एस-400 डील और तुर्की

एस-400 डील और तुर्की

क्या है खबर?

हाल ही में तुर्की द्वारा रूस से एस-400 वायु रक्षा प्रणाली को खरीदा गया है और इसकी प्रथम खेप प्राप्त हो चुकी है इसीलिए अमेरिका ने तुर्की को एफ-35 प्रोग्राम से बाहर कर दिया है।

क्या है एफ-35 प्रोग्राम?

  • इसे ज्वाइंट स्ट्राईक फाइटर (JSF) प्रोग्राम भी कहते है।
  • यह प्रोग्राम पुराने स्ट्राइक फाइटर को रिप्लेस करने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन, इटली,कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, हॉलैण्ड, तुर्की तथा अन्य सहयोगियों ने मिलकर शुरू किया था जिसमें सहयोगी देशों की कंपनियों का निवेश भी शामिल था।
  • इस प्रोग्राम के तहत् एफ-35 का विकास हुआ।
  • इस प्रोग्राम के तहत् तुर्की को 100 एफ-35 प्राप्त होने थे जो अमेरिका के परिष्कृत फाइटर यानों में गिना जाता है।
  • तुर्की की कंपनियों ने इस प्रोग्राम में अच्छा निवेश किया है तथा F-35 के 900 से ज्यादा हिस्सों का विकास किया है।

क्यों बाध्य हुआ तर्की एस-400 की डील के लिए?

  • ओबामा प्रशासन के समय तुर्की से पेट्रॉयट एण्टी मिसाइल वायु रक्षा प्रणाली खरीदने की बात रखी थी किन्तु अमेरिका ने इसे ठुकरा दिया था।
  • तुर्की मानता है कि सीरिया गृह युद्ध से स्वयं को सुरक्षित करने के लिए वायु रक्षा प्रणाली अत्यंत जरूरी है।
  • तुर्की कुर्दिश फोर्स को आतंकवादी अलगाववादी संगठन मानता है जो उसकी सीमा सुरक्षा के लिए खतरा है जबकि अमेरिका सीरिया गृह युद्ध में कुर्दिश कोर्स का समर्थन करता है।

क्या है अमेरिकी और तुर्की के संबंध का इतिहास?

  • अमेरिका और तुर्की के संबंध शुरुआत से 2003 तक अच्छे रहे है चूंकि तुर्की नाटो का सदस्य है इसीलिए यह अमेरिका का रक्षा सहयोगी है।
  • तुर्की में अमेरिका का एयरबेस इनसरलिक स्थित है।
  • शीत युद्ध के समय तुर्की ने सोवियत यूनियन के प्रभाव को पश्चिमी देशों तक न पहुँचने देने में बफर क्षेत्र की भूमिका निभाई थी।
  • अमेरिका और तुर्की के संबंधों में दरार 2003 से आई जब अंकारा ने ईरान युद्ध के लिए इनसरलिक एयरबेस के इस्तेमाल करने की अमेरिका को अनुमति नहीं दी।
  • सीरिया गृह युद्ध के संदर्भ में भी अमेरिका और तुर्की के मध्य मतभेद उभरे। इसमें तुर्की असद सरकार को अपदस्थ करना चाहता था जबकि अमेरिका आईएसआईएस के प्रसार को रोकने पर ज्यादा ध्यान दे रहा था इसीलिए आईएसआईएस के खिलाफ लड़ने वाले कुर्दिशों का अमेरिका ने समर्थन किया।
  • चूंकि अंकारा कुर्दिशों को प्रथकृतावादी व आतंकवादी मानता है इसके अलावा कुर्दिशों के प्रतिरोध से आईएसआईएस की पहुँच सीरिया से कम होने लगी इससे प्रभावित हो आईएसआईएस ने तुर्की पर हमले शुरू किर दिए।
  • 2016 में संबंधों में और गिरावट तब आई जब अंकारा ने अमेरिका आधारित तुर्की के पादरी फैतुल्लाह गुलेन पर ऐरदोगन की सरकार को अपदस्थ करने का आरोप लगाया।
  • तुर्की ने फैदुल्लाह गुलेन की सहायता करने के मामले में सीआईए ऑफीसर पर आरोप लगाया लेकिन अमेरिका ने ऑफीसर को सौंपने से मना कर दिया।
  • वर्तमान में तुर्की द्वारा एस-400 खरीदने तथा अमेरिका द्वारा F-35 प्रोग्राम से अलग करने के कारण दोनों देशों के संबंध में गिरावट जारी है। तुर्की, रूस से SU-35 खरीदने पर भी विचार कर रहा है।

अमेरिका के लिए क्यों है तुर्की आवश्यक?

  • तुर्की नाटो का सदस्य है जो कि अमेरिका के मुख्य रक्षात्मक भागीदार में से एक है।
  • तुर्की की भौगोलिक स्थिति अत्यंत रणनीतिक है क्योंकि यह यूरोप तथा एशिया को जोड़ता है, इसकी सीमा काले सागर तथा भूमध्य सागर से लगी हुई है।
  • यह रूस एवं पश्चिमी देशों के मध्य शक्ति संतुलन के रूप में कार्य करता है।

कैसे बढ़ा रहा है रूस, तुर्की में अपनी उपस्थिति?

  • 2016 में तुर्की द्वारा रूस का फाइटर जेट मार गिराया गया लेकिन रूस ने कोई कठोर कदम नहीं उठाया।
  • जब तुर्की को भान हो गया कि असद सरकार को अपदस्थ करना मुश्किल है तो उसने सीरिया के कुर्दिस्तान की सीमा में बफर क्षेत्र विकसित किया जिसमें रूस ने तुर्की की मदद की।
  • दोनों देशों के मध्य अस्ताना शांति वार्ता, सीरिया शांति सेटलमेंट जैसी बैठकें हुई जिसने संबंधों को अच्छा बनाने में भूमिका निभाई।
  • सितंबर, 2017 तक दोनों देशों में विश्वास स्थापित हो चुका था तथा तुर्की ने एस-400 की डील की।

एस-400

  • रूस द्वारा विकसित S-400 एडवांस मिसाइल डिफेंस सिस्टम है इसे रूस की अल्माज सेंट्रल डिजाइन ब्यूरो द्वारा विकसित किया गया है।
  • नाटो देशों ने इसे SA-21 ग्रोलर नाम दिया है।
  • इसका विस्तार 400 किमी. तक है यह एक साथ कई ऑब्जेक्ट को टारगेट कर सकता है।
  • यह एक बार में 36 लक्ष्यों को भेद सकता है।
  • यह बैलेस्टिक मिसाईल, सुपरसोनिक मिसाईल, हाइपर सोनिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल तथा वायुयानों को टारगेट कर सकता है।
  • इसका उपनाम एस-400 ट्रायंफ है।

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