जॉर्डन-इजराइल शांति संधि का अंत

जॉर्डन-इजराइल शांति संधि का अंत

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में जॉर्डन ने इजराइल के साथ हुई 25 वर्ष पुराने शांति संधि (Peace treaty) के एक प्रावधान का अंत किया है।

पृष्ठभूमि : इजराइल-जॉर्डन शांति संधि

  • 26 अक्टूबर, 1994 में जॉर्डन तथा इजराइल के मध्य एक संधि हुई थी जिसके द्वारा दोनों देशों के मध्य स्थित सीमावर्ती क्षेत्र ‘बखूरा’ (हिब्रू में नहराईम) तथा ‘अल घमर’ (जोफर) के लिये विशेष प्रावधान किये गए थे।

इजराइल-जॉर्डन शांति संधि में बखूरा तथा अल घमर से संबंधित मुख्य प्रावधान –

  • बखूरा तथा अल घमर के क्षेत्र पर जॉर्डन की प्रभुसत्ता बनी रहेगी परंतु इजराइल को इस क्षेत्र के निजी उपयोग का अधिकार प्राप्त होगा।
  • इन अधिकारों के तहत इजराइल के नागरिक इस क्षेत्र में बिना किसी रोक-टोक के आवाजाही कर सकेंगे तथा कृषि, पर्यटन व अन्य संबंधित कार्यों के लिये उन्हें छूट प्रदान की जाएगी।
  • इन क्षेत्रों में दोनों देशों में से किसी भी देश के आप्रवासन (Immigration) तथा सीमा शुल्क से (Custom) संबंधित नियम नहीं लागू होंगे।
  • इस क्षेत्र पर इजराइल का अधिकार आगामी 25 वर्षों के लिये लागू रहेगा तथा इस अवधि के पूरा होने के बाद इसे स्वतः ही नवीकृत (Renewed) मान लिया जाएगा।
  • इस संधि के नवीकरण को लेकर यदि किसी देश को आपत्ति होगी तो वह इसके समाप्ति के एक वर्ष पूर्व सूचित कर सकता है तथा इस स्थिति में आपसी विचार-विमर्श द्वारा निर्णय लिया जाएगा।
  • वर्ष 2019 में इस संधि की अवधि समाप्त होने के बाद जॉर्डन ने इजराइल को पट्टे (Lease) पर दिये गए बखूरा तथा अल घमर के इलाके को दुबारा देने से मना कर दिया। इस संबंध में वर्ष 2018 में ही जॉर्डन ने इजराइल को सूचित कर दिया था।
  • ये दोनों ही क्षेत्र जॉर्डन-इजराइल की सीमा पर बसे हैं जिसमें ‘बखूरा’ गैलिली समुद्र (Sea of Galilee) के किनारे व जॉर्डन नदी (Jordan river) के तट पर तथा ‘अल घमर’ मृत सागर (Dead sea) के दक्षिण में स्थित है।

जॉर्डन के संधि से अलग होने का कारण –

  • इजराइल द्वारा जेरुसलम की अल-अक्सा (Al-Aqsa Mosque) मस्जिद पर अवैध कब्जा तथा जॉर्डन के नागरिकों को इजराइल में नजरबंद (Detention) किये जाने से दोनों देशों के मध्य तनाव बढ़ा है।
  • अमेरिका द्वारा जेरुसलम को इजराइल की राजधानी घोषित किये जाने के बाद अरब देशों में इजराइल के प्रति असंतोष की स्थिति बनी है। अतः जॉर्डन ने इजराइल का विरोध करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया है।
  • पिछले एक दशक से इजराइल लगातार दोनों देशों के मध्य स्थित वेस्ट बैंक (West Bank) तथा जॉर्डन घाटी (Jordan Valley) में अवैध निर्माण तथा कब्ज़ा कर रहा है। इजराइल इस पूरे क्षेत्र पर अपनी संप्रभुता चाहता है जबकि जॉर्डन चाहता है कि इस क्षेत्र पर एक संप्रभु देश फिलिस्तीन (Palestine) बनाया जाए।
  • इजराइल तथा जॉर्डन के मध्य पिछले एक दशक से वैचारिक तथा आर्थिक विवाद की स्थिति बनी हुई हैं।

संधि के समाप्त होने से प्रभाव:

  • पिछले 25 वर्षों से इजराइल के किसान इन दोनों क्षेत्रों में खेती करते आ रहे थे। इस संधि की समाप्ति के बाद वर्षों से चले आ रहे उनकी आजीविका के साधन समाप्त हो जाएंगे।
  • जॉर्डन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार इज़राइली किसान अपनी बची हुई फसलों की कटाई कर सकते हैं लेकिन अब उस क्षेत्र में प्रवेश के लिये उन्हें वीजा लेना होगा।

इजराइल-जॉर्डन संबंधों पर एक नजर –

  • द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद ब्रिटिश संरक्षित क्षेत्र (Brititsh Mandate) फिलिस्तीन (आधुनिक इजराइल, जॉर्डन तथा फिलिस्तीन) को विभाजित करके इजराइल का निर्माण किया गया। विश्व युद्ध के दौरान यूरोप से विस्थापित हुए यहूदियों (Jews) को यहाँ बसाया गया तथा वर्ष 1947 में इजराइल एक स्वतंत्र देश बना।
  • प्रारंभ में जॉर्डन के संबंध, इजराइल तथा अन्य अरब देशों से भिन्न थे। दोनों देश एक लंबी भौगोलिक सीमा साझा करते हैं तथा वर्ष 1947 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रस्तावित बँटवारे को जॉर्डन ने स्वीकार कर लिया था। इसके तहत यह तय किया गया था कि इजराइल तथा जॉर्डन में क्रमशः यहूदी तथा मुसलमान अलग-अलग रहेंगे।
  • इजराइल की स्थापना के समय से ही अन्य अरब देशों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया क्योंकि मुस्लिमों के पवित्र स्थल जेरुसलम पर इजराइल का अधिकार हो गया था।
  • इजराइल के गठन के बाद ही वर्ष 1948 में अरब देशों ने संयुक्त रूप से इजराइल पर आक्रमण कर दिया तथा अरब देशों के दबाव में जॉर्डन को भी युद्ध में हिस्सा लेना पड़ा। युद्ध के बाद जॉर्डन ने पूर्वी जेरुसलम तथा वेस्ट बैंक पर कब्जा कर लिया।
  • वर्ष 1967 में हुए तीसरे अरब-इजराइल युद्ध (छः दिवसीय युद्ध) में इजराइल की जीत हुई तथा गाजा पट्टी (Gaza Strip), वेस्ट बैंक तथा पूर्वी जेरुसलम पर इजराइल का पुनः अधिकार हो गया।
  • फिलिस्तीन के हक में जॉर्डन ने इजराइल से बातचीत के माध्यम से समझौता करने का प्रयास किया परंतु इसका कोई हल नहीं निकल सका।
  • अंततः 25 जुलाई, 1994 को संयुक्त राज्य अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डी. सी. में हुए समझौते के बाद जॉर्डन-इजराइल के बीच लंबे अरसे से चली आ रही युद्ध जैसी स्थिति के बाद शांति स्थापित हो सकी।
  • उसी वर्ष 26 अक्टूबर, 1994 में दोनों देशों में यारमूक (Yarmouk) तथा जॉर्डन (Jordan) नदियों के जल प्रयोग के साथ ही बखूरा एवं अल घमर के इलाकों से संबंधित अधिकार को लेकर संधि हुई।

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