BPCL विदर्भ में ऐथेनॉल जैव रिफाइनरी स्थापित करेगा

BPCL विदर्भ में ऐथेनॉल जैव रिफाइनरी स्थापित करेगा

क्या है खबर?

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) महाराष्ट्र में पहली ऐथेनॉल जैव रिफाइनरी स्थापित करेगा।

ऐथेनॉल जैव रिफाइनरी के मुख्य बिन्दु –

  • यह रिफाइनरी विदर्भ के भण्डारा जिले में 1500 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित की जाएगी।
  • यह रिफाइनरी भण्डारा जिले के मकराधोका गाँव में स्थापित की जाएगी।
  • इस रिफाइनरी की विस्तार 46 हैक्टेयर क्षेत्र में होगा जहाँ ऐथेनॉल उत्पादन के लिए चावल के डंठल (Rice Straw) का उपयोग किया जाएगा।
  • यह रिफाइनरी एक साल में 2 लाख टन चावल के डंठल का उपयोग करेगी और इससे 700 टन जैव एथेनॉल का उत्पादक हो सकेगा।
  • भण्डारा और गौंडिया जिले प्रतिवर्ष क्रमश: 3.62 लाख टन तथा 3.87 लाख टन चावल के डंठल का उत्पादन करते हैं जिससे कच्चे माल की पूर्ति में कमी नहीं आएगी।
  • इससे प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से 10,000 से भी ज्यादा लोगों को रोजगार प्राप्त होगा।
  • यहाँ आस-पास के जिलों से चालवों के डंठल को इकट्‌ठा किया जाएगा इनको काटकर सुखाया जाएगा बाद में रिफाइनरी में सप्लाई किया जाएगा।

भारत पेट्रोलियम कोरपोरेशन (निगम) लिमिटेड-

  • यह भारत सरकार की लोक उपक्रम कंपनी है जिसे महारत्न का दर्जा प्राप्त है।
  • कम्पनी का मुख्यालय महाराष्ट्र के मुम्बई में स्थित है।
  • फार्च्यून ने 2016 में इसे 342 वें स्थान पर रखा था।
  • सितम्बर, 2018 तक इसके शेयर 54% भारत सरकार के पास, 17% विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के पास, 9% निवेश के लिए भारतीय पेट्रोलियम कोरपोरेशन निगम लिमिटेड ट्रस्ट के पास, 7.5% म्यूचुअल फंड व यूटीआई के पास तथा 6% बीमा कम्पनियों के पास बाकी आम लोगों के पास थे।

क्या होगा रिफाइनरी का फायदा?

  • इससे राष्ट्रीय जैव ईंधन पॉलीसी 2018 के उद्देश्यों को पाने में मदद मिलेगी।
  • वर्तमान में पेट्रोल में ऐथेनॉल का उपयोग 2% ही है। इसे 2030 तक 20% तक पहुँचाना है।
  • वर्तमान में बायोडीजल का डीजल में उपयोग 0.1% से भी कम है 2030 तक इसे 5% तक पहुँचाना है।
  • इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी जिससे 2022 तक किसानों की आय दो गुना करने के सरकार के लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी।
  • इससे प्रदूषण को कम करने में सहायता मिलेगी।
  • सरकार की जीवाश्म ईंधन की निर्भरता कम होगी तथा विदेशी मुद्रा की बचत होगा।

जैव ईंधन नीति – 2018

  • नीति में गन्ने का रस, चुकंदर, भुट्टा, कसावा मनुष्य के उपयोग हेतु अनुपयुक्त अनाज, टूटे हुए चावल, सड़े हुए आलू आदि को जैव ईंधन के उपयोग हेतु स्वीकृति प्रदान कर उपभोग का दायरा बढ़ाया गया है।
  • इसे जैव ईंधन का प्रथम पीढ़ी, द्वितीय पीढ़ी तथा तृतीय पीढ़ी में विभाजित किया गया है ताकि पीढ़ी के अनुसार निवेश को सुनिश्चित किया जा सके तथा जैव ईंधन को बढ़ावा दिया जा सके।
  • इस नीति में जैव ईंधन की समन्वय समिति की स्थापना की बात कही गई है जो प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में स्थापित की जाएगी।
  • बम्पर उत्पादन हो जाने पर उत्पाद को समन्वयन समिति की मंजूरी मिलने पर किसानों से खरीदकर जैव ईंधन के लिए उपयोग किया जा सकेगा।
  • जैव ईंधनों के लिए नीति में 2 जी ऐथेनॉल जैव रिफाइनरी के लिए कर प्रोत्साहन उच्च खरीद मूल्य के अलावा आने वाले समय में निवेश बढ़ाने के संकेत दिए हैं।
  • नीति के अन्तर्गत गैर खाद्य तिलहनों, इस्तेमाल किए जा चुके खाना पकाने के तेल, जल्द पकने वाली फसलों को जैव ईंधन की आपूर्ति चक्र के साथ जोड़ा जाएगा।
  • इस नीति का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, स्वच्छ ईंधन तथा भारत की जीवश्म ईंधन में निर्भरता को कम करना भी है।

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