एकीकृत उपकरण पहचान रजिस्टर (CEIR – Central Equipment Identity Register) प्रणाली – Utkarsh Classes

एकीकृत उपकरण पहचान रजिस्टर (CEIR – Central Equipment Identity Register) प्रणाली

एकीकृत उपकरण पहचान रजिस्टर (CEIR – Central Equipment Identity Register) प्रणाली

क्या है खबर?

  • दूरसंचार विभाग (DoT) ने मोबाइल फोन के चोरी होने या गुम होने पर रिपोर्ट करने के लिए एक वेबसाइट को लॉन्च किया है। इस नई वेबसाइट के जरिए मोबाइल यूजर्स आसानी से मोबाइल फोन को ट्रेस कर सकेंगे। दूरसंचार विभाग ने CEIR (सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर) पोर्टल को लॉन्च कर दिया है।
  • इस प्लेटफॉर्म को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सबसे पहले महाराष्ट्र के लिए लॉन्च किया गया है। बाद में इस प्रोजेक्ट को देश भर के मोबाइल यूजर्स के लिए लॉन्च किया जाएगा।
  • डीओटी ने CEIR प्रोजेक्ट की शुरुआत 2017 में की थी। अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की तैयारी चल रही है।
  • इस प्लेटफॉर्म पर यूजर्स अपने खोए हुए या चोरी हुए मोबाइल नंबर को ब्लॉक कर सकेंगे, जिसकी वजह से यूजर्स को किसी भी तरह की वित्तीय हानी न पहुंचे।

क्या है एकीकृत उपकरण पहचान रजिस्टर (CEIR – Central Equipment Identity Register)?

  • यह आईएमईआई नंबरों का एक डाटाबेस है। टेलीकॉम विभाग ने जुलाई, 2017 में C-DoT को मोबाइल ट्रैकिंग प्रोजेक्ट ‘सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (CEIR)’ सौंपा था।
  • यह फोन या मोबाइल ब्रॉडबैंड डिवाइस में विशिष्ट 15 अंकों का कोड होता है जो डिवाइस की सटीक पहचान करता है; मॉडल, संस्करण एवं मोबाईल से सम्बंधित अन्य जानकारी इसके माध्यम से प्राप्त की जा सकती है।
  • इसमें हैंडसेट को व्हाइट, ग्रे और ब्लैकलिस्ट किया गया है। इस लिस्ट में व्हाइट IMEI वाले मोबाइल को आप इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं, ग्रे लिस्ट वाले डिवाइस स्टैंडर्ड के मुताबिक तो नहीं हैं लेकिन इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। ग्रे लिस्ट वाले डिवाइस को मॉनिटर किया जाएगा। वहीं, ब्लैकलिस्ट वाले IMEI को यूजर्स इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। ब्लैकलिस्ट IMEI वाले डिवाइस को मोबाइल नेटवर्क कनेक्ट करने का एक्सेस नहीं होगा।
  • मोबाइल फोन गुम होने या चोरी होने के बाद यूजर्स को FIR दर्ज करानी होगी। इसके लिए DoT ने 14422 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। पुलिस कम्प्लेंट के बाद डिपार्टमेंट उस डिवाइस को ब्लैकलिस्ट कर देगा। CEIR के पास भारत में उपयोग की जाने वाली हर डिवाइस के IMEI के बारे में जानकारी होगी, जिसकी वजह से डिवाइस की क्लोनिंग को रोका जा सकेगा।

क्यों है आवश्यकता?

  • इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी (आईएमईआई) को मोबाइल फोन डिवाइस की विशिष्ट पहचान माना जाता है। आईएमईआई नंबर प्रोग्राम करने योग्य है, कुछ शरारती तत्व इस नंबर को रिप्रोग्राम करते हैं, जिससे परिणामस्वरूप आईएमईआई की क्लोनिंग हो जाती है और एक ही आईएमईआई नंबर वाले कई फोन डिवाइस हो जाते हैं।
  • इस समस्या से निपटने के लिए सक्षम उपायों की जरूरत है। ऐसे में एकीकृत उपकरण पहचान रजिस्टर (सीईआईआर) प्रणाली नामक एक परियोजना को सुरक्षा, चोरी और मोबाइल हैंडसेटों की पुनर्संरचना सहित अन्य चिंताओं को दूर करने के लिए दूरसंचार विभाग द्वारा बनाया गया है।
  • आजकल यूजर्स अपने स्मार्टफोन में बैंक डिटेल्स से लेकर कई तरह की निजी जानकारियों को रखते हैं। ऐसे में इस पोर्टल के शुरू हो जाने के बाद से चोरी किए गए स्मार्टफोन को एक्सेस करना मुश्किल हो जाएगा।
  • सीईआईआर परिचालकों को फर्जी आईएमईआई संख्या वाले हैंडसेट की पहचान में भी मदद करेगा। दूरसंचार विभाग नियमों को भी अधिसूचित करने की तैयारी में है, जिसमें आईएमईआई संख्या में छेड़छाड़ दंडनीय अपराध होगा। इसमें तीन साल तक की जेल हो सकती है।

Comment ( 1 )

  • Mahendra gurjar

    I think best knowledge

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