 वर्ष में पहली बार।

कैसे देखा जा सकेगा: 

सूर्यास्त के तुरंत बाद दिशा दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर।

संयोग की तिथि बृहस्पति, शनि और पृथ्वी की स्थिति से सूर्य के चारों ओर अपने रास्तों से निर्धारित होती है, जबकि संक्रांति की तिथि पृथ्वी के अक्ष के झुकाव से निर्धारित होती है।

इतिहास : 

  • सन् 1623 में यह घटना हुई थी मगर पृथ्वी के अधिकांश हिस्सों में देखी नहीं जा सकी थी।
  • लगभग 800 साल बाद शनि और बृहस्पति का यह संयोजन सूर्यास्त के बाद में हो रहा है। इससे पूर्व यह अद्भूत घटना वर्ष 1226 में देखी गयी थी।
  • भविष्य में इस खगोलीय घटना का नज़ारा वर्ष 2080 में बन सकता है।
  • भारत के अधिकतर हिस्सों में सूर्यास्त के पश्चात बिना किसी विशेष उपकरण की सहायता से देखा जा सकेंगा।
  • बृहस्पति सूर्य से पाँचवाँ और हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है।
  • शनि (Saturn), सूर्य से छठां तथा सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है।

रासायनिक संरचना

  • बृहस्पति का उपरी वायुमंडल लगभग 88-92% हाइड्रोजन और 8-12% हीलियम गैस से बना है।
  • बृहस्पति 77 करोड़ 80 लाख कि॰मी॰ की औसत दूरी से सूर्य की परिक्रमा 11.86 वर्ष में पूरी करता है।
  • शनि ग्रह 96% हाइड्रोजन, 3% हिलियम, एवं मीथेन, अमोनिया और हाइड्रोजन ड्यूटेराइड से बना है। पृथ्वी से नौ गुना बड़े होने के बाद भी औसत घनत्व में यह पृथ्वी का सिर्फ आठवां भाग है।
  • शनि सूर्य की परिक्रमा 1.4 अरब किलोमीटर की औसत दूरी से लगभग 29½ वर्ष में पूरी करता है।
  • 1610 में, इतालवी खगोलशास्त्री गैलीलियो गैलीली ने बृहस्पति के चार चंद्रमाओं – आयो, यूरोपा, गेनीमेड और कैलिस्टो की खोज की ।
  • उसी वर्ष, गैलीलियो ने शनि के आस-पास एक अजीब अंडाकार संरचना की भी खोज की थी , जो बाद में उसके वलय के रूप देखें जाने लगे।

सारांश

विशाल ग्रहों के चन्द्रमा एक ही क्षेत्र में दिखाई देने लगे

बिना किसी सहायता के बिना किसी उपकरण के देखा जा सका

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