कुलभूषण जाधव को राजनयिक पहुँच मिले : आइसीजे

कुलभूषण जाधव को राजनयिक पहुँच मिले : आइसीजे

क्या है खबर?

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने कुलभूषण जाधव के मामले में अपना फैसला दिया है तथा उनको राजनयिक पहुँच प्रदान करने का निर्णय लिया है।

क्या है कुलभूषण जाधव का मामला?

  • कुलभूषण जाधव भारत की नौसेना के पूर्व कमांडो हैं जो अब शिपिंग के कारोबार से जुड़े हुए हैं।
  • इन्हें पूरी साजिश के तहत् ईरान से अगवा किया गया और पाकिस्तान द्वारा बलुचिस्तान में भारतीय एजेंट होने तथा वहाँ आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े होने का आरोप लगाया है।
  • इन्हीं आरोप के तहत् पाकिस्तान की फील्ड जेनरल कोर्ट में मुकदमा चलाया गया तथा कोर्ट द्वारा इन्हें फांसी की सजा सुनाई गई दरअसल ये कोर्ट बेहद गोपनीय तरीके से आरोपों को तय करते हैं जिन्हें विश्वसनीय नहीं कहा जा सकता है।
  • अप्रैल, 2017 में सैनिक कोर्ट द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा के मामले को भारत आईसीजे (इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस) ले गया था जहाँ मामला 2 माह तक चला था और आईसीजे ने पाँच माह पहले ही फांसी की सजा पर अंतिरम रोक लगा दी थी।
  • अब अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने पाक से सजा पर पुनर्विचार करने तथा राजनयिक पहुँच प्रदान करने को कहा है साथ ही वियना समझौते का पालन न करने पर फटकार लगाई है।

क्या है भारत के तथ्य?

  • पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को 3 मार्च, 2016 को पकड़ा और 25 मार्च, 2016 को इसकी जानकारी भारत को दी।
  • समय पर जानकारी न प्रदान करके पाकिस्तान में वियना समझौते के अनुच्छेद 36 (1) (ब) का उल्लंघन किया है।
  • सैन्य अदालत में बयान को दर्ज करना, राजनयिक पहुँच से इनकार करना तथा कोर्ट की अत्यन्त गोपनीय तरीके से की गई कार्यवाही पर भारत ने सवाल उठाए है।
  • चूंकि कुलभूषण जाधव का मुकदमा नागरिक मुकदमा है लेकिन इसे सैन्य अदालत में चलाना निर्धारित प्रक्रिया तथा अन्तर्राष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन है।
  • राजनयिक पहुँच के मामले में द्विपक्षीय संधि का हवाला देकर बहुपक्षीय संधि (वियना) से नहीं मुकरा जा सकता है।
  • जब पाकिस्तान ने जाधव को गिरफ्तार किया उस समय जाधव का अपना वास्तविक पासपोर्ट था और कोई खुफिया ऐजेंट अपना वास्तविक पासपोर्ट नहीं रखता।

क्या वजह हो सकती है कुलभूषण जाधव को मोहरा बनाने की?

  • हाल के समय में भारत ने अपनी रणनीति तथा कूटनीति से पाकिस्तान को अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग कर दिया है।
  • अलग-थलग होने से पाकिस्तान का आतंक समर्थक चेहरा दुनिया के सामने आ गया है और उस पर अन्तर्राष्ट्रीय दबाव बना है।
  • वह अपने आतंक के मुद्दे से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए ऐसी कार्यवाही एक रणनीति के तहत कर सकता है।
  • इसके माध्यम से वह भारत पर भी बलुचिस्तान में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार ठहराकर पाकिस्तान की यह भारत का जवाब देने की साजिश हो सकती है।

कितना सफल हुआ भारत?

  • फिलहाल यह फैसला आईसीजे ने भारत के पक्ष में 15-1 के बहुमत से दिया है।
  • फैसले से असहमत एक मात्र न्यायाधीश पाकिस्तान के टी.एस. गिलानी हैं जबकि चीन की शू हेनकिन ने फैसले के समर्थन में अपना मत दिया है।
  • संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश अदालत के उस फैसले को मानेंगे जिसमें वह स्वयं पक्षकार हैं। फैसला अंतिम होगा इसकी कोई अपील नहीं सुनी जाएगी अत: अंतर्राष्ट्रीय नियमों के अनुसार यह पाकिस्तान पर दबाव बनाता है।
  • ये फैसला पाकिस्तान पर दबाव बनाता है लेकिन पूरी तरह बाध्यकारी नहीं कहा जा सकता है। 1986 में अमेरिका ने भी आईसीजे का फैसला नहीं माना था।

यदि पाकिस्तान फैसला लागू न करे तो क्या है उपाय है हमारे पास?

यदि पाकिस्तान इस फैसले को लागू करने में अनिच्छा जताता है तो भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में इस फैसले को पाकिस्तान द्वारा लागू करवाने की गुहार लगा सकता है। लेकिन यहाँ पाकिस्तान के पक्ष में चीन द्वारा वीटो शक्ति का उपयोग किया जा सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय

  • यह संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख न्यायिक संस्था है।
  • जून, 1945 में इसका गठन हुआ तथा अप्रैल, 1946 में इसने अपना कार्य शुरू किया।
  • इसका मुख्यालय नीदरलैंड के हेग में है।
  • वर्तमान में इसके अध्यक्ष सोमालिया के अब्दुल कावी अहमद यूसुफ हैं।

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