मंत्रिमंडल ने 2020 सीजन के लिए खोपरा के न्यूनतम समर्थन मूल्यों को दी मंजूरी – Utkarsh Classes

मंत्रिमंडल ने 2020 सीजन के लिए खोपरा के न्यूनतम समर्थन मूल्यों को दी मंजूरी

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने 2020 सीजन के लिए खोपरा के न्यूनतम समर्थन मूल्यों (एमएसपी) को अपनी मंजूरी दे दी है।

मुख्य बिन्दु

  • अच्छी औसत गुणवत्ता (एफएक्यू) के मीलिंग खोपरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2020 सीजन के लिए बढ़ाकर 9,960 रूपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जबकि 2019 में इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 9,521 रूपये प्रति क्विंटल था। 2020 सीजन के लिए बाल खोपरा का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 10,300 रूपये प्रति क्विंटल किया गया, जबकि 2019 में यह 9,920 रूपये प्रति क्विंटल था।
  • इससे उत्पादन की अखिल भारतीय भारित औसत लागत के मुकाबले मीलिंग खोपरा के लिए 50 प्रतिशत और बाल खोपरा के लिए 55 प्रतिशत का लाभ सुनिश्चित होगा। यह अनुमोदन कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों पर आधारित है।
  • 2020 सीजन के लिए खोपरा के न्यूनतम समर्थन मूल्यों में यह बढ़ोतरी उत्पादन की अखिल भारतीय भारित औसत लागत से कम से कम डेढ़ गुणा स्तर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने के सिद्धांत के अनुरूप है, जिसकी घोषणा सरकार ने 2018-19 के बजट में की थी।
  • यह वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी संभव बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और विकासात्मक कदमों में से एक हैं क्योंकि यह कम से कम 50 प्रतिशत लाभ के मार्जिन का आश्वासन देता है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price)

  • बम्पर उत्पादन के समय कृषि उत्पादों के मूल्यों में होने वाली कमी से किसानों के हितों को सुरक्षित करने के लिए न्यूनतम मूल्य निर्धारित किया जाता है अत: निर्धारित मूल्य से कम बाजार मूल्य होने पर कृषि उत्पाद सरकार को निर्धारित मूल्य पर बेचा जा सकता है। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिश पर सरकार द्वारा बुवाई के समय न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया जाता है।
  • सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य 25 फसलों के लिए जारी किया जाता हैं जिसमें 7 अनाज (धान, गेहूँ, जौ, ज्वार, बाजरा, मक्का, रागी), 5 दलहन (चना, अरहर, मूंग, उदड़, मसूर) 8 तिलहन (मूंगफली, सरसों, तोरिया, सूरजमुखी बीज, सोयाबीन नाइजरसीड, सेसमम, कुसुम के बीज) तथा 5 बागवानी फसलें (कोपरा, नारियल, कच्चा कपास, जूट) शामिल हैं।
  • न्यूनतम् समर्थन मूल्य को उत्पादन लागत, आगत कीमतों में परिवर्तन, मांग और आपूर्ति, बाजार की कीमतों का रुझान, अंतरफसलीय मूल्य समतुल्यता, अंतर्राष्ट्रीय कीमतों की स्थिति, सामान्य, मूल्य स्तर पर प्रभाव, किसानों द्वारा प्राप्त कीमतों और कीमतों के बीच समानता के आधार पर निर्धारित किया जाता है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की बढ़ोतरी का कारण?

  • कृषि उत्पादन मूल्य की समय के साथ बढ़ती लागत।
  • सरकार द्वारा 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य।
  • कृषि एवं लागत मूल्य आयोग द्वारा कृषि लागत का 1.5 गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य करने की सिफारिश।

इससे अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव –

  • इससे अर्थव्यवस्था में वित्तीय समता को बढ़ावा मिलेगा।
  • किसानों की आय में वृद्धि से किसानों की आर्थिक समृद्धि होगी।
  • किसानों के पास आया अतिरिक्त धन अर्थव्यवस्था को गतिशीलता प्रदान करेगा।
  • यह बढ़ोतरी किसानों को कृषि छोड़ने से रोकेगी क्योंकि किसान कृषि में लाभ न होने से इसे छोड़ देते हैं।
  • कृषि छोड़ने के बाद किसान शहर की ओर पलायन करते थे इससे किसानों का शहर की ओर पलायन रूकता है।

इस बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव –

  • किसानों के पास अतिरिक्त पैसा आने से मुद्रास्फीति बढ़ सकती है।
  • यह WTO के नियमों के विरुद्ध है अत: यह भारत की छवि को नुकसान पहुँचाएगा।
  • कोपरा में अधिक वृद्धि होने से इसके उत्पादन में किसान ज्यादा रूचि लेंगे और अनाज का उत्पादन कम होगा।
  • यह खरीद सरकार के राजकोषीय घाटे को बढ़ा सकती है।

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