राष्ट्रीय जलमार्ग-I और गंगा डॉल्फिन

राष्ट्रीय जलमार्ग-I और गंगा डॉल्फिन

क्या है खबर?

हाल ही में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संसद में मुद्दा उठाया है कि राष्ट्रीय जलमार्ग-I के विकास के साथ सरकार गंगा डॉल्फिन को कैसे सुरक्षित कर रही है।

क्या है मुद्दा?

  • भारत का जलमार्ग-I (जो हल्दिया को वाराणसी से जोड़ता है) विकसित किया जा रहा है जिससे मालवाहक जहाजों तथा इनकी गति से डॉल्फिन को नुकसान हो सकता है।
  • इसी मार्ग में भारत की एक मात्र विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य पड़ता है जहाँ गंगा डॉल्फिन का संकेन्द्रण पाया जाता है।
  • डॉल्फिन के साथ अन्य प्रजातियों को भी नुकसान पहुँचने से जैव विविधता की हानि होने का खतरा बढ़ेगा।
  • सरकार का कहना है कि वह जलयानों की गति कम करने, हॉर्न का उपयोग करने, विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन में गति 2.7 नॉट करने पर कार्य कर रही है ताकि जलमार्ग के विकास के साथ जैवविविधता सुनिश्चित की जा सके।

विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य

  • विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य की स्थापना गंगा डॉल्फिन के संरक्षण के प्रयास के तहत् 1999 में बिहार के भागलपुर जिले में की गई।
  • यह गंगा डॉल्फिन के संरक्षण हेतु एक मात्र अभयारण्य है।
  • इसका विस्तार 50 किमी. में है यह सुल्तानगंज से कहलगाँव तक फैला है।
  • पहले यहाँ गंगा डॉल्फिन बहुतायत में थी अब यहाँ इनकी संख्या 100-200 तक सीमित हो गई है।
  • विभिन्न बाँधों, रासायनिक खाद्य, कीटनाशक तथा औद्योगिक प्रदूषण के नदी में प्रवाह से इन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

गंगा डॉल्फिन के संदर्भ में कुछ तथ्य –

  • गंगा डॉल्फिन भारत में ताजे पानी में पाई जाने वाली एक मात्र डॉल्फिन है।
  • यह भारत, बांग्लादेश तथा नेपाल में गंगा, ब्रह्मपुत्र, मेघना, करमाफूली नदी क्षेत्र में पायी जाती है।
  • 2009 में गंगा डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलचर घोषित किया गया इसका वैज्ञानिक नाम Plantanista Gangetica है।
  • ये लगभग पूरी तरह अंधी होती है और अल्ट्रासॉनिक इको का उपयोग जीवन जीने के लिए करती है इसी का उपयोग शिकार ढूंढने में, बचने में, साथी को ढुंढने में तथा बच्चो को पालने में करती है।
  • ये सामान्यत: 5 से 8 मीटर गहरे पानी में रहना पसंद करती है।
  • भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की अनुसूची I के तहत् इन्हें रखा गया है तथा IUCN (International Union for conservation of Nature) में इन्हें संकटापन्न (Endagered) की श्रेणी में रखा गया है।
  • इनके संरक्षण के लिए पर्यावरण मंत्रालय ने 1997 में गंगा नदी डॉल्फिन संरक्षण प्रोग्राम चलाया था।
  • अक्टूबर, 2018 में राष्ट्रीय डॉल्फिन रिसर्च सेंटर की स्थापना पटना में की गई है यह भारत तथा एशिया का पहला डॉल्फिन रिसर्च सेंटर हैं।

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