अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस

  • utkarsh
  • Jul 29, 2021
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अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस

“बाघ हमारी विरासत, इनसे है विश्व में नाम हमारा”

हर साल 29 जुलाई को ‘अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत 2010 में हुई थी। दुनियाभर में बाघों के संरक्षण की जागरूकता पैदा करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है,  इसके लिए इस वर्ष की थीम – “उनका अस्तित्व हमारे हाथ में है”। 

विश्व के कुल 70% बाघों की आबादी रखने वाले भारत में भी बाघ दिवस का फायदा देखने को मिला है। यह देश का राष्ट्रीय पशु है और यह देश की शक्ति, शान, सतर्कता, बुद्धि और धीरज का प्रतीक माना जाता है। यह निराशा की बात है कि बाघ को वन्यजीवों की लुप्त होती प्रजातियों की सूची में रखा गया है। “सेव द टाइगर” जैसे अभियानों ने इन बाघों के जीवन को बचाने की आस जगाई है। भारत में बाघों को बचाने के लिए वर्ष 1973 में प्रोजेक्ट्स शुरू कर दिए गए थे और कई टाइगर रिज़र्व भी बनाए गए। जिनकी संख्या उस समय 9 थी जो अब बढ़ कर लगभग 50 हो गई है। वर्ल्ड वाइड फ़ंड फ़ॉर नेचर (WWF) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार विश्व में कुल बाघों की संख्या 3,890 है, जिसमें भारत के बाघों की संख्या 2,967 है।

वर्ल्ड वाइड फ़ंड फ़ॉर नेचर (WWF) – 

अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन के रूप में शुरू विश्व वन्यजीव कोष, जो वर्तमान में वर्ल्ड वाइड फ़ंड फ़ॉर नेचर (WWF) के नाम से प्रचलित है। यह पर्यावरण संरक्षण, अनुसंधान और पुनर्स्थापना के मुद्दों पर कार्य करता है। यह विश्व के अग्रणी संरक्षण संगठन के रूप में लगभग 100 देशों में कार्य कर रहा है। समुदायों, वन्यजीवों और उनके रहने के स्थानों की रक्षा करने वाले समाधान विकसित और वितरित किए जा सकें। हर स्तर पर दुनिया भर के लोगों के साथ सहयोग करते हैं ताकि समुदायों, वन्यजीवों और उनके रहने के स्थानों की रक्षा करने वाले अभिनव समाधान विकसित और वितरित किए जा सकें।

जंगली बाघों की संख्या एक सदी की गिरावट के बाद बढ़ने लगी है। भारत, नेपाल, भूटान, रूस और चीन जैसे देशों में बाघों की आबादी स्थिर या बढ़ रही है। वर्तमान तक ज्ञात बाघों की संख्या को बरकरार रखने और बढ़ने के लिए अधिक काम करने की आवश्यकता है। जंगल में इसके भविष्य को सुरक्षित और इस प्रजाति की रक्षा के लिए हमें निरंतर प्रयासरत रहना होगा।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA)

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) का गठन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 38 एल (1) के तहत किया गया है। NTCA ने अपनी नए सर्वे में दुनियाभर के 13 ऐसे देशों की पहचान की है, जहां मौजूदा समय में बाघ पाए जाते हैं, लेकिन सरंक्षण के आभाव में इनकी संख्या कम हुए जा रही हैl ऐसे देशों को भारत बाघों के संरक्षण के लिए बेहतर तकनीक और योजना मुहैया कराएगा। अभी बाघों की जिंदा प्रजातियों में साइबेरियन टाइगर, बंगाल टाइगर, इंडो-चाइनीज टाइगर, मलायन टाइगर, सुमात्रन टाइगर शामिल हैं। टाइगर की कुछ प्रजातियाँ विलुप्त हो चुकीं है, जिसमें बाली टाइगर, कैस्पियन टाइगर, जावन टाइगर आते हैं। हालांकि, इन सबके बीच भारत में बाघों की संख्या लगातार बढ़ी है। 

