प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) और मुद्रा ऋण

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) और मुद्रा ऋण

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ( RBI ) ने ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ ( PMMY ) के तहत प्रदान किये गए ऋणों का बड़ा हिस्सा ‘गैर-निष्पादित परिसंपत्ति’ ( NPA ) के रूप में परिवर्तित होने पर चिंता जताई है।

ध्यातव्य बिन्दु

  • डिजिटल ढाँचे में सुधार के चलते सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्षेत्र बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) एवं सूक्ष्म वित्तीय संस्थानों के लिये आकर्षक ग्राहक के रूप में उभरा है जिससे धन के अनौपचारिक स्रोतों पर उनकी निर्भरता कम हुई है।
  • जुलाई, 2019 में केंद्र सरकार द्वारा संसद में दी गई एक जानकारी के अनुसार, मुद्रा योजना के अंतर्गत 21 लाख करोड़ रूपये से अधिक का ऋण NPA में परिवर्तित हो चुका है, तथा इस योजना के अंतर्गत NPA में परिवर्तित कुल ऋण वित्तीय वर्ष 2017-18 के 2.52% से वित्तीय वर्ष 2018-19 में 2.68% तक पहुँच चुका है।
  • जून, 2019 तक मुद्रा योजना के तहत 19 करोड़ रूपये से अधिक का ऋण प्रदान किया गया है तथा मार्च 2019 तक लगभग 63 करोड़ खातों को डिफॉल्ट (Default) घोषित किया गया है।
  • RTI द्वारा प्राप्त एक सूचना के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान बैड लोन्स (Bad Loans) में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 126% की वृद्धि हुई।
  • इस योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान बैड लोन्स (Bad Loans) 9204.14 करोड़ रूपये था जो वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान बढ़कर 45 करोड़ रूपये हो गया।

मुद्रा योजना से NPA स्तर बढ़ने का कारण ?

  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत प्रदान किये गए ऋणों से कई लाभार्थी गरीबी के दुष्चक्र से बाहर निकले हैं, परंतु कई ऋण प्राप्तकर्त्ताओं द्वारा समय पर ऋण न चुकाने से NPA का स्तर बढ़ा है।

परिणाम

  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत प्रदान किये गए ऋणों का बड़ी मात्रा में NPA के रूप में परिवर्तन होने के कारण RBI ने बैंकों से इस तरह के ऋणों की बारीकी से निगरानी करने को कहा है।
  • RBI के अनुसार अनिश्चित ऋण वृद्धि, अत्यधिक अंतरसंबद्धता तथा ऋणों के चक्रीय रूप से NPA में परिवर्तित हो जाने से वित्तीय जोखिम बढ़ता है जो भारत के सूक्ष्मवित्तीय (Microfinance) क्षेत्र में प्रणालीगत जोखिम को बढ़ावा देता है।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (Pradhan Mantri MUDRA Yojana-PMMY)
  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत अप्रैल, 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी।
  • इस योजना के अंतर्गत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग इकाइयों को ज़मानत मुक्त ऋण प्रदान किया जाता है।
  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत तीन प्रकार के ऋणों की व्यवस्था की गई है –
  1. शिशु (Shishu) – 50,000 रूपये तक के ऋण
  2. किशोर (Kishor) – 50,001 से 5 लाख रूपये तक के ऋण
  3. तरुण (Tarun) – 500,001 से 10 लाख रूपये तक के ऋण
  • इस योजना का उद्देश्य माइक्रोफाइनेंस का उपयोग आर्थिक विकास के एक उपकरण के रूप में करना है।
  • यह योजना कमजोर वर्ग के लोगों, छोटी विनिर्माण इकाइयों, दुकानदारों, फल एवं सब्जी विक्रेताओं, ट्रक और टैक्सी ऑपरेटरों को लक्षित करने, खाद्य सेवा इकाइयों, मशीन ऑपरेटरों, कारीगरों तथा खाद्य उत्पादकों को आय प्राप्ति हेतु अवसर प्रदान करने में मदद करती है।

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