“जिंदगी के सबक”

“जिंदगी के सबक”

हर सुबह कोहरा नहीं छायेगा। हर सुबह चटक धूप भी नहीं होगी। दोपहर में धूप का घमघमा कभी सतायेगा तो कभी सुहाना लगेगा। सूरज के डूबने से दिन की दुर्दशा होती है लेकिन रात का अनिर्वचनीय सौंदर्य उसी से निखरता है।

जिन्दगी कई अवसरों पर टोकारा देकर हमें सबक सिखाती रहती है। हो सकता है आप अभी जिन्दगी के किसी कठोर दौर से गुजर रहे हो लेकिन ऐसे ही दौर में आप दिलोदिमाग से मजबूत होते चले जाते है। इस दौर में किसी के प्रति नफरत पालकर अपने पास नकारात्मक ऊर्जा को पनपने का कोई अवसर ना दें।

मुश्किल दिन बरसती हुई बारिशाें की तरह निकल जाते है लेकिन वे हमें भरे हुए तालाब, खिली हुई वनस्पति और अंग-प्रत्यंग में खिलखिलाती प्रकृति के मनोरम दृश्य देकर जाते हैं।

कठिन दिनों में लक्ष्य पर मजबूती से कायम रहें। दूसरों को मिटाने के बजाय अपने को बनाने पर ध्यान केन्द्रित करें। आराम करने के बजाय अपने को अधिक व्यस्त रखें। अवाप्त कौशलों और कलाओं को धार देते रहें।। ऐसे में हसी-ठिठौली करने वाले दोस्तों से थोड़ी देर ही सही पर मिले जरूर। विगत गलतियों को स्वीकार कर अपने आप को परिमार्जित करें। अर्थोपार्जन को अतिरिक्त मेहनत करके भी जारी रखें लेकिन चंद समय में ही सब कुछ पा लेने की तृष्णा ना पालें। अच्छे और बुरे दौर की आराम को लेकर तुलना ना करें। निश्चित तौर पर आप अपने आराम वाले दौर से आज ज्यादा सीख रहे हो। ये कठिन दौर ही वो ‘यु-टर्न’ है जहाँ से आपकी जिन्दगी चमकना शुरू हो रही है।

तिल तिल करके वैयक्तिक और भौतिक संपत्तियां उनकी नष्ट होती है जो आराम फरमा रहे है। कर्मवीर अलग अंदाज में अलग किरदार के साथ कुछ अलग ही जलवा बिखेरने के लिए ऊर्जा का पुंज बन कर ऊर्जा देता भी रहता है और बटोरता भी रहता है।

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