उत्तर आंचलिक परिषद् की 29 वीं बैठक – Utkarsh Classes

उत्तर आंचलिक परिषद् की 29 वीं बैठक

29thMeeting of the Northern Zonal Council

उत्तर आंचलिक परिषद् की 29 वीं बैठक

क्या है खबर?

  • उत्तर अंचल परिषद की 29वीं बैठक 20 सितंबर, 2019  को माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में चंडीगढ़ में आयोजित की गई।
  • बैठक में हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री,  जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक और भारत सरकार तथा राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। 

बैठक में क्या विचार विमर्श हुआ?

  • परिषद् ने पिछली बैठक में की गई सिफारिशों के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा की तथा निम्नलिखित मुद्दों पर विशेष ध्यान आकर्षित किया गया:

i) 12 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के खिलाफ यौन अपराधों/बलात्कार की जांच और सुनवाई 2 महीने के भीतर में पूरी करने के लिए विस्तृत निगरानी तंत्र स्थापित करना।

ii) उन गांवों का कवरेज, जो पांच किलोमीटर के रेडियल दूरी के भीतर बिना किसी बैंकिंग सुविधा के रहते हैं, तक भी सभी सुविधाएँ पहुँचाना।

iii) हरियाणा और हिमाचल के मध्य सीमा विवाद से संबन्धित सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत की गई जिससे दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को हल करने में सहायता मिलेगी।

iv) काउंसिल द्वारा पर्यावरण मंत्रालय के कैम्पा फंड की 47436 करोड़ रुपये की कई वर्षों से लंबित राशि के भुगतान पर संतुष्टि जताई।

आंचलिक /जोनल/क्षेत्रीय परिषदें

  • भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 1956 में क्षेत्रीय परिषदों के सृजन का विचार रखा था यह सुझाव राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट पर बहस के दौरान उन्होंने सुझाव दिया था कि राज्यों को चार या पाँच जोनों में बाँटा जाए।
  • राज्यों के बीच अंतर्-राज्यीय सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देने के लिए राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के अंतर्गत पश्चिमी, पूर्वी, उत्तरी, दक्षिणी और मध्य पाँच जोनल परिषदें स्थापित की गई हैं।
  • क्षेत्रीय परिषदों को आर्थिक और सामाजिक आयोजना, सीमा विवाद, भाषाई अल्पसंख्यकों या अंतर्-राज्यीय परिवहन आदि के क्षेत्र में समान हित के किसी भी मामले पर चर्चा करने और सिफारिशें करने का अधिदेश दिया गया है।
  • यह आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से एक दूसरे से जुड़े राज्यों के लिए क्षेत्रीय सहकारी प्रयास हैं। यह उच्च स्तरीय निकाय होने के नाते, विशेष रूप से संबंधित क्षेत्रों के हितों की देखभाल के लिए क्षेत्रीय कारकों को ध्यान में रखते हुए विशिष्ट मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम हैं इसके साथ इसमें राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखा जाता है।
  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप किसी भी जोनल परिषद् के सदस्य नहीं हैं। इन्हें वर्तमान में दक्षिणी जोनल परिषद् के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता है।
  • प्रत्येक जोनल काउंसिल ने एक स्थायी समिति का गठन किया है जिसमें उनके संबंधित क्षेत्रीय परिषदों के सदस्य राज्यों के मुख्य सचिव शामिल हैं। इन स्थायी समितियों की बैठक समय-समय पर होती है ताकि मुद्दों का समाधान किया जा सके अथवा जोनल परिषदों की आगे की बैठकों के लिए आवश्यक जमीनी कार्य किया जा सके। नीति आयोग और अन्य केन्द्रीय मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी आवश्यकता के आधार पर बैठकों से जुड़े हुए हैं।
  • केन्द्रीय गृह मंत्री इनमें से प्रत्येक परिषद् के अध्यक्ष होते हैं। राज्यों के मुख्य मंत्रियों को प्रत्येक जोन के उस क्षेत्र के लिए जोनल परिषद् के उपाध्यक्ष के रूप में एक वर्ष की अवधि के लिए रोटेशन द्वारा शामिल किया जाता है।इन क्षेत्रीय परिषदों में से

प्रत्येक की वर्तमान संरचना इस प्रकार है-

i) उत्तरी जोनल परिषद्, जिसमें हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ शामिल हैं।

ii) केन्द्रीय जोनल परिषद्, जिसमें छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्य शामिल हैं।

iii) पूर्वी जोनल परिषद्, जिसमें बिहार, झारखंड, उड़ीसा, सिक्किम और पश्चिम बंगाल राज्य शामिल हैं।

iv) पश्चिमी जोनल परिषद् जिसमें गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र और संघ राज्य क्षेत्रों दमन और दीव तथा दादरा और नगर हवेली राज्यों को शामिल किया गया है।

v) दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद्, जिसमें आंध्र प्रदेश, कर्णाटक, केरल, तमिलनाडु और संघ राज्य क्षेत्र पुडुचेरी शामिल हैं।

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