महत्त्वपूर्ण जानकारी – 

  • श्री भूपेंद्र यादव माननीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री और अध्यक्ष, एनटीसीए
  • श्री अश्विनी कुमार चौबे – माननीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री और उपाध्यक्ष, एनटीसीए
  • डॉ. एस.पी. यादव – अतिरिक्त महानिदेशक (प्रोजेक्ट टाइगर) एवं सदस्य सचिव (एनटीसीए)
  • 18 राज्यों में फैले हमारे टाइगर रेंज देश के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 2.23% है।
  • 1973 में 9 बाघ अभयारण्यों से शुरू प्रोजेक्ट टाइगर कवरेज वर्तमान में बढ़कर 51 हो गया है।
  • प्रोजेक्ट टाइगर – पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक केंद्र प्रायोजित योजना है।
  • भारत में मध्य प्रदेश में सबसे अधिक बाघ (526) हैं।

द टाइगर मैन ऑफ इंडिया – 

कैलाश सांखला का जन्म 30 जनवरी, 1925 को राजस्थान के जोधपुर शहर में हुआ। वे एक भारतीय जीवविज्ञानी और संरक्षणवादी थे। वह दिल्ली प्राणी उद्यान के निर्देशक और राजस्थान के मुख्य वन्यजीव वार्डन थे। वे बाघों के संरक्षण में अपने काम के लिए सबसे ज्यादा जाने गए। सांखला 1973 में भारत में स्थापित बाघ संरक्षण कार्यक्रम “प्रोजेक्ट टाइगर” के पहले निर्देशक थे। वर्ष 1992 में उन्हें पद्मश्री और 2013 में राजस्थान रत्न से सम्मानित किया गया था।

  • 1953 में उन्होंने वन सेवा शुरू की।
  • 1965 में उन्हें बेहतर कार्य के लिए राजस्थान सरकार की ओर से मेरिट अवॉर्ड दिया गया।
  • उन्हें दिल्ली जूलॉजिकल पार्क में निर्देशक का जिम्मा भी 1965 में मिला।
  • वर्ष 1970 में बाघों पर रिसर्च और अध्ययन के लिए सांखला को जवाहर लाल नेहरू फेलोशिप प्राप्त हुई।
  • 1989 में कैलाश सांखला ने बाघ संरक्षण के लिए टाइगर ट्रस्ट की भी नींव रखी।
  • द स्टोरी ऑफ इंडियन टाइगर, टाइगर लैंड, टाइगर, रिटर्न आफ द टाइगर जैसी कई मशहूर किताबें उन्होंने अपने काम के अनुभव के आधार पर लिखी।

बाघों के सरंक्षण के प्रति उनके समर्पण भाव को देखते हुए उन्हें “भारत के टाइगर मैन” की उपाधि दी गई।

बाघ से जुड़े तथ्य

  • बाघ दुनिया में बिल्ली की सबसे बड़ी प्रजाति है जिसकी लंबाई 3.3 मीटर तक होती है और इसका वजन 670 पाउंड तक होता है।
  • ये अंधे पैदा होते हैं और जन्म के 1-2 सप्ताह बाद ही अपनी आँखें खोलते हैं।
  • गहरी खड़ी धारियों और लाल/नारंगी फर से बाघ की पहचान आसानी से की जा सकती है।
  • बंगाल टाइगर आम प्रजाति है।
  • बाघ का जीवनकाल इनके आवास के अनुसार होता है, जो जंगल में लगभग 11 वर्ष व कैद में 20 से 25 वर्ष होता है।
  • बाघ वयस्क होने के बाद आमतौर पर अकेले रहते हैं।
  • बाघ तैरने में माहिर होते हैं।
  • ये छह महीने की उम्र में शिकार करना सीखना शुरू कर देते हैं, लेकिन वे लगभग 18 महीने के होने तक अपनी मां के साथ रहते हैं।
  • बाघ गंध चिह्नों, दृश्य संकेतों, गर्जना, गुर्राना, खर्राटे, घुरघुराहट, विलाप, म्याऊ और फुफकार जैसी कई ध्वनियों का उपयोग करके संवाद करते हैं।

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