दल बदल कानून के तहत दिल्ली विधानसभा से विधायक अयोग्य घोषित

दल बदल कानून के तहत दिल्ली विधानसभा से विधायक अयोग्य घोषित

क्या है खबर?

  • चांदनी चौक से आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनकर दिल्ली विधानसभा पहुँचने वालीं विधायक अलका लांबा को दल बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित कर दिया गया है इसके लिए आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने विधानसभा अध्यक्ष के सामने अलका लांबा को अयोग्य घोषित करने की याचिका लगाई थी।
  • याचिका पर फैसला देते हुए विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने अलका लांबा को अयोग्य घोषित कर दिया है।  हाल ही में अलका लांबा ने कांग्रेस (Congress) ज्वाइन कर ली थी।
  • अलका लांबा के अयोग्य घोषित होने से दल बदल कानून फिर से चर्चा में आ गया है क्योंकि हाल ही में यह कानून कर्नाटक व गोवा विधानसभाओं के कारण सुर्ख़ियों में रहा है इसके अलावा तीन दिन पहले राजस्थान में बासपा के सभी विधायकों ने कांग्रेस की सदस्यता ले ली है अतः इसको जानना समीचीन प्रतीत होता है।

क्या है दल-बदल कानून?

  • पूर्व में सरकार बनाने के लिए विधायक तथा सांसद परिस्थितियों के अनुसार पार्टियों का पाला बदल लेते थे जिससे सरकार गिर जाती थी यह परिस्थिति तब उभरकर आई जब कांग्रेस के अलावा अन्य पार्टियाँ पटल पर आई।
  • जब हरियाणा के एक विधायक ने एक दिन में तीन बार पार्टी बदली तब इस आयाराम गयाराम पॉलिटिक्स से निजात पाने के लिए दल-बदल कानून को 1985 में लाया गया जिसका उल्लेख संविधान की दसवीं सूची में है इसे संविधान के 52 वें संशोधन से जोड़ा गया था।
  • इस कानून के अनुसार विधायक या संसद अपना दल नहीं बदल सकते हैं। यदि विधायक या सांसद ऐसा करते है तो सदन के अध्यक्ष द्वारा उन्हें अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
  • यदि सदन का मनोनित सदस्य 6 महीने बाद कोई पार्टी का सदस्य बना जाता है, कोई निर्दलीय किसी राजनीतिक दल का सदस्य बन जाता है, सदन का कोई सदस्य अपनी पार्टी की सदस्यता को त्याग देता है या पार्टी के सदस्य व्हिप की लाइन के विरूद्ध जाता है तो सदन का अध्यक्ष इन सदस्यों को अयोग्य घोषित कर सकता है।

क्या हैं इसके अपवाद?

  • सदन का अध्यक्ष अपनी पार्टी की सदस्यता को त्याग सकता है तथा कार्यकाल के बाद पुन: सदस्यता गृहण कर सकता है।
  • यदि किसी पार्टी के दो तिहाई सदस्य अलग हो जाते है तथा किसी अन्य पार्टी के सदस्य बन जाते हैं तो इसे दल-बदल न माना जाकर विलय (Merge) माना जाएगा हाल ही में गोवा तथा तेलंगाना के कांग्रेस सदस्यों ने इसी अपवाद का फायदा उठाया है।

क्या है 2003 का संशोधन?

  • इस संशोधन से पूर्व विभाजन (Split) का विकल्प था जिसमें पार्टी के एक तिहाई सदस्य मुख्य पार्टी से अलग होकर अलग पार्टी बना सकते थे जिसके तहत् अयोग्य घोषित नहीं किया जाता था। इसका दुरुपयोग रोकने के लिए 2003 में संशोधन किया गया तथा विभाजन (Split) के विकल्प को समाप्त कर दिया गया।

क्या आ रही है वर्तमान में समस्याएँ?

  • विधायकों एवं सांसदों ने इसकी कमियों का उपयोग किया है सरकार ने 2003 में विभाजन (Split) को संशोधित कर हटा दिया इसके हटाने का यह फर्क पड़ा कि अब विधायक विलय (Merge) करने लगे है। इसे सामूहिक दल-बदल कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। हाल ही में गोवा के कांग्रेस विधायकों का भाजपा में मिलना इसके उदाहरण है।
  • इस विधेयक के माध्यम से विधायकों एवं सांसदों की वाक् स्वतंत्रता के अधिकार कम होते हैं।
  • विधायक/संसद अच्छे मुद्दे पर भी सरकार की प्रसंशा नहीं कर पाते क्योंकि व्हिप जो आदेश देते हैं विधायकों को उसी लाइन पर चलना होता है।

क्या हुए है इसके प्रभाव?

  • शुरुआत में इस विधेयक ने दल-बदल को रोक दिया किन्तु बाद में विधायकों/सांसदों ने इसकी कमियों को खोज लिया।
  • 2003 के संशोधन के बाद सामूहिक दल-बदल होने लगा तथा विलय (Merge) को बढ़ावा मिला है। इस संशोधन से पूर्व विभाजन (Split) का ज्यादा उपयोग किया जा रहा था। यह आशा के अनुरूप दल-बदल को नहीं रोक पाया है।

क्या है सुझाव?

  • दल-बदल कानून को प्रभावी बनाने के लिए सरकार को इसे मजबूत बनाना होगा क्योंकि यदि किसी पार्टी का सदस्य भले ही विलय (Merge) के माध्यम से दल-बदल से बच गया हो लेकिन उसने मतदाता के मत का उल्लंघन किया है क्योंकि मतदाता किसी पार्टी की विचारधारा के अनुसार ही अपना मत देता है।
  • इसे कुछ परिस्थितियों में लचीला भी बनाना होगा जैसे विधि आयोग की 170 वीं सिफारिश के अनुसार पार्टियाँ, सरकार खतरे में आने पर ही इसका उपयोग करे तथा व्हिप जारी करें इससे सदस्यों की वाक् स्वतंत्रता को भी बल मिलेगा।
  • स्पीकर भी किसी पार्टी का सदस्य होता है जिसमे पार्टी के सदस्य का पक्ष लेने की ज्यादा संभावनाएं होती हैं इसीलिए आयेग्य ठहराने की शक्तियाँ राष्ट्रपति/राज्यपाल के पास होनी चाहिए जिनका उपयोग चुनाव आयोग की सलाह पर किया जाए इसकी सिफारिश  दिनेश गोस्वामी समिति ने भी की है।

No Comments

Give a comment

In light of Pandameic COVID-19, we are offering ONLINE CLASSES for students from 20TH of MARCH onwards. DOWNLOAD NOW
+