नागरिकता के नियम

नागरिकता के नियम

चर्चा में क्यों ? 

 

  • हाल ही में गृह मंत्रालय (MHA) ने तेलंगाना के विधायक चेन्नामनेनी रमेश की नागरिकता रद्द कर दी।
  • 31 मार्च, 2008 को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया था और 4 फरवरी, 2009 को उन्हें इसकी अनुमति दी गई थी। 
  • MHA ने कहा ‘नागरिकता अधिनियम, 1955 और उसके तहत नियमों’ का उल्लंघन किया गया था।

 

ध्यातव्य बिन्दु 

  • चेन्नामनेनी रमेश 1993 से जर्मनी के नागरिक रहे हैं, इनके माता-पिता स्वतंत्रता सेनानी थे। 31 मार्च, 2008 को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया था और 4 फरवरी, 2009 को उन्हें इसकी अनुमति दी गई थी। 
  • तब से, वह राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं और उन्होंने जितने भी चुनाव लड़े हैं, सभी जीते हैं। 
  • उन्होंने 2009 में टी.डी.पी. के साथ अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की, और 2010 में तेलंगाना आंदोलन के उत्कर्ष के समय वे टी.आर.एस. में चले गए।
  • गृह मंत्रालय ने 2008 में नागरिकता के लिए आवेदन करने के समय तथ्यों की गलत बयानी के आधार पर उनकी नागरिकता रद्द कर दी थी।
  • 15 जून, 2009 को करीमनगर के कांग्रेस नेता आदि श्रीनिवास ने आपत्ति दर्ज करते हुए एक संशोधन आवेदन‘रमेश को नागरिकता प्रदान करना’ दायर किया। इसमे कहा गया कि रमेश ने अपनी जर्मन नागरिकता बरकरार रखी थी और भारतीय नागरिकता के लिए अपने आवेदन की तारीख से पहले वर्ष में जर्मनी की यात्रा की थी, जो कि ‘द सिटिजनशिप अधिनियम, 1955’ का उल्लंघन था। 
  • इसी के आधार पर, एमएचए ने एक समिति बनाई, जिसने मार्च, 2017 में अपनी रिपोर्ट में प्रस्तुत करने से पहले नौ साल तक इस मामले की जांच की गई और पाया गया कि रमेश ने वास्तव में धोखाधड़ी से नागरिकता प्राप्त की थी। MHA ने अगस्त, 2017 में रमेश की नागरिकता रद्द कर दी।

नागरिकता के नियम और ‘नागरिकता अधिनियम, 1955’

  • भारत के नागरिक के रूप में एक व्यक्ति को भारत के संविधान के अनुच्छेद 5 से 11 (भाग II) द्वारा परिभाषित किया गया है।
  • नागरिकता से संबंधित कानून ‘नागरिकता अधिनियम 1955’ है, जिसे 1986, 1992, 2003, 2005 और 2015 के ‘नागरिकता (संशोधन) अधिनियम’ द्वारा संशोधित किया गया है।
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 9 कहता है कि जो व्यक्ति स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त करता है, वह अब भारतीय नागरिक नहीं है। 
  • द पासपोर्ट अधिनियम के अनुसार एक व्यक्ति को अपने भारतीय पासपोर्ट और मतदाता कार्ड को सरेंडर करना होगा और किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त होने के बाद अन्य भारतीय आईडी कार्ड का उपयोग नहीं करना चाहिए। यदि व्यक्ति पासपोर्ट सरेंडर करने में विफल रहता है तो यह एक दंडनीय अपराध है।
  • भारतीय राष्ट्रीयता कानून समान्यतया जूस सिनुजिन (jus sanguinis रक्त के अधिकार द्वारा नागरिकता) का पालन करता है। 
  •  भारत के राष्ट्रपति को संवैधानिक भारत का प्रथम नागरिक माना जाता है।
नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2016

 

  • नागरिकता संशोधन अधिनियम का प्रस्ताव नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन के लिये पारित किया संशोधन विधेयक-2016 में पड़ोसी देशों (बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान) से आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी तथा ईसाई अल्पसंख्यकों (मुस्लिम शामिल नहीं) को नागरिकता प्रदान करने की बात कही गई है, चाहे उनके पास ज़रूरी दस्तावेज़ हों या नहीं।
  • नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार नैसर्गिक नागरिकता के लिये अप्रवासी को तभी आवेदन करने की अनुमति है, जब वह आवेदन करने से ठीक पहले 12 महीने से भारत में रह रहा हो और पिछले 14 वर्षों में से 11 वर्ष भारत में रहा हो। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2016 में इस संबंध में अधिनियम की अनुसूची 3 में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है ताकि वे 11 वर्ष की बजाय 6 वर्ष पूरे होने पर नागरिकता के पात्र हो सकें।
  • भारत के विदेशी नागरिक (Overseas Citizen of India -OCI) कार्डधारक यदि किसी भी कानून का उल्लंघन करते हैं तो उनका पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा।

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