सेबी पर बढ़ता सरकार का नियंत्रण

सेबी पर बढ़ता सरकार का नियंत्रण

क्या है खबर?

हाल ही में पारित वित्त विधेयक के माध्यम से भारतीय प्रतिभूति तथा विनिमय बोर्ड 1992 (SEBI 1992) को संशोधित किया गया है जो सेबी की शक्ति में कमी करता है।

क्या है संशोधन?

इस संशोधन के अनुसार सेबी को प्रत्येक वर्ष अपने कुल आधिक्य में से 75% केन्द्र सरकार को स्थानान्तरित करना होगा तथा 25% रक्षित निधि के रूप में रखना होगा।

क्या है इसमें समस्या?

  • यह संशोधन सेबी की स्वायत्तता पर वार करता है।
  • हालांकि सेबी से जो निधि सरकार को मिलेगी वह इतनी नहीं है कि भारत की राजकोषीय नीति पर प्रभाव डाले।
  • यह संशोधन सेबी को अपनी नई नीति निर्धारण नहीं करने देगा तथा सरकार की स्वीकृति बाध्य बनाएगा क्योंकि वित्त की आवश्यकता पड़ने पर उसे सरकार से स्वीकृति लेनी होगी।
  • कोई भी संस्था जो स्वायत्त न हो तो उसके क्रियाकलापों पर सरकार की इच्छा के अनुसार अंजाम दिया जाता है जिसमें सामान्यज्ञ द्वारा मुद्दे का विश्लेषण किया जाता है जो कई बार समस्या उत्पन्न कर देता है।
  • इससे सेबी को नई तकनीकी तथा अन्य संरचनाओं के विकास करने हेतु सरकार पर निर्भर रहना होगा जो लम्बे समय में भारत के वित्तीय बजार को प्रभावित करेगा।

क्या हो सकती है वजह?

  • इस समय हमें सरकार की केन्द्रीकरण की नीति देखने को मिली है चाहे वह सूचना का अधिकार संशोधन विधेयक 2019 हो या सेबी संशोधन इसमें सरकार ने केन्द्रीय सरकार की स्थिति को मजबूत किया है।
  • हालांकि इतने कम वित्त में सरकार की राजकोषीय नीति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा या यह सरकार के वित्तीय समेकन में कोई खास प्रभाव नहीं डालेगा लेकिन यह दृष्टिकोण भी केन्द्रीकरण की सोच को प्रस्तुत करता है।
  • हो सकता है कि सरकार का मकसद केवल आधिक्य वित्त को ही पाना हो ताकि इसका उपयोग वह लोक कल्याण में कर सके। क्योंकि बूंद-बूंद से ही घड़ा भरता है।

निष्कर्ष

हो सकता है कि सरकार का मकसद केवल वित्त प्राप्त करना हो लेकिन इसी वित्त से सेबी अपनी आधारभूत संरचना का विकास करता है तथा वित्तीय बाजार का नियंत्रण करता है इसी वित्त से सेबी शेयरधारकों के हितों को सुरक्षित करता है तथा कॉर्पोरेट गवर्नेंस को बढ़ावा देता है। यदि सेबी के पास वित्त की कमी हो जाएगी तो वह इन सब कार्यों को सही से संचालित नहीं कर पाएगी और अधिक धन के उपयोग के लिए उसे सरकार से स्वीकृति लेनी होगी जिससे सरकार अपनी नीतियों के अनुसार स्वीकृति दे सकती है तथा नीतियों के विपरीत होने पर स्वीकृति रोक सकती है जो वित्तीय बाजार में लोगों के हितों को प्रभावित कर सकता है।

सेबी

  • यह वित्त एवं प्रतिभूतियों का नियामक बोर्ड है जिसे Security Exchange Board of India (SEBI) कहते हैं।
  • इसकी स्थापना 12 अप्रैल, 1988 को हुई 1992 में भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड अधिनियम 1992 पारित हुआ और इसे वैधानिकता प्राप्त हुई।
  • इसका मुख्यालय मुंबई में है इसके क्षेत्रीय कार्यालय दिल्ली, कोलकाता, अहमदाबाद तथा चेन्नई में है।
  • सेबी का प्रमुख उद्देश्य प्रतिभूति बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों के हितों का संरक्षण करना है साथ ही बाजार का विकास तथा नियमों के माध्यम से बाजार को विनियमित करना है।
  • वर्तमान में सेबी के अध्यक्ष श्री अजय त्यागी है।

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