इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग दिशा-निर्देशों एवं विनिर्देशों में संशोधन

इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग दिशा-निर्देशों एवं विनिर्देशों में संशोधन

क्या है खबर ?

  • केन्द्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आर.के. सिंह ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने संबंधी एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग दिशा-निर्देशों एवं विनिर्देशों में संशोधनों को मंजूरी दे दी है।

क्या है दिशा-निर्देशों के मुख्य बिन्दु ?

  • चार्जिंग अवसंरचना या बुनियादी ढांचागत सुविधिाओं से जुड़े ये संशोधित दिशा-निर्देश एवं विनिर्देश 14 दिसम्बर, 2018 को विद्युत मंत्रालय द्वारा जारी पूर्ववर्ती दिशा-निर्देशों एवं मानकों का स्थान लेंगे।
  • इन दिशा-निर्देशों में देश भर में चार्जिंग अवसंरचना का एक समुचित नेटवर्क विभिन्न चरणों में स्थापित करने की परिकल्पना की गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शहरों में 3 किलोमीटर x 3 किलोमीटर के ग्रिड में कम से कम एक चार्जिंग स्टेशन अवश्य ही उपलब्ध हो और इसके साथ ही राजमार्गों/सड़कों के दोनों ओर प्रत्येक 25 किलोमीटर पर एक चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हो।
  • प्रथम चरण – यह परिकल्पना की गई है कि प्रथम चरण (1-3 वर्ष) में 4 मिलियन से अधिक की आबादी वाली (जनगणना 2011 के अनुसार) सभी मेगा सिटी से जुड़े समस्त मौजूदा एक्सप्रेसवे और इनमें से प्रत्येक मेगा सिटी से जुड़े महत्वपूर्ण राजमार्गों को कवर कर लिया जायेगा।
  • दूसरा चरण – दूसरे चरण (3-5 वर्ष) में बड़े शहरों जैसे कि राज्यों की राजधानियों और केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्यालयों को कवर किया जा सकता है। इसके अलावा इनमें से प्रत्येक मेगा सिटी से जुड़े महत्वपूर्ण राजमार्गों को भी इसके दायरे में लाया जा सकता है।
  • फास्ट चार्जिंग स्टेशन – एक शहर से दूसरे शहर में भ्रमण और भारी इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे कि बसों/ट्रकों इत्यादि के लिए प्रत्येक 100 किलोमीटर पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित किया जाएगा। इसके लिए  राजमार्गों/सड़कों के दोनों ओर प्रत्येक 25 किलोमीटर पर एक चार्जिंग स्टेशन होगा।
  • डिस्कॉम रोल – यह मानते हुए कि इलेक्ट्रिक वाहनों की ज्यादातर चार्जिंग घरों अथवा कार्यालयों में ही होगी और वहां ‘फॉस्ट या स्लो चार्जर’ का उपयोग करने का निर्णय उपभोक्ताओं पर निर्भर करेगा, अत: इस बारे में दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि आवास/कार्यालयों में निजी चार्जिंग की अनुमति दी जायेगी और विद्युत वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) इसके लिए अनुमति दे सकती हैं।
  • सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन (पीसीएस) – जहां तक सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों (पीसीएस) का संबंध है, विद्युत मंत्रालय द्वारा यह पहले ही स्पष्ट कर दिया गया है कि पीसीएस की स्थापना एक लाइसेंस रहित गतिविधि होगी और कोई भी व्यक्ति/निकाय सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए स्वतंत्र है।
  • नोडल एजेंसी – विद्युत मंत्रालय के अधीनस्थ वैधानिक निकाय ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) को केन्द्रीय प्रमुख एजेंसी के रूप में नामित किया गया है।
  • चार्जिंग दर – इस आशय का प्रावधान किया गया है कि घरेलू चार्जिंग दरअसल बिजली की घरेलू खपत जैसी ही होगी, अत: उसके लिए शुल्क दरें उसी के अनुसार होंगी। हालांकि, पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों (पीसीएस) के मामले में यह व्यवस्था की गई है कि पीसीएस को विद्युत आपूर्ति की शुल्क दर का निर्धारण उपयुक्त आयोग द्वारा विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 3 के तहत जारी टैरिफ नीति के अनुसार किया जायेगा।

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