सरोगेसी (विनियमन्) विधेयक 2019

सरोगेसी (विनियमन्) विधेयक 2019

क्या है खबर?

हाल ही में सरकार ने सरोगेसी (विनियमन्) विधेयक 2019 को लोकसभा में रखा था जहाँ इसे मंजूरी प्राप्त हो गई है।

क्या है सरोगेसी?

सरोगेसी एक व्यवस्था है जो सामान्यत: कानून के तहत् बंधित होती है इस व्यवस्था के माध्यम से निसंतान दम्पत्ति किसी अन्य औरत की कोख को कराए पर लेते हैं ताकि संतान को प्राप्त कर सकें ऐसा इसीलिए किया जाता है क्योंकि दम्पत्ति संतान उत्पत्ति में अक्षम होते हैं या संतान उत्पत्ति में अत्यधिक खतरा होता है।

क्या है विधेयक में प्रावधान?

  • इस विधेयक में कॉमर्शियल सरोगेसी को प्रतिबंधित किया गया है। इसका उल्लंघन करने पर 10 साल का कारावास और 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
  • सरोगेसी के व्यवसायिक इस्तेमाल के पहले अपराध पर पाँच साल की सजा और पाँच लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
  • यदि सरोगेसी का व्यवसायिक इस्तेमाल दोबारा किया जाता है तो कारावास की अवधि बढ़कर 10 साल और जुर्माने की राशि 10 लाख हो सकती है।
  • सिर्फ उन भारतीय दंपत्तियों को ही सरोगेसी से संतान उत्पत्ति की अनुमति होगी जो संतान उत्पन्न करने में अक्षम है ऐसे दम्पत्ति के लिए उनकी निकटवर्ती रिश्तेदार ही सरोगेट माँ बन सकेगी।
  • सरोगेट माँ की उम्र 25 से 35 साल के बीच होनी चाहिए और उसका पहले से अपना एक बच्चा होना चाहिए।
  • सरोगेट मां को मात्र एक बार ही सरोगेसी की अनुमति होगी।
  • प्रस्तावित विधेयक के तहत् सरोगेसी क्लीनिक का पंजीकरण अनिवार्य होगा और कोई भी व्यक्ति या क्लीनिक सरोगेसी का व्यावसायिक इस्तेमाल या प्रचार नहीं कर पाएगा।
  • इस विधेयक में सरोगेसी के नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर बोर्ड के गठन का प्रस्ताव है।
  • इसमें विवाहित दंपत्ति (महिला आयु 23-50 तथा पुरुष आयु 26-55) को ही सरोगेसी से संतान प्राप्त करने का प्रावधान किया गया है।

क्या होंगे इस विधेयक के लाभ?

  • भारत में अभी सरोगेसी को विनियमित करने के लिए कोई कानूनी नहीं है इससे सरोगेसी को विनियमित किया जा सकेगा।
  • इस विधेयक में परोपकारी सरोगेसी को अनुमति दी गई है। यह उन सरोगेसी की घटनाओं को रोकेगा जिसमें माता-पिता सक्षम होते हुए भी सरोगेसी से बच्चे प्राप्त करते हैं।
  • इस विधेयक में राज्य तथा केन्द्र स्तर पर सरोगेसीबोर्ड का प्रस्ताव है जो विनियमन् को
    सुनिश्चित करेंगें।
  • कई निसंतान दम्पत्तियों की संतान प्राप्त करने की राह आसान होगी।
  • सरोगेट माता करीबी होने के कारण दंपत्ति उसकी अच्छी तरह देखभाल कर सकते हैं।
  • इस विधेयक से भारत को सरोगेसी हब के रूप में उभरने से रोका जा सकेगा।
  • इस विधेयक से उन सरोगेसी क्लीनिकों पर लगाम लगेगी जिन्होंने सरोगेसी को एक व्यवसाय बना लिया था तथा विभिन्न अनैतिक गतिविधियों का उपयोग इस व्यवसाय को बढ़ाने के लिए करते थे।

क्या है इसकी कमियाँ?

  • हालांकि इस विधेयक से कॉमर्शिलयल सरोगेसी पर लगाम लगेगी लेकिन यह विधेयक उन महिलाओं के जीवन यापन का जरिया छीनता है जो जीवनयापन के लिए पूर्णत: सरोगेसी पर निर्भर है।
  • विधेयक शादीशुदा निसंतान दंपत्ति को शादी के पाँच साल पूर्ण होने के बाद ही सरोगेसी के माध्यम से बच्चा प्राप्त करने का अधिकार देता है जो कि बहुत ज्यादा इंतजार कहा जा सकता है।
  • यह विधेयक लिव इन में रहने वाले दंपत्ति को सरोगेसी के माध्यम से बच्चा प्राप्त करने के अधिकार के मामले में मौन है।
  • सरोगेट माँ की निश्चित आयु के अनुरूप कोई करीबी रिश्तेदार न होने पर दंपत्ति संतान प्राप्ति से वंचित हो सकते हैं।

आगे की राह –

सरोगेसी भारत में चर्चित शब्द बन गया है क्योंकि भारत कॉमर्शियल सरोगेसी हब बनने की कगार पर है। सरकार द्वारा सरोगेसी विनियमन उचित ही है क्योंकि कॉमर्शियल सरोगेसी मे कई बार वह स्थिति भी उत्पन्न हुई जब सरोगेट माँ के बच्चे को बच्चा प्राप्त करने के इच्छुक दंपत्ति ने अपनाने से इनकार कर दिया इसके अलावा सरोगेट महिला का शोषण, सरोगेट माँ का बच्चे से लगाव लेकिन अंतत: विलगाव जैसे मुद्दें सरोगेसी को संवेदनशील बनाते हैं।

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