SCO के शासनाध्यक्ष परिषद की 18वीं बैठक

SCO के शासनाध्यक्ष परिषद की 18वीं बैठक

चर्चा में क्यों ?

  • केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने ताशकंद में सम्पन्न हुई शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शासनाध्यक्षों (सीएचजी) की परिषद की दो दिवसीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
  • शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organization-SCO) के शासनाध्यक्षों की परिषद (Council of Heads and Governments-CHGs) की 18वीं बैठक हाल ही में उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में आयोजित की गई।

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) –

  • SCO यूरेशिया का राजनीतिक, आर्थिक, और सैनिक संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में शंघाई में चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान देशों द्वारा मिलकर की गई थी।
  • 24 जून, 2016 को भारत और पाकिस्तान को भी औपचारिक तौर पर अस्ताना म॓ॱ आयोजित शिखर सम्मेलन में संगठन का सदस्य बनाया गया।
  • चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस और तजाकिस्तान ने 1996 मेॱ “शंघाई V” नाम से संगठन की स्थापना शंघाई में की थी।
  • वर्ष 2001 में आयोजित शिखर सम्मेलन में उज्बेकिस्तान को शामिल कर “शंघाई VI” में बदल दिया गया जो अब शंघाई सहयोग संगठन ( Shanghai Cooperation Organization) या SCO नाम से जाना जाता है।
  • SCO का मुख्यालय बीजिंग में है।
  • SCO देशों के साथ संयुक्त अभ्यास में शामिल होगा । भारत भारत SCO के सदस्य देशों के साथ आगामी फरवरी में शहरी क्षेत्रों में भूकंप से बचाव पर संयुक्त अभ्यास में शामिल होगा। यह अभ्यास 21 से 24 फरवरी 2019 तक राजधानी दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इसके मद्देनजर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) ने 1 नवंबर से दो दिवसीय बैठक का आयोजन किया, इसमें आठ देश भारत, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, तजाकिस्तान और उज़्बेकिस्तान शामिल हैं।
  • वर्तमान में SCO के आठ सदस्य देश-भारत, कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, तजाकिस्तान और उज़्बेकिस्तान हैं।
  • वर्ष 2005 में भारत और पाकिस्तान इस संगठन में पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हुए थे और वर्ष 2017 में इन दोनों देशों को इस संगठन के पूर्ण सदस्य का दर्जा प्रदान किया गया। इसके चार पर्यवेक्षक और छह संवाद सहयोगी भी हैं।
  • इस मंच का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय ‘शासनाध्यक्ष परिषद’ है। शासनाध्यक्ष परिषद की वार्षिक बैठक में सदस्य देशों के प्रमुख हिस्सा लेते हैं।

SCO के शासनाध्यक्षों की परिषद की 18वीं बैठक –

  • इस प्रकार की बैठक में भारत की यह तीसरी भागीदारी थी। पहली बैठक नवंबर-दिसंबर 2017 में रूस के सोची नगर में हुई थी और दूसरी बैठक 2018 में तजाकिस्तान के दुशांबे शहर में हुई थी।
  • आतंकवाद से निपटने एवं विकास के प्रयासों को मज़बूती देने के लिये SCO देशों के सहयोग पर बल दिया गया। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन, गरीबी और असमानता को कम करने के मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
  • भारत द्वारा कहा गया कि चीन के बाद SCO क्षेत्र में भारत दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत, क्षमता निर्माण और कौशल विकास में अपना अनुभव साझा कर सकता है जिसमें संसाधन मानचित्रण, कृषि शिक्षा, उपग्रहों का प्रक्षेपण, फार्मास्यूटिकल्स, टेलीमेडिसिन, चिकित्सा पर्यटन, आतिथ्य एवं वित्तीय सेवाएँ शामिल हैं।
  • वैश्वीकरण ने SCO सदस्यों के विकास के लिये अपार अवसर खोले हैं। हालाँकि इसने कई चुनौतियाँ भी पैदा की हैं। विशेष रूप से विकसित अर्थव्यवस्थाओं में अलगाववाद और संरक्षणवाद की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इस परिस्थिति में SCO, विश्व व्यापार संगठन (WTO) के साथ एक पारदर्शी, नियम आधारित, खुला, समावेशी और भेदभाव रहित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली है।
  • SCO में शामिल देश प्राकृतिक आपदाओं और पर्यावरणीय प्रभाव से ग्रस्त हैं। इन समस्याओं को कम करने के उद्देश्य से भारत ने एससीओ सदस्य देशों को कोएलिशन फॉर डिज़ास्टर रेजिलियेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure) में शामिल होने के लिये आमंत्रित किया।
  • भारत द्वारा सितंबर 2019 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के एशियाई जलवायु कार्रवाई सम्मेलन में कोएलिशन फॉर डिज़ास्टर रेज़िलियेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) के लिये रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ताशकंद में सम्पन्न हुई शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शासनाध्यक्षों (सीएचजी) की परिषद की दो दिवसीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
  • SCO के शासनाध्यक्षों की परिषद की बैठक के अलावा भारत तथा उज़्बेकिस्तान के मध्य द्विपक्षीय वार्ता हुई जिसमें कुछ प्रमुख समझौतों (MOUs) पर हस्ताक्षर किये गए।
  • भारत ने उज़्बेकिस्तान द्वारा भारत से वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद के लिये 40 मिलियन डॉलर की रियायती छूट (Line of Credit) दी है।
  • दोनों देशों की सेनाओं के बीच सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग के लिये समझौता हुआ।
  • इसके साथ ही दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और सैन्य शिक्षा के क्षेत्र में परस्पर आदान-प्रदान किया जाएगा। इसके लिये दोनों देशों के उच्च सैन्य शिक्षण संस्थानों के मध्य समझौता हुआ जिसमें भारत का कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट, सिकंदराबाद तथा आर्म्ड फोर्स अकादमी ऑफ उज़्बेकिस्तान, ताशकंद शामिल हैं।
  • भारत और उज़्बेकिस्तान के मध्य पहला संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक-2019’ (Dustlik-2019) ताशकंद में प्रारंभ किया गया।

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