संसद हो पेपरमुक्त/डिजिटल – Utkarsh Classes

संसद हो पेपरमुक्त/डिजिटल

संसद हो पेपरमुक्त/डिजिटल

क्या है खबर?

  • हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सांसदों को कामकाज के लिए अधिक से अधिक डिजिटल तरीकों को अपनाने और कागजों के कम से कम इस्तेमाल का आह्वान किया है।

क्या है डिजिटल संसद की अवधारणा?

  • एक अवधारणा के अनुसार संसद के कार्य जैसे-जैसे डिजिटल होते जाएंगे वैसे-वैसे संसद पेपरमुक्त होती जाएगी।
  • संसद के लगभग सभी कार्य डिजिटल करने का सरकार ने लक्ष्य रखा है जैसे प्रश्न पूछने से पहले नोटिस देना, नोटिस को स्वीकृत करना, कार्यसूची, सारांश, विधेयक की प्रति सांसदों को वितरित करना आदि सरकार के लक्ष्य है जिनमें अधिकतर को डिजिटल कर दिया गया है।
  • डिजिटल संसद की अवधारणा में राज्य की विधानसभाओं को शामिल किया गया है तथा इनको डिजिटल बनाने के लिए नेवा (Neva) (National e-Vidhansabha) प्रोजेक्ट पर संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा कार्य किया जा रहा है जिसका उद्देश्य संसद तथा विधानसभाओं को पेपरमुक्त बनाना है।

क्या होगे इसके लाभ?

  • इससे सरकार के प्रिंटिंग पर खर्च होने वाले धन में बचत होगी जिस पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च हो जाता है।
  • कागज की खरीद का धन भी बचेगा साथ ही कम से कम कागज का इस्तेमाल करके सदन पर्यावरण को बचाने में मदद कर सकेगा।
  • डिजिटल कार्य होने से कार्य के संचालन में तेजी आएगी जैसे प्रश्न पूछने का नोटिस एक क्लिक पर भेजा जा सकेगा तथा स्वीकृति एक क्लिक पर प्रदान की जा सकेगी।
  • सभी कार्य स्वत: ही अंकित हो जाएंगे।

क्या है चुनौतियां?

  • संसद एवं विधानसभाओं के कुछ सदस्य डिजिटल व्यवस्था के प्रति सहज नहीं है। सांसदों एवं विधायकों की अशिक्षा इसमें मुख्य बाधक है।
  • बीच-बीच में इंटरनेट में आने वाली बाधा तथा निर्बाध वाई-फाई सेवाओं की अनुपस्थिति भी डिजिटलीकरण में चुनौती प्रदर्शित करती है।
  • डिजिटल व्यवस्था में डाटा संरक्षण भी एक बड़ी चुनौती प्रकट करता है।
  • पहले से व्याप्त व्यवस्था को बदलने में प्रशासकों की अनिच्छा भी इसके समक्ष चुनौती है।

क्या बताते है आँकड़े?

  • एक आँकड़े के अनुसार संसद तथा राज्य विधानसभाओं के कुल 5379 सदस्य एक साल में लगभग 2 लाख प्रश्नों को पूछते हैं।
  • राज्य विधानसभाओं और संसद में एक साल में लगभग 500 समितियाँ अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती है तथा 1700 विधेयकों को पटल पर रखती है।
  • एक साल में लगभग 17000 पेपर तथा 25000 नोटिस सदन तथा राज्य विधानसभाओं की पटल पर रखे जाते हैं।

निष्कर्ष

  • सदन को डिजिटल बनाना एक अच्छा विचार है जो सदन को सशक्त तथा पर्यावरण अनुकूल बनाएगा लेकिन इसमें बाधाएँ भी कम नहीं है इसके माध्यम से टनों पेपर की बर्बादी को रोका जा सकता है लेकिन अशिक्षित सांसद या विधायक को सदन में जाने से नहीं रोका जा सकता है इस विचार को साकार करने के लिए हमें सदन में शिक्षित सांसदों की संख्या बढ़ानी होगी।

Comments ( 10 )

  • Prakash

    Nice enformacation utkarsh classes jodhpur

  • Deepa Ram ( BSc final )

    Nice news and information by utkarsh

    • Monu

      Jabardasti information utkarsh classes jodhpur

  • Bharat dewasi

    बहुत ही अच्छा विचार है यह होना चाहिए देशहित मे

  • Navin rajpurohit

    Superb information sir

  • Bhanwar Aspirant

    Good new digital india

  • Ramniwas kajla

    Good

  • Anonymous

    Good thoughts

  • Vandana tank

    Good

  • Anonymous

    Good work sir

Leave a Reply to Anonymous Cancel reply