समान नागरिक संहिता के लिए नहीं हुए प्रयास: सुप्रीम कोर्ट – Utkarsh Classes

समान नागरिक संहिता के लिए नहीं हुए प्रयास: सुप्रीम कोर्ट

समान नागरिक संहिता के लिए नहीं हुए प्रयास: सुप्रीम कोर्ट

समान नागरिक संहिता के लिए नहीं हुए प्रयास: सुप्रीम कोर्ट

क्या है खबर?

  • सुप्रीम कोर्ट ने दिए गए एक फैसले में कहा कि देश के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए अभी तक कोई प्रयास नहीं किया गया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट इस संबंध में कई बार कह चुका है।
  • जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस ने गोआ के एक संपत्ति विवाद में फैसला देते हुए समान नागरिक संहिता लागू नहीं होने पर टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि जहां संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद 44 के भाग 4 में नीति निर्देशक तत्व पर चर्चा करते हुए उम्मीद जताई थी कि देश के सभी हिस्सों में समान नागरिक संहिता लागू करने के प्रयास किए जाएंगे।
  • अब तक इस संबंध में कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। हालंकि हिन्दू पर्सनल लॉ को 1956 में कानून की शक्ल दी गई लेकिन उसके बाद समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए। यहां तक कि शाह बानो और सरला मुद्गल के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में समान नागरिक संहिता लाए जाने की सिफारिशों के बाद भी कुछ नहीं हुआ।
  • सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी इसलिए भी अहम है क्योंकि तीन तलाक पर बिल पास करा चुकी बीजेपी सरकार के एजेंडे में कॉमन सिविल कोड भी है मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में इस पर सभी की राय मांगने के लिए लॉ कमीशन भी बनाया गया था जिसने अपनी रिपोर्ट भी सरकार को सौंपी थी लेकिन विपक्ष के भारी विरोध के चलते तीन तलाक की तरह इससे भी सरकार को पीछे हटना पड़ा।

क्या है गोवा का मामला?

  • मामला गोवा के एक परिवार के सम्पत्ति विवाद से जुड़ा था। गोवा में पुर्तगाली सिविल कोड लागू है हालंकि 2016 में पुर्तगाली सिविल कोड के कई प्रावधानों को गोआ उत्तराधिकार कानून से बदल दिया गया था।
  • न्यायालय ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि गोवा समान नागरिक संहिता एक ‘बेहतरीन उदाहरण’ है यहाँ कुछ सीमित अधिकारों को छोड़कर समान नागरिक संहिता धर्म की परवाह किए बिना सब पर लागू है।
  • गोवा में प्रचलित इस संहिता के के अनुसार राज्य में पंजीकृत विवाह करने वाला एक मुस्लिम व्यक्ति बहुविवाह नहीं कर सकता है, विवाह पूर्व समझौते जरूरी होते हैं, एक विवाहित जोड़ा समान रूप से संपत्ति साझा करता है और तलाक के बाद पुरुष और महिला के बीच संपत्ति समान रूप से विभाजित होती है।

क्या पुर्तगाली कानून भारत में लागू हो सकता है?

  • जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि देश में कहीं भी रह रहे गोवावासी का संपत्ति से जुड़ा उत्तराधिकार और दाय अधिकार पुर्तगाली नागरिक संहिता, 1867 से नियंत्रित होगा।
  • सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एक ऐसे मामले में आया है जिसमें यह सवाल उठा था कि गोवा के निवासियों का अधिकार पुर्तगाली नागरिक संहिता, 1867 से नियंत्रित होगा या भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 से नियंत्रित होगा।
  • पीठ ने कहा कि ये कानून तब तक लागू नहीं होते जब तक कि भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं हो और पुर्तगाली नागरिक संहिता भारतीय संसद के एक कानून के कारण गोवा में लागू है इसीलिए अब इसे विदेशी कानून नहीं कहा जा सकता है।

समान नागरिक संहिता

  • समान नागरिक संहिता अथवा समान आचार संहिता का अर्थ एक धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) कानून से होता है जो सभी धर्म के लोगों के लिये समान रूप से लागू होता है।
  • अलग-अलग धर्मों के लिये अलग-अलग सिविल कानून न होना ही ‘समान नागरिक संहिता’ का मूल भावना है।
  • समान नागरिक कानून से अभिप्राय कानूनों के वैसे समूह से है जो देश के समस्त नागरिकों (चाहे वह किसी धर्म या क्षेत्र से संबंधित हों) पर लागू होता है। यह किसी भी धर्म या जाति के सभी निजी कानूनों से ऊपर होता है। विश्व के अधिकतर आधुनिक देशों में ऐसे कानून लागू हैं।
  • भारत के संबंध में समान नागरिक संहिता की बात करें तो भारत का संविधान राज्य के नीति निर्देशक तत्व में अनुच्छेद 44 में सभी नागरिकों को समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करता है। गोवा एक मात्र ऐसा राज्य है जहां यह लागू है।

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