पाँचवा एक्वा एक्वेरिया इंडिया 2019

पाँचवा एक्वा एक्वेरिया इंडिया 2019

क्या है खबर?

  • भारत के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने 5वें एक्वा एक्वरिया इंडिया 2019 का उद्घाटन किया। यह भारत का अंतर्राष्ट्रीय एक्वाकल्चर शो है।
  • यह समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) द्वारा हैदराबाद में आयोजित किया गया था।

भारत में मत्स्य पालन और जलीय कृषि (fisheries and aquaculture in India) की स्थिति?

  • भारत 2018-19 के दौरान 13.70 मिलियन मीट्रिक टन मछली के उत्पादन के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक है।
  • 2017-18 में मछली का भारत के कुल निर्यात में लगभग 10% और कुल कृषि निर्यात में लगभग 20% हिस्सा है। यूएस $ 7 बिलियन की निर्यात आय के साथ, भारत दुनिया में मछली का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक देश है।
  • 47,600 करोड़ रुपये से अधिक के समुद्री उत्पादों के निर्यात के अलावा, यह क्षेत्र 14.5 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करता है, जो भारतीय तट के दूरदराज के गांवों में रहते हैं।
  • जीडीपी में मत्स्य पालन का योगदान लगभग 1% और कृषि जीडीपी का लगभग 5.37% है।
  • चूंकि 16% से अधिक पशु प्रोटीन की आपूर्ति मत्स्य क्षेत्र से होती है, इसलिए इस क्षेत्र की पहचान खाद्य सुरक्षा में योगदान देने वाले प्रमुख कारक के रूप में की जाती है।
  • वैश्विक प्रति व्यक्ति खाद्य मछली की खपत 20.7 किग्रा / प्रति वर्ष आंकी गई है। इसमें से 11.4 किलोग्राम (55%) एक्वाकल्चर द्वारा योगदान दिया जाता है और बाकि मत्स्य पालन द्वारा किया जाता है।
  • वर्तमान में भारतीय मीठे पानी वाले एक्वा काल्चरिस्ट द्वारा अपनाई जाने वाली प्रणालियाँ उन्नत नहीं कही जा सकती हैं क्योंकि भारत में 1.5 – 4.5 टन / हेक्टेयर पैदावार होती हैं। यह उत्पादकता चीन और इज़राइल जैसे देशों में 10 से 15 टन / हेक्टेयर की तुलना में बहुत कम है।
  • एशिया दुनिया में सबसे बड़ा मछली उत्पादक है और 2016 में, मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्रों में लगी वैश्विक आबादी का 85% एशिया में ही था।

क्या हमारे पास इस क्षेत्र के लिए आशीर्वाद है?

  • भारत को स्थायी उपयोग के लिए मछली की समृद्ध विविधता के साथ विशाल जलीय संसाधनों का आशीर्वाद प्राप्त है। हमारे देश में मछली की लगभग 2,200 प्रजातियाँ हैं, जो विश्व स्तर पर रिपोर्ट की जाने वाली सभी मछलियों की प्रजातियों का लगभग 11% है।
  • 8000 किलोमीटर से अधिक की लंबी तटरेखा के साथ, 2.02 मिलियन वर्ग कि.मी. का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र, 0.5 मिलियन वर्ग किलोमीटर महाद्वीपीय शेल्फ क्षेत्र है एक अनुमान के अनुसार, भारत में 3.9 मिलियन मीट्रिक टन के मत्स्य संसाधन हैं, जिनमें से केवल 3.0 मिलियन मीट्रिक टन का ही दोहन किया जाता है।

समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA)

  • समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) की स्थापना 1972 के दौरान संसद के एक अधिनियम द्वारा की गई थी। इससे पूर्व भारत सरकार द्वारा सितंबर 1961 में समुद्री उत्पाद निर्यात संवर्धन परिषद को स्थापित किया गया था जिसे 24 अगस्त 1972 को MPEDA में परिवर्तित कर दिया गया था।
  • एमपीईडीए को देश से निर्यात के लिए विशेष संदर्भ के साथ समुद्री उत्पाद उद्योग को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है।
  • एमपीईडीए भारत में समुद्री खाद्य उद्योग के समग्र विकास के लिए नोडल एजेंसी है, जिसे नोडल एजेंसी के रूप में अपनी पूर्ण निर्यात क्षमता के विकास हेतु अधिकार प्राप्त है। एमपीईडीए की सिफारिशों के आधार पर, भारत सरकार ने मछली पकड़ने के जहाजों, भंडारण परिसरों, प्रसंस्करण संयंत्रों और संवहन के लिए नए मानकों को अधिसूचित किया है।
  • एमपीईडीए का ध्यान मुख्य रूप से मार्केट प्रमोशन, कैप्चर फिशरीज, कल्चर फिशरीज, प्रोसेसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड वैल्यू एडिशन, क्वालिटी कंट्रोल, रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर है।

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