आरबीआई ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में की कटौती

आरबीआई ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में की कटौती

आरबीआई ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में की कटौती

क्या है खबर?

  • रिजर्व बैंक ने लगातार 5वीं बार ब्याज दरों में कटौती की है। आरबीआई ने ब्याज दरों में 0.25 फीसदी कटौती की है। अब रेपो रेट 0.25 फीसदी घटकर 5.15 फीसदी हो गया है, जबकि रिवर्स रेपो 0.25 फीसदी घटकर 4.90 फीसदी पर आ गया है।
  • सभी MPC सदस्यों ने दरें घटाने का समर्थन किया। हालांकि MPC सदस्य ढोलकिया 0.40 फीसदी कटौती के पक्ष में थे। MPC की अगली बैठक 3-5 दिसंबर को होगी। कुल मिलाकर RBI इस साल रेपो रेट में 1.35 फीसदी की कटौती कर चुका है।
  • आरबीई ने लगातार पांचवीं बार रेपो रेट में कटौती की है आरबीआई के इस फैसले से रेपो रेट 9 साल में सबसे कम है। इससे पहले आरबीआई ने तीन बार फरवरी, अप्रैल और जून पॉलिसी में 0.25-0.25 फीसदी की कटौती की थी वहीं, अगस्त की पॉलिसी में रेपो रेट में 0.35 फीसदी की बड़ी कटौती की गई थी।
  • उल्लेखनीय है कि सरकार ने सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए हाल में कई कदम उठाए हैं कॉरपोरेट कर की दर में बड़ी कटौती की गई है। वहीं, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर लगाया गया बढ़ा अधिभार वापस ले लिया गया है क्योंकि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर घटकर 5 प्रतिशत पर आ गई है जो इसका छह साल का निचला स्तर है।

मौद्रिक नीति समिति

  • मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) भारत सरकार द्वारा गठित एक समिति है जिसका गठन वाणिज्यिक बैंकों के लिए ब्याज दर निर्धारण, अर्थव्यवस्था में समावेशी विकास तथा सरकार द्वारा निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त करने हेतु 27 जून, 2016 को किया गया था। भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम-1934 में संशोधन करते हुए भारत में नीति निर्माण का कार्य नवगठित मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) को सौंप दिया गया है।
  • नयी एमपीसी में छह सदस्यों का एक पैनल है जिसमें तीन सदस्य आरबीआई से होंगे और तीन अन्य स्वतंत्र सदस्य भारत सरकार द्वारा चुने जायेंगे। आरबीआई के तीन अधिकारीयों में एक गवर्नर, एक डिप्टी गवर्नर तथा एक अन्य अधिकारी शामिल होगा।
  • मौद्रिक नीति सर्वसम्मति से निर्णय लेती है। यदि बराबर मत है तो गवर्नर को निर्णायक मत देने का अधिकार होगा।

मौद्रिक नीति के कुछ मात्रात्मक उपकरण

  • रेपो रेट – इस रेट पर आरबीआई कमर्शियल बैंकों और दूसरे बैंकों को अल्पकालीन ऋण देता है। रेपो रेट कम होने का मतलब यह है कि बैंक से मिलने वाले लोन सस्ते हो जाएंगे क्योंकि जब बैंकों को RBI से सस्ता ऋण मिलेगा तो बैंक भी लोगों को प्रदान किये जाने वाले ऋण में कमी करेगा। रेपो रेट कम होने से होम लोन, व्हीकल लोन वगैरह सभी सस्ते हो जाते हैं।
  • रिवर्स रेपो रेट – जिस रेट पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं। यह सामान्यत: रेपो रेट से 50 बेसिक पॉइन्ट कम होती है। रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी को नियंत्रित करने में काम आती है। बहुत ज्यादा नकदी होने पर आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देती है।
  • सीआरआर (Cash Reserve Ratio) – बैंकिंग नियमों के तहत सभी बैंकों को अपनी कुल नकदी का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास जमा करना होता है, जिसे कैश रिजर्व रेशियो यानी सीआरआर कहते हैं।
  • एमएसएफ (Marginal Standing Facility) – भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति (2011-12) में सीमांत स्थायी सुविधा शुरू की थी। एमएसएफ यानि मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी के तहत कमर्शियल बैंक एक रात के लिए अपने कुल जमा का 1 फीसदी तक लोन ले सकते हैं।
  • एसएलआर (Statutory Liquidity Ratio) – SLR (वैधानिक तरलता अनुपात) बैंकों के पास उपलब्ध जमाओं का वह हिस्सा होता है, जोकि उन्हें अपनी जमाओं पर लोन जारी करने के पहले अपने पास रख लेना अनिवार्य होता है। यह नकदी (cash), स्वर्ण भंडार (gold reserves), सरकारी प्रतिभूतियों (government approved securities) वगैरह किसी भी रूप में हो सकता है।

Comments ( 3 )

  • Anonymous

    Best información.

  • Ramesh jakhar

    Great content

  • Aman sen

    Ap sir kitni achi knowledge provide karte ho sir ,. Har ek chiz samjh mai aa jati hai asani se ,, thanku sir ,and thanku team utkarsh

Give a comment

In light of Pandameic COVID-19, we are offering ONLINE CLASSES for students from 20TH of MARCH onwards. DOWNLOAD NOW
+