दिल्ली में स्मॉग टावर

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दिल्ली में स्मॉग टावर

चर्चा में क्यों ?

  • वायु प्रदूषण की समस्या से निजात पाने के लिये राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में एक स्मॉग टॉवर की योजना बनाई जा रही है ताकि क्षेत्र में एक स्वच्छ वायु क्षेत्र बनाया जा सके।
  • सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशानुसार केंद्र सरकार को अलग-अलग स्थानों पर प्यूरीफाइंग टॉवर या स्मॉग टॉवर लगाने का खाका तैयार करने को कहा गया।

दिल्ली में स्मॉग टॉवर

लगाने का कारण ?

  • दिल्ली में बढ़ती हुई वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिये

लगाने से क्या होगा ?

  • वर्तमान में प्रस्तावित स्मॉग टॉवर केवल पार्टिकुलेट मैटर लोड को कम करने पर केंद्रित है। स्मॉग टावरों को बड़े पैमाने पर एयर प्यूरिफायर के रूप में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • स्थापित किए जा रहे स्मॉग टॉवर के फिल्टर में कार्बन नैनोफाइबर का उपयोग एक प्रमुख घटक के रूप में किया जाएगा।
  • वे आमतौर पर एयर फिल्टर की कई परतों के साथ फिट होते हैं, जो प्रदूषकों की हवा को साफ करते हैं क्योंकि यह उनके माध्यम से गुजरता है।
  • स्मॉग टॉवर के लगने से से क्षेत्र में 50% से कण कम होने की उम्मीद है जिससे वायु प्रदूषण की गंभीरता को कम करने में प्रमुख रूप से मदद मिलेगी।

समस्याएँ/चुनौतियाँ :-

  • भारत में बनाए जा रहे एंटी-स्मॉग टॉवर आकार में छोटे हैं और तत्काल उपयोग के लिए तैयार नहीं हैं।
  • इन टॉवरों की ऊँचाई 25 मीटर तक होंगी और जो 1 से 3 कि.मी. त्रिज्या की लंबाई में हवा को शुद्ध करेंगी।
  • दिल्ली स्थित कुरिन सिस्टम्स नामक एक स्टार्टअप प्रत्येक टॉवर के लिए 2 करोड़ रुपये की अपेक्षित लागत के साथ सिर्फ चार महीने में 40 फीट ऊंचे टॉवर का निर्माण कर सकता है। इस स्टार्टअप ने अपनी तकनीक के लिए एक पेटेंट भी दाखिल किया है और इसके लिए 6 फुट लंबा एक मॉडल बनाया है।
  • दिल्ली में 1,400 वर्ग किलोमीटर से अधिक का क्षेत्र है और यह चोटी के प्रदूषण के दिनों में पूरे शहर की हवा को साफ करने के लिए कम से कम तीन से चार 100 मीटर ऊंचे टॉवर ले जाएगा।
  • चूंकि तकनीक का अभी तक दिल्ली के मौसम की स्थिति में परीक्षण नहीं किया गया है, इसलिए इन परियोजनाओं की सफलता की गारंटी देना मुश्किल हो सकता है।
स्मॉग टावर क्या है ?
  • स्मॉग टावर एक बहुत बड़ा एयर प्यूरीफायर है। यह अपने आसपास से प्रदूषित हवा या उसके कणों को सोख लेता है और फिर वापस पर्यावरण में साफ हवा छोड़ता है।
  • घर पर लगने वाले आम प्यूरीफायर की तरह यह बिजली से चलते हैं। इनमें से कुछ को सोलर पावर से भी चलाया जा सकता है।
  • स्मॉग टॉवर का पहला प्रोटोटाइप चीन की राजधानी बीजिंग में लगाया गया। इसे बाद में चीन के तियानजिन और क्राको शहर में भी लगाया गया।
  • दिल्ली की एक स्टार्टअप कंपनी ने 40 फुट लंबा ऐसा प्यूरीफायर बनाया है जो उसके 3 किलोमीटर के दायरे में रह रहे 75 हज़ार लोगों को स्वच्छ हवा दे सकता है। इसके निर्माता कुरीन सिस्टम्स को हाल ही में ‘दुनिया के सबसे लंबे और साथ ही सबसे मजबूत प्यूरीफायर’ के लिये पेटेंट मिला है।
  • चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा स्मॉग टॉवर है और टॉवर के आसपास के क्षेत्र में लगभग 6 वर्ग किमी के क्षेत्र में पीएम 2.5 को 19% तक कम कर दिया है।

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