प्रदूषण से निपटने के लिए ग्रीन पटाखे

प्रदूषण से निपटने के लिए ग्रीन पटाखे

क्या है खबर

  • वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने ध्वनि और वायु प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों के स्थान पर नए हरित पटाखे विकसित किए हैं।
  • नए प्रकार के अनार, पेंसिल, और चक्कर जैसे अधिक मांग वाले पटाखों के मूल्य, बाजार में उपलब्ध पटाखों से कम या उनके बराबर हैं। नए फार्मूले से बने पटाखों से रोशनी और ध्वनि उत्सर्जन की मात्रा में कमी आती है ये पटाखे प्रदूषण कम फैलाते हैं और इससे पर्यावरण और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
  • पारंपरिक पटाखे से अलग करने के लिए हरित पटाखों पर  एक हरे रंग के लोगो के साथ-साथ एक त्वरित प्रतिक्रिया (QR code) प्रणाली विकसित की गई है।

हरित पटाखे

  • उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2017 में पटाखों की बिक्री पर रोक लगाई थी।
  • हरित पटाखे ‘राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (NEERI)’ की खोज हैं जो पारंपरिक पटाखों जैसे ही होते हैं पर इनके जलने से कम प्रदूषण होता है बाद में CSIR ने हरित पटाखों को विकसित किया ।
  • इन पटाखों में 90 फीसदी तक बेरियम नाइट्रेट Ba(NO3)2 का इस्तेमाल कम तथा कई पटाखों में इसका बिल्कुल प्रयोग नहीं किया जाता है। बेरियम नाइट्रेट Ba(NO3)2  के स्थान पर ऑक्सीडेंट के रूप में पोटैशियम नाइट्रेट KNO3 का इस्तेमाल किया जाता  है।
  • सामान्य पटाखों की तुलना में इन्हें जलाने पर 40 से 50 फ़ीसदी तक कम हानिकारण गैस पैदा होते है , ये पटाखे प्रदूषण कम फैलाते हैं और पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाते है।
  • इन पटाखों की जांच इसमें लगे लोगो और क्यूआर कोड से हो सकेगी।
  • पर्यावरण मंत्रालय ने इससे पहले वर्ष 2017-18 में  ‘हरित दिवाली-स्वस्थ दिवाली’ अभियान चलाया था , जिसका उद्धेश्य पारंपरिक पटाखों के उपयोग को कम करना था।

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR)

  • वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद की स्थापना 1942 में की गई थी ये देश का सबसे बड़ा संस्थान है।
  • इसके प्रथम महानिदेशक श्ंति स्वरूप भटनागर थे और वर्तमान महानिदेशक डॉ. शेखर सी मांदे है।
  • ये एक स्वायत्त संस्था है जिसका वित्तीय प्रबंधन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में अनुप्रयुक्त अनुसंधान और उपयोगी अनुसंधान करना है।
  • CSIR द्वारा 1958 में विज्ञान और प्रोध्योगिकी के क्षेत्र मे दिये जाने वाले ‘शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार’ की शुरुआत की गई थी।

राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (NEERI)

  • राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (NEERI) , वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) का ही एक उपक्रम है।
  • इसकी स्थापना 1958 में नागपुर में हुई थी।  
  • इसका कार्य पर्यावरण विज्ञान एवं इंजीनियरी से सम्बन्धित अनुसंधान एवं एवं व्यावहारिक सुझाव देना है।

Comments ( 5 )

  • Tanishq bansal

    Good information and good job

  • Anonymous

    Perfect news

  • Anshika

    Thanks to utkarsh team
    This is best source of knowledge
    Your content is very helpful for students in the preparation of competitive exams

  • Sonu choudhary

    Perfect & useful news

  • Arvind Kumar

    The excellent work by NEERI and CSIR

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